मंगलवार, 3 जुलाई 2018

बाल को काला करने और उन्हें बढ़ाने की औषधि के रूप में भृगराज आयुर्वेद जगत की एक प्रसिद्ध वनस्पति है

बाल को काला करने और उन्हें बढ़ाने की औषधि के रूप में भृगराज आयुर्वेद जगत की एक प्रसिद्ध वनस्पति है। इसके पौधे सारे भारत में जलाशयों के निकट की नम भूमि में अकसर पाए जाते हैं। इसके छोटे-छोटे पौधे झाड़ी की तरह जमीन पर फैलकर या थोड़ा उठकर 6 से 8 इंच ऊंचाई के होते हैं। शाखाएं कालापन लिए रोमयुक्त, ग्रंथियों से जड़युक्त होती हैं। पत्तियां आयताकार, भालाकार, 1 से 4 इंच लंबी और आधा से एक इंच चौड़ी, बहुत दन्तुर होती हैं,
जिनको मसलने से हरा कालापन लिए हलका सुगंध युक्त रस निकलता है, जो स्वाद में कडुवा, चरपरा लगता है। पुष्प सफेद, पीले और नीले रंगों में लगते हैं। औषधि प्रयोग के लिए सफेद और पीले फूलों वाले पौधों का उपयोग किया जाता है।
घड़ी के आकार के गोल व सफेद पुष्प छोटे-छोटे पुष्प दंड पर लगते हैं। फल एक इंच लंबे तथा अग्र भाग पर रोम युक्त होते हैं, जिसमें छोटे, लंबे, काले जीरे के समान अनेक बीज निकलते हैं। शरद् ऋतु में पुष्प और फलों की बहार आती है। रंग भेद के अनुसार कुछ जातियों में कृपया शेयर करें व पुण्य कमाएँ डॉ जितेंद्र गिल सदस्य भारतीय चिकित्सा परिषद् के पद चिन्ह पर
भृंगराज के विभिन्न भाषाओं में नाम – Bhringraj Ke Name
संस्कृत (Bhringraj In Sanskrit) – भृगराज।
हिंदी (Bhringraj In Hindi) – भांगरा।
मराठी, गुजराती (Bhringraj In Marathi & Gujarati) – भागरो।
बंगाली (Bhringraj In Bangali) – केसुरिया।
अंग्रेजी (Bhringraj In English) – ट्रेलिंग इकिलप्टा (Tralling Eclipta)
लैटिन (Bhringraj In Latin) – इकिलप्टा (Eclipta alba)
आयुर्वेदिक मतानुसार भृंगराज रस में कटु, तिक्त, गुण में हलका, तीक्ष्ण, प्रकृति में गर्म, वात-कफ नाशक, दीपन, पाचक, यकृत को उत्तेजित करने वाला, वेदना नाशक, नेत्रों और त्वचा के लिए हितकर, केशों को काला करने और बढ़ाने वाला, व्रण शोधक, बलवर्धक, रक्तशोधक, बाजीकारक, रसायन, मूत्रल होता है। यह रक्त विकारों, सिर दर्द, पाण्डु, कामला, सूजन, आंव, दंत रोग, उच्च रक्तचाप, उदर विकार, खांसी, श्वास रोग में गुणकारी है।
वैज्ञानिक मतानुसार भृंगराज की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसमें प्रचुर मात्रा में एक्लिप्टिन नामक एल्केलाइड और राल के अलावा वेडेलोलेक्टोन अल्प मात्रा में पाया जाता है।
बीजों में विशेष रूप से मूत्रल गुण पाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसकी पत्तियों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, अतः कुछ लोग इसकी सब्जी बनाकर भी सेवन करते हैं। औषधि प्रयोग के लिए इसके पंचांग का प्रयोग अधिक लाभकारी पाया गया है।
सावधानी : भृंगराज के रस को गर्म करने और उबालने से इसके गुण नष्ट हो जाते हैं।
उपलब्ध आयुर्वेदिक योग
भृगराज घृत, भृगराज तेल, षड्रबिंदु तेल, भृगराजादि चूर्ण आदि।
1. फोड़े-फुसी खत्म करे भृंगराज :-
भृगराज की पत्तियों को पीसकर फोड़े-फुसी पर दिन में 2-3 बार लगाते रहने से कुछ ही दिन में ठीक हो जाएंगी।
2. नए बाल उगाने के लिए भृंगराज :-
उस्तरे से सिर मुड़वा लेने के बाद उस पर भृगराज के पतों का रस दिन में 2-3 बार मलते रहने से कुछ हफ्तों में नए बाल घने निकलेंगे।
3. बाल कालेघने, लंबे बनाने के लिए भृंगराज :-
भृंगराज के पंचांग का चूर्ण और खाने वाले काले तिल सम मात्रा में मिलाकर सुबह खाली पेट 2 चम्मच की मात्रा में खूब चबा-चबाकर रोजाना खाते रहने से 4-6 महीनों में बालों का गिरना रुक कर वे स्वस्थ बन जाते हैं।
4. अनिद्रा को दूर करे भृंगराज :-
सोने से पूर्व भृगराज के तेल की सिर में मालिश करने से अच्छी नींद आ जाएगी।
5. बिच्छू दंश पीड़ा के लिए भृंगराज :-
मूंगराज के पत्तों को पीसकर दंश पर लगाने से आराम मिलेगा।
6. यकृत पीड़ा में इस्तेमाल करे भृंगराज
पत्तों के एक चम्मच रस में आधा चम्मच अजवायन चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से यकृत पीड़ा में लाभ मिलेगा।
7. जीर्ण उदरशूल होने पर भृंगराज :-
2 चम्मच पत्तों के चूर्ण में आधा चम्मच काला नमक मिलाकर जल के साथ सेवन करने से आराम मिलेगा।
8. शक्ति वर्द्धक भृंगराज :-
भृगराज के पत्तों का 100 ग्राम चूर्ण और 50-50 ग्राम खाने वाले काले तिल व आंवला चूर्ण मिलाकर 200 ग्राम मिस्री के साथ पीस लें। एक कप दूध के साथ सुबह-शाम 2 चम्मच की मात्रा में रोजाना सेवन करने से शरीर में शक्ति बढ़ती है और वीर्य में पुष्टता आती है।
9. आग से जलने पर भृंगराज का इस्तेमाल :-
भृगराज और तुलसी के पत्ते बराबर की मात्रा में मिलाकर पीस लें और तैयार लेप को आग के जले स्थान पर लगाएं, तुरंत आराम मिलेगा।
10. भृंगराज उच्च रक्तचाप में :-
भृगराज के पतों का रस 2-2 चम्मच की मात्रा में एक चम्मच शहद के साथ दिन में दो बार नियमित सेवन करने से हाई ब्लडप्रेशर में कुछ ही दिनों में आराम मिलता है। एक बार बी.पी. नार्मल हो जाए, तो कब्ज़ियत की शिकायत पैदा न होने देंगे, तो वह सामान्य बना रह सकता है।
11. सिर दर्द में लाभकारी भृंगराज :-
सिर में भृगराज के पत्तों का रस लगाकर मालिश करने से सिर दर्द में राहत मिलेगी।माइग्रेन (अधकपाटी) का उपचार करने के लिए इसे नाक आसवन (नस्य) के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। इस प्रयोजन के लिए, भृंगराज रस को समान मात्रा में बकरी के दूध में मिलाकर, उसकी 2 से 3 बूंदों को सूर्योदय से पहले दोनों नथुनों में डाला जाता है।

सोमवार, 2 जुलाई 2018

अश्वगंधा आयुर्वेद में उपयोग की जाने वाली एक अदभुत ओषधि है

अश्वगंधा आयुर्वेद में उपयोग की जाने वाली एक अदभुत ओषधि है | कृपया इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें व पुण्य कमाएँ 
इसीलिए अश्वगंधा को प्रयोग करके वीर्य की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है | साथ ही premature ejaculation और दूसरी कामक्रिया सम्बन्धी 
अश्वगंधा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है जिससे आप बहुत सी बिमारियों से बच सकते हैं | छोटी मोटी समस्याएँ तो अश्वगंधा के प्रयोग से आपको छु भी नहीं पाएंगी
इसमें एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा बहुत अधिक होती है जिससे ये इम्युनिटी को बढाता है
यह हमारे दिल के मसल्स को मजबूत बनाता है | यह cholesterol और triglyceride के levels को कम करता है जो की एक रिसर्च में प्रमाणित हो चूका है
इस तरह यह रक्त में कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम कर आपको हार्ट अटैक जैसी गम्भीर समस्या से बचाता है

अश्वगंधा वेट गेन के साथ height gain करने में भी आपकी मदद कर सकता है | अगर आप सच में हाइट बढ़ाना चाहते है तो आप इसे प्रयोग कर सकते हैं और इसके पत्तों का सेवन करने से वेट कम होता है.
इसके सेवन से ग्रोथ होर्मोनेस ट्रिगर होते हैं जिससे आपकी हाइट बढ़ सकती है | यह bone skeleton को चौड़ा और बड़ा करता है | जिससे हाइट बढ़ाने में मदद मिलती है, इसके साथ आपको कुछ हाइट बढ़ाने वाली एक्सरसाइजेज भी करनी चाहिए

यह थाइरोइड से पीड़ित लोगों की मदद कर सकता है | यह थाइरोइड ग्रंथि की सही कार्य प्रणाली में मदद करता है |

यह शरीर में स्फूर्ति व नयी उर्जा का संचार करता है | थाइरोइड की समस्या की वजह से आई शारीरिक कमजोरी को भी दूर करता है अगर ashwagandha roots (जड़) का प्रयोग लगातार किया जाए तो इससे thyroid hormones के स्त्राव में वृद्धि होती है |
अश्वगंधा में कैंसर से लड़ने के गुण पाए जाते हैं | बहुत सी रिसर्च में ये बात सामने आई है कि अश्वगंधा कैंसर सेल्स को बनने और बढ़ने से रोकता है |
यह शरीर में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) का निर्माण करता है जो कैंसर सेल्स को ख़तम करती हैं |

इसका प्रयोग कैंसर के इलाज के साथ भी किया जा सकता है | यह कीमोथेरपी को प्रभावित किए बिना कीमोथेरपी से होने वाले साइड इफेक्ट्स को भी कम करता है |
इसके प्रयोग से कीमोथेरपी की वजह से शरीर के दुसरे सेल्स को होने वाले नुक्सान से भी बचा जा सकता है | यह कीमोथेरपी व रेडिएशन जैसी प्रक्रियाओं के प्रभाव को भी बढ़ा देता है
अश्वगंधा में मौजूद alkaloids, saponins और steroidal lactones के कारण ये एक एंटी इन्फ्लाम्मेट्री की तरह से काम करता है और सूजन को कम करता है
अपने anti-inflammatory गुणों की वजह से इसे आर्थराइटिस और ओस्टो आर्थराइटिस के इलाज में प्रयोग किया जाता है
यह जोड़ों की सूजन को कम करता है और जोड़ों में होने वाले दर्द से भी राहत दिलाता है | इसके प्रयोग से जोड़ों व शरीर में शक्ति का संचार होता है | जिससे पीड़ित मरीज सामान्य जीवन जी सकता है
अश्वगंधा में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं |
यह सामान्य सर्दी जुकाम से लेकर दुसरे बड़े इन्फेक्शन में भी शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है
यह urinogenital, gastrointestinal और respiratory tract infections को दूर करने में गुणकारी तरीके से काम करती है
अश्वगंधा दिमाग को तेज करने की कारगर आयुर्वेदिक ओषधि है | इसे लेने से neural signals को ट्रांसमिट करने वाले acetylcholine की प्रोडक्शन में इजाफा होता है
Alzheimer’s disease से लड़ने में यह एक रिसर्च के अनुसार कारगर साबित हुआ है
अश्वगंधा के इस्तेमाल से सोचने समझने की शक्ति, यादाश्त और कंसंट्रेशन में भी इजाफा होता है | बुढ़ापे में भूलने और दूसरी दिमाग से जुडी समस्याओं में भी अश्वगंधा का प्रयोग फायदेमंद होता है
रात को सोने से पहले गर्म दूध के साथ अश्वगंधा पाउडर का सेवन लाभकारी माना जाता है | इससे नींद भी अच्छी आती है

आप अश्वगंधा चूर्ण को पानी में कुछ देर उबाल कर इसे काढ़ा या चाय के रूप में भी प्रयोग में ला सकते हैं |
किसी भी पदार्थ को अधिक मात्रा में लेना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ही होता है | अगर अश्वगंधा को भी अधिक मात्रा में लिया जाए तो पेट में दर्द, डायरिया और जी घबराने जैसी परेशानी हो सकती है |

रविवार, 1 जुलाई 2018

बच्चो के ह्रदय सम्बन्धी हर तरह की बिमारी के लिए श्री सत्य साईं बाबा की तरफ से देश में कई सुपर स्पेस्लिस्ट अस्पताल बनाए गए है जहां ह्रदय सम्बन्धी सभी बीमारियों का मुफ्त में इलाज एवं आपरेशन किया जाता

बच्चो के ह्रदय सम्बन्धी हर तरह की बिमारी के लिए श्री सत्य साईं बाबा की तरफ से देश में कई सुपर स्पेस्लिस्ट अस्पताल बनाए गए है जहां ह्रदय सम्बन्धी सभी बीमारियों का मुफ्त में इलाज एवं आपरेशन किया जाता , इतना है नहीं मरीज के साथ एक तीमारदार के लिए भी रहने और खाने की मुफ्त व्यवस्था है
Sri Sathya Sai Sanjeevani International
Centre for Child Heart Care & Research
Baghola, NH-2, Delhi-Mathura Road,
Palwal (District), Haryana – 121102
CONTACT
+91 1275 298140
info.palwal@srisathyasaisanjeevani.com

शनिवार, 23 जून 2018

किसी भी तरह केदस्त की शिकायत होने पर सप्तपर्णी की छाल का काढा रोगी को पिलाया जाए, दस्त तुरंत रुक जाते हैं।

अक्सर उद्यानों, सड़कों और घरों के आसपास सुंदर सफेद फूलों वाले मध्यम आकार के सप्तपर्णी के पेड़ देखे जा सकते हैं। यह एक ऐसा पेड़ है जिसकी पत्तियाँ चक्राकार समूह में सात – सात के क्रम में लगी होती है और इसी कारण इसे सप्तपर्णी कहा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम एल्सटोनिया स्कोलारिस है। सुंदर फ़ूलों और उनकी मादक गंध की वजह से इसे उद्यानों में भी लगाया जाता है और फूलों को अक्सर मंदिरों और पूजा घरों में भगवान को अर्पित भी किया जाता है। आदिवासियों के बीच इस पेड़ की छाल, पत्तियों आदि को अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर अपनाया जाता है। चलिए आज जानते हैं सप्तपर्णी के औषधीय महत्व के बारे में।
आधुनिक विज्ञान इसकी छाल से प्राप्त डीटेइन और डीटेमिन जैसे रसायनों को क्विनाईन से बेहतर मानता है। आदिवासियों के अनुसार इस पेड़ की छाल को सुखाकर चूर्ण बनाया जाए और 2-6 ग्राम मात्रा का सेवन किया जाए, इसका असर मलेरिया के बुखार में तेजी से करता है। मजे की बात है इसका असर कुछ इस तरह होता है कि शरीर से पसीना नहीं आता जबकि क्विनाईन के उपयोग के बाद काफी पसीना आता है।
पेड़ से प्राप्त दूधनुमा द्रव को तेल के साथ मिलाकर कान में ड़ालने से कान दर्द में आराम मिल जाता है। डाँगी आदिवासियों की मानी जाए तो रात सोने से पहले २ बूंद द्रव की कान में ड़ाल दी जाए तो कान दर्द में राहत मिलती है।
पातालकोट के आदिवासियों का मानना है कि प्रसव के बाद माता को यदि छाल का रस पिलाया जाता है तो माता के स्तनों से दुध स्त्रावण की मात्रा बढ जाती है।
जुकाम और बुखार होने पर सप्तपर्णी की छाल, गिलोय का तना और नीम की आंतरिक छाल की समान मात्रा को कुचलकर काढा बनाया जाए और रोगी को दिया जाए तो अतिशीघ्र आराम मिलता है।
दाद, खाज और खुजली में भी आराम देने के लिए सप्तपर्णी की छाल के रस का उपयोग किया जाता है। छाल के रस के अलावा इसकी पत्तियों का रस भी खुजली, दाद, खाज आदि मिटाने के लिए काफी कारगर होता है। आधुनिक विज्ञान भी इन दावों से काफी सहमत है।
पेड़ से प्राप्त होने वाले दूधनुमा द्रव को घावों, अल्सर आदि पर लगाने से आराम मिल जाता है। दूधनुमा द्रव को घावों पर उंगली से लगाया जाए तो जल्दी घाव सूखने लगते हैं। घावों पर द्रव को प्रतिदिन रात सोने से पहले लगाना चाहिए।
डाँग-गुजरात के आदिवासियों के अनुसार किसी भी तरह केदस्त की शिकायत होने पर सप्तपर्णी की छाल का काढा रोगी को पिलाया जाए, दस्त तुरंत रुक जाते हैं। काढे की मात्रा ३ से ६ मिली तक होनी चाहिए तथा इसे कम से कम तीन बार प्रत्येक चार घंटे के अंतराल से दिया जाना चाहिए।
सप्तपर्णी की छाल का काढा पिलाने से बदन दर्द और बुखार में आराम मिलता है। डाँग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार इसकी छाल को सुखा लिया जाए और चूर्ण तैयार किया जाए। चूर्ण को पानी के साथ उबालकर काढा तैयार किया जाता है और रोगी को दिया जाता है।कृपया इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें व पुण्य कमाएँ आपका अपना डॉ जितेंद्र गिल सदस्य भारतीय चिकित्सा परिषद् हरियाणा!

शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

गांवों में इंटरनेट पहुंचा रहे हैं वीएलई

गांवों में इंटरनेट पहुंचा रहे हैं वीएलई
टेलिकॉम मिनिस्ट्री की एक रिसर्च के मुताबिक, अब सीएससी के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की पहुंच हो रही है। इंटरनेट से जुड़ी सर्विस गांवों में भी पहुंच रही हैं। इन सेंटर्स में आईडी कार्ड एवं वेडिंग कार्ड की प्रिंटिंग, लेमिनेशन, डिजाइनिंग, डॉक्‍युमेंट की स्‍कैनिंग व प्रिंटिंग होती है। स्‍टूडेंट्स को कम्प्‍यूटर सिखाया जाता है और वह आसपास के गांवों के युवाओं को जॉब फॉर्म भी देते हैं, जिन्‍हें अलग-अलग वेबसाइट से डाउनलोड किया जाता है।
कितनी हो रही है कमाई
सरकार द्वारा कराए गए अलग अलग सर्वे के मुताबिक, विलेज लेवल एंटरप्रेन्‍योर की कमाई अलग अलग है। कहीं-कहीं ये वीएलई 25 हजार रुपए महीना तक कमा रहे हैं। सरकार का दावा है कि साल 2016-17 में सरकार ने इन वीएलई को कुल 112 करोड़ रुपए कमीशन दी, जो सर्विसेज बढ़ने के साथ और बढ़ रही है। वीएलई प्राइवेट प्रोडक्‍ट्स बढ़ा कर भी अपनी कमाई बढ़ा रहे हैं।
ऐसे कर सकते हैं कमाई
सीएससी में पैन कार्ड, आधार कार्ड, इलेक्‍शन कार्ड, मतदाता सूची में नाम जुड़वाना, पहचान पत्र, पासपोर्ट बनाने की सुविधा दी जा सकती है। इसके अलावा आप मोबाइल रिचार्ज, मोबाइल बिल पेमेंट, डीटीएच रिचार्ज, इंस्टैंट मनी ट्रांसफर, डाटा कार्ड रिचार्ज, एलआईसी प्रीमियम, रेड बस, एसबीआई लाइफ, बिल क्‍लाउड जैसी निजी सेवाएं भी उपलब्ध करा सकते हैं।
यहां बैंकिंग, इन्श्‍योरेंस और पेंशन सर्विस भी दी जा सकती है। सीएससी में प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम, डिजिटल लिटरेसी प्रोग्राम, वोकेशनल व स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग दी जा सकती है। किसानों को सीएससी के माध्‍यम से मौसम की जानकारी व मिट्टी की जांच जैसी सर्विस भी दी जाएगी। इतना ही नहीं टेलीमेडिसन सर्विस भी लोगों को उपलब्ध कराई जा सकती है।
कितना करना होगा इन्‍वेस्‍टमेंट
यदि आप सीएससी खोलना चाहते हैं तो आपके पास कम से 100 से 150 वर्ग फुट स्‍पेस होना चाहिए। इसके अलावा कम से एक कम्प्‍यूटर (यूपीएस के साथ), एक प्रिंटर, डिजिटल/वेब कैमरा, जेनसेट या इन्वर्टर या सोलर पैनल, ऑपरेटिंग सिस्‍टम और एप्‍लिकेशन सॉफ्टवेयर, ब्रॉडबैंड कनेक्‍शन होना चाहिए। इन सब पर आपको 2 से 2.5 लाख रुपए का इन्वेस्‍टमेंट करना पड़ सकता है।
वीएलई बनने के लिए क्‍या करना होगा
वीएलई बनने के लिए आपके पास आधार नंबर होना जरूरी है। इसके जरिए आप https://csc.gov.in वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। उसके आधार पर आपको ओटीपी नंबर मिलेगा। इसके जरिए आप सीएससी के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
यदि आप ऑफलाइन आवेदन करना चाहते हैं तो ग्राम पंचायत या नगर पंचायत स्‍तर पर एक कमेटी का गठन किया जा रहा है। आपको इस कमेटी के पास आवेदन करना होगा, जो आपके प्रपोजल की स्‍टडी करने के बाद आपको सीएससी का लाइसेंस देगी।
क्‍या है वीएलई योजना
दरअसल, नेशनल ई-गवर्नेंस प्‍लान के तहत सरकार सभी सरकारी सर्विस सस्‍ती दर पर लोगों तक पहुंचाना चाहती है। इसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड टेक्‍नोलॉजी द्वारा देश भर में कॉमन सर्विस सेंटर खोले जाने हैं। कॉमन सर्विस सेंटर, जिन युवकों को दिया जाता है, उन्‍हें विलेज लेवल एंटरप्रेन्‍योर कहा जाता है।
एक सीएससी में सरकारी, प्राइवेट और सोशल सेक्‍टर जैसे टेलीकॉम, एग्रीकल्‍चर, हेल्‍थ, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, एफएमसीजी प्रोडक्‍ट, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस, सभी तरह के प्रमाणपत्र, आवेदन पत्र और यूटिलिटी बिल की पेमेंट की जा सकती है। सरकार सीएससी में मिलने वाले प्रोडक्‍ट्स की सर्विसेज की संख्‍या बढ़ाती जा रही है। जैसे कि अब यहां इंश्‍योरेंस प्रोडक्‍ट भी बेचे जा सकते हैं।

गुरुवार, 26 अप्रैल 2018

खांसी में स्टेरॉयड का भी बाप है कॉफ़ी का ये प्रयोग*

 खांसी में स्टेरॉयड का भी बाप है कॉफ़ी का ये प्रयोग*
क्या आपको अक्सर ही खांसी लगी रहती है ? क्या आपकी खांसी बहुत पुरानी हो चुकी है ?
क्या बार बार दवा लेने के बाद भी आपकी खांसी नहीं जा रही ?
और आप दवा ले ले कर परेशान हो गए हो तो अभी ये जो फार्मूला हम बताने जा रहें हैं ये खांसी के मामले में स्टेरॉयड का भी बाप है. स्टेरॉयड कोई दवा नहीं होती ये डॉक्टर तब दिए जाते हैं जब कोई दवा असर ना करे. और स्टेरॉयड शरीर के लिए बेहद हानिकारक है. इस नुस्खे के बारे में हम ये भी बताना चाहते हैं के अनेक आधुनिक डॉक्टर भी इस का रिजल्ट देख कर चकित हो गए हैं. तो आइये जाने ये बेहतरीन नुस्खा.
*》इस प्रयोग में आवश्यक सामग्री.*
 एक कप बनी हुयी फीकी काली कॉफ़ी (बिना दूध और चीनी के)
 दो चम्मच शहद
 दालचीनी – एक चुटकी (इच्छा अनुसार)
*》इसके उपयोग की विधि*
एक कप गर्म कॉफ़ी में दो चम्मच शहद अच्छे से मिला लीजिये. अब इस कॉफ़ी को धीरे धीरे घूँट घूँट कर पीजिये. यह प्रयोग दिन में दो बार कीजिये. सुबह और शाम को. पुराने से पुरानी और किसी भी प्रकार की खांसी इस प्रयोग के कुछ दिन करने से छू मंतर हो जाती है.
कफ की समस्या वाले 97 रोगियों पर यह प्रयोग किया गया जिसमे इतना चौंकाने वाले रिजल्ट मिले के कई मल्टी नेशनल फार्मा कंपनियों की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ गया. इस ड्रिंक को और शक्तिशाली बनाने के लिए आप इसमें चुटकी भर दालचीनी का पाउडर भी डाल सकते हैं.
आपके सु स्वास्थ्य की कामना रखते हैं. आप जब भी ये प्रयोग करें तो हमको अपने रिजल्ट एक हफ्ते के बाद ज़रूर बताएं. वैसे तो आप पहले ही बता देंगे क्यूंकि ये रिजल्ट ही इतना जल्दी देता है.
*● विशेष जब भी खांसी हो तो ये प्रयोग आजमा लिया कीजिये. आज के बाद कभी खांसी की कोई दवा तुरंत ना लें. पहले ये प्रयोग कर के देख ले.*

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

शक्ति वर्धक उपाय

शक्ति वर्धक उपाय
1. आंवलाः- 2 चम्मच आंवला के रस में
एक छोटा चम्मच सूखे आंवले का चूर्ण
तथा एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर
दिन में दो बार सेवन करना चाहिए।
इसके इस्तेमाल से सेक्स शक्ति धीरे-
धीरे बढ़ती चली जाएगी।
• 2. पीपलः- पीपल का फल और
पीपल की कोमल जड़ को बराबर
मात्रा में लेकर चटनी बना लें। इस 2
चम्मच चटनी को 100 मि.ली. दूध
तथा 400 मि.ली. पानी में मिलाकर
उसे लगभग चौथाई भाग होने तक
पकाएं। फिर उसे छानकर आधा कप
सुबह और शाम को पी लें। इसके
इस्तेमाल करने से वीर्य में तथा सेक्स
करने की ताकत में वृद्धि होती है।
• 3. प्याजः- आधा चम्मच सफेद
प्याज का रस, आधा चम्मच शहद तथा
आधा चम्मच मिश्री के चूर्ण को
मिलाकर सुबह और शाम सेवन करें। यह
मिश्रण वीर्यपतन को दूर करने के लिए
काफी उपयोगी रहता है।
• 4. चोबचीनीः- 100 ग्राम
तालमखाने के बीज, 100 ग्राम
चोबचीनी, 100 ग्राम ढाक का गोंद,
100 ग्राम मोचरस तथा 250 ग्राम
मिश्री को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें।
रोजाना सुबह के समय एक चम्मच चूर्ण
में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं। यह
मिश्रण यौन रुपी कमजोरी, नामर्दी
तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे
रोग को खत्म कर देता है।
• 5. कौंच का बीजः- 100 ग्राम
कौंच के बीज और 100 ग्राम
तालमखाना को कूट-पीसकर चूर्ण
बना लें। फिर इसमें 200 ग्राम मिश्री
पीसकर मिला लें। हल्के गर्म दूध में
आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर रोजाना
इसको पीना चाहिए। इसको पीने से
वीर्य गाढ़ा हो जाता है तथा
नामर्दी दूर होती है।
• 6. इमलीः- आधा किलो इमली के
बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन
बीजों को तीन दिनों तक पानी में
भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों
को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद
बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर
इसमें आधा किलो पिसी मिश्री
मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक
चौड़ी शीशी में रख लें। आधा चम्मच
सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें।
इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी
गिरने के रोग तथा संभोग करने की
ताकत में बढ़ोतरी करता है।
• 7. बरगदः- सूर्यास्त से पहले बरगद के
पेड़ से उसके पत्ते तोड़कर उसमें से
निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें बताशे
पर रखकर खाएं। इसके प्रयोग से
आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स
शक्ति भी अधिक हो जाएगी।
• 8. सोंठः- 4 ग्राम सोंठ, 4 ग्राम
सेमल का गोंद, 2 ग्राम अकरकरा, 28
ग्राम पिप्पली तथा 30 ग्राम काले
तिल को एकसाथ मिलाकर तथा
कूटकर बारीक चूर्ण बना लें। रात को
सोते समय आधा चम्मच चूर्ण लेकर ऊपर
से एक गिलास गर्म दूध पी लें। यह
रामबाण औषधि शरीर की कमजोरी
को दूर करती है तथा सेक्स शक्ति को
बढ़ाती है।
• 9. अश्वगंधाः- अश्वगंधा का चूर्ण,
असगंध तथा बिदारीकंद को
100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर
बारीक चूर्ण बना लें। इसमें से आधा
चम्मच चूर्ण दूध के साथ सुबह और शाम
लेना चाहिए। यह मिश्रण वीर्य को
ताकतवर बनाकर शीघ्रपतन की
समस्या से छुटकारा दिलाता है।
• 10. त्रिफलाः- एक चम्मच त्रिफला
के चूर्ण को रात को सोते समय 5
मुनक्कों के साथ लेना चाहिए तथा
ऊपर से ठंडा पानी पिएं। यह चूर्ण पेट
के सभी प्रकार के रोग, स्वप्नदोष
तथा वीर्य का शीघ्र गिरना आदि
रोगों को दूर करके शरीर को मजबूती
प्रदान करता है।
11. छुहारेः- चार-पांच छुहारे, दो-
तीन काजू तथा दो बादाम को 300
ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर
तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री
मिलाकर रोजाना रात को सोते
समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा
और काम करने की शक्ति बढ़ती है।
• 12. उंटगन के बीजः- 6 ग्राम उंटगन के
बीज, 6 ग्राम तालमखाना तथा 6
ग्राम गोखरू को समान मात्रा में लेकर
आधा लीटर दूध में मिलाकर पकाएं।
यह मिश्रण लगभग आधा रह जाने पर
इसे उतारकर ठंडा हो जाने दें। इसे
रोजाना 21 दिनों तक समय अनुसार
लेते रहें। इससे नपुंसकता (नामर्दी) रोग
दूर हो जाता है।
• 13. तुलसीः- आधा ग्राम तुलसी के
बीज तथा 5 ग्राम पुराने गुड़ को
बंगाली पान पर रखकर अच्छी तरह से
चबा-चबाकर खाएं। इस मिश्रण को
विस्तारपूर्वक 40 दिनों तक लेने से
वीर्य बलवान बनता है, संभोग करने
की इच्छा तेज हो जाती है और
नपुंसकता जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं।
• 14. गोखरूः- सूखा आंवला, गोखरू,
कौंच के बीज, सफेद मूसली और गुडुची
सत्व- इन पांचो पदार्थों को समान
मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच
देशी घी और एक चम्मच मिश्री में एक
चम्मच चूर्ण मिलाकर रात को सोते
समय इस मिश्रण को लें। इसके बाद एक
गिलास गर्म दूध पी लें। इस चूर्ण से
सेक्स कार्य में अत्यंत शक्ति आती है।
• 15. सफेद मूसलीः- सालम मिश्री,
तालमखाना, सफेद मूसली, कौंच के
बीज, गोखरू तथा ईसबगोल- इन
सबको समान मात्रा में मिलाकर
बारीक चूर्ण बना लें। इस एक चम्मच
चूर्ण में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम
दूध के साथ पीना चाहिए। यह वीर्य
को ताकतवर बनाता है तथा को ताकतवर बनाता है तथा सेक्स
शक्ति में अधिकता लाता है।
• 16. हल्दीः- वीर्य अधिक पतला
होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच
हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह
के समय खाली पेट सेवन करना
चाहिए। इसका विस्तृत रुप से
इस्तेमाल करने से संभोग करने की
शक्ति बढ़ जाती है।
• 17. उड़द की दालः- आधा चम्मच
उड़द की दाल और कौंच की दो-तीन
कोमल कली को बारीक पीसकर सुबह
तथा शाम को लेना चाहिए। यह
उपाय काफी फायदेमंद है। इस नुस्खे
को रोजाना लेने से सेक्स करने की
ताकत बढ़ जाती है।
• 18. जायफलः- जायफल 10 ग्राम,
लौंग 10 ग्राम, चंद्रोदय 10 ग्राम,
कपूर 10 ग्राम और कस्तूरी 6 ग्राम को
कूट-पीसकर इस मिश्रण के चूर्ण की 60
खुराक बना लें। इसमें से एक खुराक को
पान के पत्ते पर रखकर धीरे-धीरे से
चबाते रहें। जब मुंह में खूब रस जमा हो
जाए तो इस रस को थूके नहीं बल्कि
पी जाएं। इसके बाद थोड़ी सी मलाई
का इस्तेमाल करें। यह चूर्ण रोजाना
लेने से नपुंसकता जैसे रोग दूर होते हैं
तथा सेक्स शक्ति में वृद्धि होती है।
• 19. शंखपुष्पीः- शंखपुष्पी 100
ग्राम, ब्राह्नी 100 ग्राम, असंगध 50
ग्राम, तज 50 ग्राम, मुलहठी 50 ग्राम,
शतावर 50 ग्राम, विधारा 50 ग्राम
तथा शक्कर 450 ग्राम को बारीक
कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर एक-एक चम्मच
की मात्रा में सुबह और शाम को लेना
चाहिए। इस चूर्ण को तीन महीनों
तक रोजाना सेवन करने से नाईट-फाल
(स्वप्न दोष), वीर्य की कमजोरी
तथा नामर्दी आदि रोग समाप्त
होकर सेक्स शक्ति में ताकत आती है।
• 20. गाजरः- 1 किलो गाजर, चीनी
400 ग्राम, खोआ 250 ग्राम, दूध 500
ग्राम, कद्यूकस किया हुआ नारियल
10 ग्राम, किशमिश 10 ग्राम, काजू
बारीक कटे हुए 10-15 पीस, एक
चांदी का वर्क और 4 चम्मच देशी घी
ले लें। गाजर को कद्यूकस करके कडा़ही
में डालकर पकाएं। पानी के सूख जाने
पर इसमें दूध, खोआ और चीनी डाल दें
तथा इसे चम्मच से चलाते रहें। जब यह
सारा मिश्रण गाढ़ा होने को हो
तो इसमें नारियल, किशमिश, बादाम
और काजू डाल दें। जब यह पदार्थ
गाढ़ा हो जाए तो थाली में देशी घी
लगाकर हलवे को थाली पर निकालें
और ऊपर से चांदी का वर्क लगा दें।
इस हलवे को चार-चार चम्मच सुबह और
शाम खाकर ऊपर से दूध पीना
चाहिए। यह वीर्यशक्ति बढ़ाकार
शरीर को मजबूत रखता है। इससे सेक्स
शक्ति भी बढ़ती है।
21. ढाकः- ढाक के 100 ग्राम गोंद
को तवे पर भून लें। फिर 100 ग्राम
तालमखानों को घी के साथ भूनें।
उसके बाद दोनों को बारीक काटकर
आधा चम्मच सुबह और शाम को दूध के
साथ खाना खाने के दो-तीन घंटे पहले
ही इसका सेवन करें। इसके कुछ ही
दिनों के बाद वीर्य का पतलापन दूर
होता है तथा सेक्स क्षमता में बहुत
अधिक रुप से वृद्धि होती है।
• 22. जायफलः- 15 ग्राम जायफल,
20 ग्राम हिंगुल भस्म, 5 ग्राम
अकरकरा और 10 ग्राम केसर को
मिलाकर बारीक पीस लें। इसके बाद
इसमें शहद मिलाकर इमामदस्ते में घोटें।
उसके बाद चने के बराबर छोटी-छोटी
गोलियां बना लें। रोजाना रात को
सोने से 2 पहले 2 गोलियां गाढ़े दूध के
साथ सेवन करें। इससे शिश्न (लिंग)
का ढ़ीलापन दूर होता है तथा
नामर्दी दूर हो जाती है।
• 23. इलायचीः- इलायची के दानों
का चूर्ण 2 ग्राम, जावित्री का चूर्ण
1 ग्राम, बादाम के 5 पीस और
मिश्री 10 ग्राम ले लें। बादाम को
रात के समय पानी में भिगोकर रख दें।
सुबह के वक्त उसे पीसकर पेस्ट की तरह
बना लें। फिर उसमें अन्य पदार्थ
मिलाकर तथा दो चम्मच मक्खन
मिलाकर विस्तार रुप से रोजाना
सुबह के वक्त इसको सेवन करें। यह वीर्य
को बढ़ाता है तथा शरीर में ताकत
लाकर सेक्स शक्ति को बढ़ाता है।
• 24. सेबः- एक अच्छा सा बड़े आकार
का सेब ले लीजिए। इसमें हो सके
जितनी ज्यादा से ज्यादा लौंग
चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। इसी
तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का
नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी
ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग
चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। दोनों
फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन
में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद
दोनों फलों में से लौंग निकालकर
अलग-अलग शीशी में भरकर रख लें। पहले
दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक
कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें।
इस तरह से बदल-बदलकर 40 दिनों तक
2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स
क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही
सरल उपाय है।
• 25. अजवायनः- 100 ग्राम
अजवायन को सफेद प्याज के रस में
भिगोकर सुखा लें। सूखने के बाद उसे
फिर से प्याज के रस में गीला करके
सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें।
उसके बाद इसे कूटकर किसी शीशी में
भरकर रख लें। आधा चम्मच इस चूर्ण को
एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ
मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से
हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक
महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें।
इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं
करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को
बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है।