शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

गांवों में इंटरनेट पहुंचा रहे हैं वीएलई

गांवों में इंटरनेट पहुंचा रहे हैं वीएलई
टेलिकॉम मिनिस्ट्री की एक रिसर्च के मुताबिक, अब सीएससी के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की पहुंच हो रही है। इंटरनेट से जुड़ी सर्विस गांवों में भी पहुंच रही हैं। इन सेंटर्स में आईडी कार्ड एवं वेडिंग कार्ड की प्रिंटिंग, लेमिनेशन, डिजाइनिंग, डॉक्‍युमेंट की स्‍कैनिंग व प्रिंटिंग होती है। स्‍टूडेंट्स को कम्प्‍यूटर सिखाया जाता है और वह आसपास के गांवों के युवाओं को जॉब फॉर्म भी देते हैं, जिन्‍हें अलग-अलग वेबसाइट से डाउनलोड किया जाता है।
कितनी हो रही है कमाई
सरकार द्वारा कराए गए अलग अलग सर्वे के मुताबिक, विलेज लेवल एंटरप्रेन्‍योर की कमाई अलग अलग है। कहीं-कहीं ये वीएलई 25 हजार रुपए महीना तक कमा रहे हैं। सरकार का दावा है कि साल 2016-17 में सरकार ने इन वीएलई को कुल 112 करोड़ रुपए कमीशन दी, जो सर्विसेज बढ़ने के साथ और बढ़ रही है। वीएलई प्राइवेट प्रोडक्‍ट्स बढ़ा कर भी अपनी कमाई बढ़ा रहे हैं।
ऐसे कर सकते हैं कमाई
सीएससी में पैन कार्ड, आधार कार्ड, इलेक्‍शन कार्ड, मतदाता सूची में नाम जुड़वाना, पहचान पत्र, पासपोर्ट बनाने की सुविधा दी जा सकती है। इसके अलावा आप मोबाइल रिचार्ज, मोबाइल बिल पेमेंट, डीटीएच रिचार्ज, इंस्टैंट मनी ट्रांसफर, डाटा कार्ड रिचार्ज, एलआईसी प्रीमियम, रेड बस, एसबीआई लाइफ, बिल क्‍लाउड जैसी निजी सेवाएं भी उपलब्ध करा सकते हैं।
यहां बैंकिंग, इन्श्‍योरेंस और पेंशन सर्विस भी दी जा सकती है। सीएससी में प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम, डिजिटल लिटरेसी प्रोग्राम, वोकेशनल व स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग दी जा सकती है। किसानों को सीएससी के माध्‍यम से मौसम की जानकारी व मिट्टी की जांच जैसी सर्विस भी दी जाएगी। इतना ही नहीं टेलीमेडिसन सर्विस भी लोगों को उपलब्ध कराई जा सकती है।
कितना करना होगा इन्‍वेस्‍टमेंट
यदि आप सीएससी खोलना चाहते हैं तो आपके पास कम से 100 से 150 वर्ग फुट स्‍पेस होना चाहिए। इसके अलावा कम से एक कम्प्‍यूटर (यूपीएस के साथ), एक प्रिंटर, डिजिटल/वेब कैमरा, जेनसेट या इन्वर्टर या सोलर पैनल, ऑपरेटिंग सिस्‍टम और एप्‍लिकेशन सॉफ्टवेयर, ब्रॉडबैंड कनेक्‍शन होना चाहिए। इन सब पर आपको 2 से 2.5 लाख रुपए का इन्वेस्‍टमेंट करना पड़ सकता है।
वीएलई बनने के लिए क्‍या करना होगा
वीएलई बनने के लिए आपके पास आधार नंबर होना जरूरी है। इसके जरिए आप https://csc.gov.in वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। उसके आधार पर आपको ओटीपी नंबर मिलेगा। इसके जरिए आप सीएससी के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
यदि आप ऑफलाइन आवेदन करना चाहते हैं तो ग्राम पंचायत या नगर पंचायत स्‍तर पर एक कमेटी का गठन किया जा रहा है। आपको इस कमेटी के पास आवेदन करना होगा, जो आपके प्रपोजल की स्‍टडी करने के बाद आपको सीएससी का लाइसेंस देगी।
क्‍या है वीएलई योजना
दरअसल, नेशनल ई-गवर्नेंस प्‍लान के तहत सरकार सभी सरकारी सर्विस सस्‍ती दर पर लोगों तक पहुंचाना चाहती है। इसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड टेक्‍नोलॉजी द्वारा देश भर में कॉमन सर्विस सेंटर खोले जाने हैं। कॉमन सर्विस सेंटर, जिन युवकों को दिया जाता है, उन्‍हें विलेज लेवल एंटरप्रेन्‍योर कहा जाता है।
एक सीएससी में सरकारी, प्राइवेट और सोशल सेक्‍टर जैसे टेलीकॉम, एग्रीकल्‍चर, हेल्‍थ, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, एफएमसीजी प्रोडक्‍ट, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस, सभी तरह के प्रमाणपत्र, आवेदन पत्र और यूटिलिटी बिल की पेमेंट की जा सकती है। सरकार सीएससी में मिलने वाले प्रोडक्‍ट्स की सर्विसेज की संख्‍या बढ़ाती जा रही है। जैसे कि अब यहां इंश्‍योरेंस प्रोडक्‍ट भी बेचे जा सकते हैं।

गुरुवार, 26 अप्रैल 2018

खांसी में स्टेरॉयड का भी बाप है कॉफ़ी का ये प्रयोग*

 खांसी में स्टेरॉयड का भी बाप है कॉफ़ी का ये प्रयोग*
क्या आपको अक्सर ही खांसी लगी रहती है ? क्या आपकी खांसी बहुत पुरानी हो चुकी है ?
क्या बार बार दवा लेने के बाद भी आपकी खांसी नहीं जा रही ?
और आप दवा ले ले कर परेशान हो गए हो तो अभी ये जो फार्मूला हम बताने जा रहें हैं ये खांसी के मामले में स्टेरॉयड का भी बाप है. स्टेरॉयड कोई दवा नहीं होती ये डॉक्टर तब दिए जाते हैं जब कोई दवा असर ना करे. और स्टेरॉयड शरीर के लिए बेहद हानिकारक है. इस नुस्खे के बारे में हम ये भी बताना चाहते हैं के अनेक आधुनिक डॉक्टर भी इस का रिजल्ट देख कर चकित हो गए हैं. तो आइये जाने ये बेहतरीन नुस्खा.
*》इस प्रयोग में आवश्यक सामग्री.*
 एक कप बनी हुयी फीकी काली कॉफ़ी (बिना दूध और चीनी के)
 दो चम्मच शहद
 दालचीनी – एक चुटकी (इच्छा अनुसार)
*》इसके उपयोग की विधि*
एक कप गर्म कॉफ़ी में दो चम्मच शहद अच्छे से मिला लीजिये. अब इस कॉफ़ी को धीरे धीरे घूँट घूँट कर पीजिये. यह प्रयोग दिन में दो बार कीजिये. सुबह और शाम को. पुराने से पुरानी और किसी भी प्रकार की खांसी इस प्रयोग के कुछ दिन करने से छू मंतर हो जाती है.
कफ की समस्या वाले 97 रोगियों पर यह प्रयोग किया गया जिसमे इतना चौंकाने वाले रिजल्ट मिले के कई मल्टी नेशनल फार्मा कंपनियों की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ गया. इस ड्रिंक को और शक्तिशाली बनाने के लिए आप इसमें चुटकी भर दालचीनी का पाउडर भी डाल सकते हैं.
आपके सु स्वास्थ्य की कामना रखते हैं. आप जब भी ये प्रयोग करें तो हमको अपने रिजल्ट एक हफ्ते के बाद ज़रूर बताएं. वैसे तो आप पहले ही बता देंगे क्यूंकि ये रिजल्ट ही इतना जल्दी देता है.
*● विशेष जब भी खांसी हो तो ये प्रयोग आजमा लिया कीजिये. आज के बाद कभी खांसी की कोई दवा तुरंत ना लें. पहले ये प्रयोग कर के देख ले.*

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

शक्ति वर्धक उपाय

शक्ति वर्धक उपाय
1. आंवलाः- 2 चम्मच आंवला के रस में
एक छोटा चम्मच सूखे आंवले का चूर्ण
तथा एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर
दिन में दो बार सेवन करना चाहिए।
इसके इस्तेमाल से सेक्स शक्ति धीरे-
धीरे बढ़ती चली जाएगी।
• 2. पीपलः- पीपल का फल और
पीपल की कोमल जड़ को बराबर
मात्रा में लेकर चटनी बना लें। इस 2
चम्मच चटनी को 100 मि.ली. दूध
तथा 400 मि.ली. पानी में मिलाकर
उसे लगभग चौथाई भाग होने तक
पकाएं। फिर उसे छानकर आधा कप
सुबह और शाम को पी लें। इसके
इस्तेमाल करने से वीर्य में तथा सेक्स
करने की ताकत में वृद्धि होती है।
• 3. प्याजः- आधा चम्मच सफेद
प्याज का रस, आधा चम्मच शहद तथा
आधा चम्मच मिश्री के चूर्ण को
मिलाकर सुबह और शाम सेवन करें। यह
मिश्रण वीर्यपतन को दूर करने के लिए
काफी उपयोगी रहता है।
• 4. चोबचीनीः- 100 ग्राम
तालमखाने के बीज, 100 ग्राम
चोबचीनी, 100 ग्राम ढाक का गोंद,
100 ग्राम मोचरस तथा 250 ग्राम
मिश्री को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें।
रोजाना सुबह के समय एक चम्मच चूर्ण
में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं। यह
मिश्रण यौन रुपी कमजोरी, नामर्दी
तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे
रोग को खत्म कर देता है।
• 5. कौंच का बीजः- 100 ग्राम
कौंच के बीज और 100 ग्राम
तालमखाना को कूट-पीसकर चूर्ण
बना लें। फिर इसमें 200 ग्राम मिश्री
पीसकर मिला लें। हल्के गर्म दूध में
आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर रोजाना
इसको पीना चाहिए। इसको पीने से
वीर्य गाढ़ा हो जाता है तथा
नामर्दी दूर होती है।
• 6. इमलीः- आधा किलो इमली के
बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन
बीजों को तीन दिनों तक पानी में
भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों
को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद
बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर
इसमें आधा किलो पिसी मिश्री
मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक
चौड़ी शीशी में रख लें। आधा चम्मच
सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें।
इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी
गिरने के रोग तथा संभोग करने की
ताकत में बढ़ोतरी करता है।
• 7. बरगदः- सूर्यास्त से पहले बरगद के
पेड़ से उसके पत्ते तोड़कर उसमें से
निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें बताशे
पर रखकर खाएं। इसके प्रयोग से
आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स
शक्ति भी अधिक हो जाएगी।
• 8. सोंठः- 4 ग्राम सोंठ, 4 ग्राम
सेमल का गोंद, 2 ग्राम अकरकरा, 28
ग्राम पिप्पली तथा 30 ग्राम काले
तिल को एकसाथ मिलाकर तथा
कूटकर बारीक चूर्ण बना लें। रात को
सोते समय आधा चम्मच चूर्ण लेकर ऊपर
से एक गिलास गर्म दूध पी लें। यह
रामबाण औषधि शरीर की कमजोरी
को दूर करती है तथा सेक्स शक्ति को
बढ़ाती है।
• 9. अश्वगंधाः- अश्वगंधा का चूर्ण,
असगंध तथा बिदारीकंद को
100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर
बारीक चूर्ण बना लें। इसमें से आधा
चम्मच चूर्ण दूध के साथ सुबह और शाम
लेना चाहिए। यह मिश्रण वीर्य को
ताकतवर बनाकर शीघ्रपतन की
समस्या से छुटकारा दिलाता है।
• 10. त्रिफलाः- एक चम्मच त्रिफला
के चूर्ण को रात को सोते समय 5
मुनक्कों के साथ लेना चाहिए तथा
ऊपर से ठंडा पानी पिएं। यह चूर्ण पेट
के सभी प्रकार के रोग, स्वप्नदोष
तथा वीर्य का शीघ्र गिरना आदि
रोगों को दूर करके शरीर को मजबूती
प्रदान करता है।
11. छुहारेः- चार-पांच छुहारे, दो-
तीन काजू तथा दो बादाम को 300
ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर
तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री
मिलाकर रोजाना रात को सोते
समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा
और काम करने की शक्ति बढ़ती है।
• 12. उंटगन के बीजः- 6 ग्राम उंटगन के
बीज, 6 ग्राम तालमखाना तथा 6
ग्राम गोखरू को समान मात्रा में लेकर
आधा लीटर दूध में मिलाकर पकाएं।
यह मिश्रण लगभग आधा रह जाने पर
इसे उतारकर ठंडा हो जाने दें। इसे
रोजाना 21 दिनों तक समय अनुसार
लेते रहें। इससे नपुंसकता (नामर्दी) रोग
दूर हो जाता है।
• 13. तुलसीः- आधा ग्राम तुलसी के
बीज तथा 5 ग्राम पुराने गुड़ को
बंगाली पान पर रखकर अच्छी तरह से
चबा-चबाकर खाएं। इस मिश्रण को
विस्तारपूर्वक 40 दिनों तक लेने से
वीर्य बलवान बनता है, संभोग करने
की इच्छा तेज हो जाती है और
नपुंसकता जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं।
• 14. गोखरूः- सूखा आंवला, गोखरू,
कौंच के बीज, सफेद मूसली और गुडुची
सत्व- इन पांचो पदार्थों को समान
मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच
देशी घी और एक चम्मच मिश्री में एक
चम्मच चूर्ण मिलाकर रात को सोते
समय इस मिश्रण को लें। इसके बाद एक
गिलास गर्म दूध पी लें। इस चूर्ण से
सेक्स कार्य में अत्यंत शक्ति आती है।
• 15. सफेद मूसलीः- सालम मिश्री,
तालमखाना, सफेद मूसली, कौंच के
बीज, गोखरू तथा ईसबगोल- इन
सबको समान मात्रा में मिलाकर
बारीक चूर्ण बना लें। इस एक चम्मच
चूर्ण में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम
दूध के साथ पीना चाहिए। यह वीर्य
को ताकतवर बनाता है तथा को ताकतवर बनाता है तथा सेक्स
शक्ति में अधिकता लाता है।
• 16. हल्दीः- वीर्य अधिक पतला
होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच
हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह
के समय खाली पेट सेवन करना
चाहिए। इसका विस्तृत रुप से
इस्तेमाल करने से संभोग करने की
शक्ति बढ़ जाती है।
• 17. उड़द की दालः- आधा चम्मच
उड़द की दाल और कौंच की दो-तीन
कोमल कली को बारीक पीसकर सुबह
तथा शाम को लेना चाहिए। यह
उपाय काफी फायदेमंद है। इस नुस्खे
को रोजाना लेने से सेक्स करने की
ताकत बढ़ जाती है।
• 18. जायफलः- जायफल 10 ग्राम,
लौंग 10 ग्राम, चंद्रोदय 10 ग्राम,
कपूर 10 ग्राम और कस्तूरी 6 ग्राम को
कूट-पीसकर इस मिश्रण के चूर्ण की 60
खुराक बना लें। इसमें से एक खुराक को
पान के पत्ते पर रखकर धीरे-धीरे से
चबाते रहें। जब मुंह में खूब रस जमा हो
जाए तो इस रस को थूके नहीं बल्कि
पी जाएं। इसके बाद थोड़ी सी मलाई
का इस्तेमाल करें। यह चूर्ण रोजाना
लेने से नपुंसकता जैसे रोग दूर होते हैं
तथा सेक्स शक्ति में वृद्धि होती है।
• 19. शंखपुष्पीः- शंखपुष्पी 100
ग्राम, ब्राह्नी 100 ग्राम, असंगध 50
ग्राम, तज 50 ग्राम, मुलहठी 50 ग्राम,
शतावर 50 ग्राम, विधारा 50 ग्राम
तथा शक्कर 450 ग्राम को बारीक
कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर एक-एक चम्मच
की मात्रा में सुबह और शाम को लेना
चाहिए। इस चूर्ण को तीन महीनों
तक रोजाना सेवन करने से नाईट-फाल
(स्वप्न दोष), वीर्य की कमजोरी
तथा नामर्दी आदि रोग समाप्त
होकर सेक्स शक्ति में ताकत आती है।
• 20. गाजरः- 1 किलो गाजर, चीनी
400 ग्राम, खोआ 250 ग्राम, दूध 500
ग्राम, कद्यूकस किया हुआ नारियल
10 ग्राम, किशमिश 10 ग्राम, काजू
बारीक कटे हुए 10-15 पीस, एक
चांदी का वर्क और 4 चम्मच देशी घी
ले लें। गाजर को कद्यूकस करके कडा़ही
में डालकर पकाएं। पानी के सूख जाने
पर इसमें दूध, खोआ और चीनी डाल दें
तथा इसे चम्मच से चलाते रहें। जब यह
सारा मिश्रण गाढ़ा होने को हो
तो इसमें नारियल, किशमिश, बादाम
और काजू डाल दें। जब यह पदार्थ
गाढ़ा हो जाए तो थाली में देशी घी
लगाकर हलवे को थाली पर निकालें
और ऊपर से चांदी का वर्क लगा दें।
इस हलवे को चार-चार चम्मच सुबह और
शाम खाकर ऊपर से दूध पीना
चाहिए। यह वीर्यशक्ति बढ़ाकार
शरीर को मजबूत रखता है। इससे सेक्स
शक्ति भी बढ़ती है।
21. ढाकः- ढाक के 100 ग्राम गोंद
को तवे पर भून लें। फिर 100 ग्राम
तालमखानों को घी के साथ भूनें।
उसके बाद दोनों को बारीक काटकर
आधा चम्मच सुबह और शाम को दूध के
साथ खाना खाने के दो-तीन घंटे पहले
ही इसका सेवन करें। इसके कुछ ही
दिनों के बाद वीर्य का पतलापन दूर
होता है तथा सेक्स क्षमता में बहुत
अधिक रुप से वृद्धि होती है।
• 22. जायफलः- 15 ग्राम जायफल,
20 ग्राम हिंगुल भस्म, 5 ग्राम
अकरकरा और 10 ग्राम केसर को
मिलाकर बारीक पीस लें। इसके बाद
इसमें शहद मिलाकर इमामदस्ते में घोटें।
उसके बाद चने के बराबर छोटी-छोटी
गोलियां बना लें। रोजाना रात को
सोने से 2 पहले 2 गोलियां गाढ़े दूध के
साथ सेवन करें। इससे शिश्न (लिंग)
का ढ़ीलापन दूर होता है तथा
नामर्दी दूर हो जाती है।
• 23. इलायचीः- इलायची के दानों
का चूर्ण 2 ग्राम, जावित्री का चूर्ण
1 ग्राम, बादाम के 5 पीस और
मिश्री 10 ग्राम ले लें। बादाम को
रात के समय पानी में भिगोकर रख दें।
सुबह के वक्त उसे पीसकर पेस्ट की तरह
बना लें। फिर उसमें अन्य पदार्थ
मिलाकर तथा दो चम्मच मक्खन
मिलाकर विस्तार रुप से रोजाना
सुबह के वक्त इसको सेवन करें। यह वीर्य
को बढ़ाता है तथा शरीर में ताकत
लाकर सेक्स शक्ति को बढ़ाता है।
• 24. सेबः- एक अच्छा सा बड़े आकार
का सेब ले लीजिए। इसमें हो सके
जितनी ज्यादा से ज्यादा लौंग
चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। इसी
तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का
नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी
ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग
चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। दोनों
फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन
में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद
दोनों फलों में से लौंग निकालकर
अलग-अलग शीशी में भरकर रख लें। पहले
दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक
कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें।
इस तरह से बदल-बदलकर 40 दिनों तक
2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स
क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही
सरल उपाय है।
• 25. अजवायनः- 100 ग्राम
अजवायन को सफेद प्याज के रस में
भिगोकर सुखा लें। सूखने के बाद उसे
फिर से प्याज के रस में गीला करके
सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें।
उसके बाद इसे कूटकर किसी शीशी में
भरकर रख लें। आधा चम्मच इस चूर्ण को
एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ
मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से
हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक
महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें।
इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं
करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को
बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है।

रविवार, 1 अप्रैल 2018

(सर्जरी) के पितामह और सुश्रुतसंहिता के प्रणेता आचार्य सुश्रुत का जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व काशी में हुआ था

शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के पितामह और सुश्रुतसंहिता के प्रणेता आचार्य सुश्रुत का जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व काशी में हुआ था। सुश्रुत का जन्म विश्वामित्र के वंश में हुआ था। इन्होंने धन्वन्तरि से शिक्षा प्राप्त की थी।
सुश्रुतसंहिता को भारतीय चिकित्सा पद्धति में विशेष स्थान प्राप्त है। इसमें शल्य चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया गया है। शल्य क्रिया के लिए सुश्रुत 125 तरह के उपकरणों का प्रयोग करते थे। ये उपकरण शल्य क्रिया की जटिलता को देखते हुए खोजे गए थे। इन उपकरणों में विशेष प्रकार के चाकू, सुइयां, चिमटियां आदि हैं। सुश्रुत ने 300 प्रकार की ऑपरेशन प्रक्रियाओं की खोज की। आठवीं शताब्दी में सुश्रुतसंहिता का अरबी अनुवाद किताब-इ-सुश्रुत के रूप में हुआ। सुश्रुत ने कॉस्मेटिक सर्जरी में विशेष निपुणता हासिल कर ली थी।
एक बार आधी रात के समय सुश्रुत को दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी। उन्होंने दीपक हाथ में लिया और दरवाजा खोला। दरवाजा खोलते ही उनकी नजर एक व्यक्ति पर पड़ी। उस व्यक्ति की आंखों से अश्रु-धारा बह रही थी और नाक कटी हुई थी। उसकी नाक से तीव्र रक्त-स्राव हो रहा था। व्यक्ति ने आचार्य सुश्रुत से सहायता के लिए विनती की। सुश्रुत ने उसे अन्दर आने के लिए कहा। उन्होंने उसे शांत रहने को कहा और दिलासा दिया कि सब ठीक हो जायेगा। वे अजनबी व्यक्ति को एक साफ और स्वच्छ कमरे में ले गए। कमरे की दीवार पर शल्य क्रिया के लिए आवश्यक उपकरण टंगे थे। उन्होंने अजनबी के चेहरे को औषधीय रस से धोया और उसे एक आसन पर बैठाया। उसको एक गिलास में शोमरस भरकर सेवन करने को कहा और स्वयं शल्य क्रिया की तैयारी में लग गए। उन्होंने एक पत्ते द्वारा जख्मी व्यक्ति की नाक का नाप लिया और दीवार से एक चाकू व चिमटी उतारी। चाकू और चिमटी की मदद से व्यक्ति के गाल से एक मांस का टुकड़ा काटकर उसे उसकी नाक पर प्रत्यारोपित कर दिया। इस क्रिया में व्यक्ति को हुए दर्द का शौमरस ने महसूस नहीं होने दिया। इसके बाद उन्होंने नाक पर टांके लगाकर औषधियों का लेप कर दिया। व्यक्ति को नियमित रूप से औषाधियां लेने का निर्देश देकर सुश्रुत ने उसे घर जाने के लिए कहा।
सुश्रुत नेत्र शल्य चिकित्सा भी करते थे। सुश्रुतसंहिता में मोतियाबिंद के ऑपरेशन करने की विधि को विस्तार से बताया है। उन्हें शल्य क्रिया द्वारा प्रसव कराने का भी ज्ञान था। सुश्रुत को टूटी हुई हड्डी का पता लगाने और उनको जोड़ने में विशेषज्ञता प्राप्त थी। शल्य क्रिया के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए वे मद्यपान या विशेष औषधियां देते थे। सुश्रुत श्रेष्ठ शल्य चिकित्सक होने के साथ-साथ श्रेष्ठ शिक्षक भी थे।
उन्होंने अपने शिष्यों को शल्य चिकित्सा के सिद्धांत बताये और शल्य क्रिया का अभ्यास कराया। प्रारंभिक अवस्था में शल्य क्रिया के अभ्यास के लिए फलों, सब्जियों और मोम के पुतलों का उपयोग करते थे। मानव शरीर की अंदरूनी रचना को समझाने के लिए सुश्रुत शव के ऊपर शल्य क्रिया करके अपने शिष्यों को समझाते थे। सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा में अद्भुत कौशल अर्जित किया तथा इसका ज्ञान अन्य लोगों को कराया। उन्होंने शल्य चिकित्सा के साथ-साथ आयुर्वेद के अन्य पक्षों जैसे शरीर संरचना, काया-चिकित्सा, बाल रोग, स्त्री रोग, मनोरोग आदि की जानकारी भी दी। कई लोग प्लास्टिक सर्जरी को अपेक्षाकृत एक नई विधा के रूप में मानते हैं। प्लास्टिक सर्जरी की उत्पत्ति की जड़ें भारत की सिंधु नदी सभ्यता से 4000 से अधिक साल से जुड़ी हैं। इस सभ्यता से जुड़े श्लोकों को 3000 और 1000 ई.पू. के बीच संस्कृत भाषा में वेदों के रूप में संकलित किया गया है, जो हिन्दू धर्म की सबसे पुरानी पवित्र पुस्तकों में में से हैं। इस युग को भारतीय इतिहास में वैदिक काल के रूप में जाना जाता है, जिस अवधि के दौरान चारों वेदों अर्थात् ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद को संकलित किया गया। चारों वेद श्लोक, छंद, मंत्र के रूप में संस्कृत भाषा में संकलित किए गए हैं और सुश्रुत संहिता को अथर्ववेद का एक हिस्सा माना जाता है।
सुश्रुत संहिता, जो भारतीय चिकित्सा में सर्जरी की प्राचीन परंपरा का वर्णन करता है, उसे भारतीय चिकित्सा साहित्य के सबसे शानदार रत्नों में से एक के रूप में माना जाता है। इस ग्रंथ में महान प्राचीन सर्जन सुश्रुत की शिक्षाओं और अभ्यास का विस्तृत विवरण है, जो आज भी महत्वपूर्ण व प्रासंगिक शल्य चिकित्सा ज्ञान है। प्लास्टिक सर्जरी का मतलब है- शरीर के किसी हिस्से की रचना ठीक करना। प्लास्टिक सर्जरी में प्लास्टिक का उपयोग नहीं होता है। सर्जरी के पहले जुड़ा प्लास्टिक ग्रीक शब्द प्लास्टिको से आया है। ग्रीक में प्लास्टिको का अर्थ होता है बनाना, रोपना या तैयार करना। प्लास्टिक सर्जरी में सर्जन शरीर के किसी हिस्से के उत्तकों को लेकर दूसरे हिस्से में जोड़ता है। भारत में सुश्रुत को पहला सर्जन माना जाता है। आज से करीब 2500 साल पहले युद्ध या प्राकृतिक विपदाओं में जिनकी नाक खराब हो जाती थी, आचार्य सुश्रुत उन्हें ठीक करने का काम करते थे।

सोमवार, 26 मार्च 2018

शीशम को आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग

शीशम को आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग किया जाता है। शीशम के पत्तों से निकलने वाले चिपचिपे पदार्थ को कई रोगों के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। इसके तेल को दर्दनाशक, अवसादरोधी, सड़न रोकने वाले, जीवाणु रोधक, कीटनाशक और स्फूर्तिदायक आदि के तौर पर प्रयोग किया जाता है।इस का प्रयोग गर्मी के मौसम में अधिक लाभदायक होता है क्योंकि यह पित शामक है तथा शरीर में ठंडक महसूस करती हैं! कृपया इसे जनहित में शेयर करें व पुन्‍य के भागी बने आपका अपना डॉ जितेंद्र गिल सदस्य भारतीय चिकित्सा परिषद्.

मूत्रकृच्छ : मूत्रकृच्छ (पेशाब करते समय परेशानी) की ज्यादा पीड़ा में शीशम के पत्तों का 50-100 मिलीलीटर काढ़ा दिन में 3 बार रोगी को पिलाने से लाभ मिलता है।

लालामेह और पूयमेह : लालामेह और पूयमेह में 10-15 मिलीलीटर शीशम के पत्तों का रस दिन में 3 बार रोगी को देने से लाभ होता है।

हैजा या विसूचिका : सुगंधित और चटपटी औषधियों के साथ शीशम की गोलियां बनाकर विसूचिका (हैजा) में देने से आराम मिलता है।

आँखों का दर्द : शीशम के पत्तों का रस और शहद मिलाकर इसकी बूंदें आंखों में डालने से दु:खती आंखें ठीक होती है।

वक्ष सूजन : शीशम के पत्तों को गर्म करके स्तनों पर बांधने से और इसके काढ़े से वक्षो को धोने से सूजन दुुर हो जााती है।

पेट की जलन और पीलिया : उदर (पेट) की जलन में 10-15 मिलीलीटर शीशम के पत्तों का रस रोगी को देने से लाभ होता है। पीलिया के रोग में भी शीशम के पत्तों का रस 10-15 मिलीलीटर सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।

हर तरह का बुखार : हर तरह के बुखार में 20 मिलीलीटर शीशम का सार, 320 मिलीलीटर पानी, 160 मिलीलीटर दूध को मिलाकर गर्म करने के लिए रख दें। दूध शेष रहने पर दिन में 3 बार रोगी को पिलाने से लाभ होता है।

गृघसी या जोड़ों का दर्द : शीशम की 10 किलोग्राम छाल का मोटा चूरा बनाकर साढ़े 23 लीटर पानी में उबालें, पानी का 8वां भाग जब शेष रह जाए तब इसे ठंडा होने पर कपड़े में छानकर फिर इसको चूल्हे पर चढ़ाकर गाढ़ा करें। इस गाढ़े पदार्थ को 10 मिलीलीटर की मात्रा में घी युक्त दूध पकाने के साथ 21 दिन तक दिन में 3 बार लेने से गृधसी रोग (जोड़ों का दर्द) खत्म हो जाता है।

रक्त विकार : शीशम के 1 किलोग्राम बुरादे को 3 लीटर पानी में भिगोकर रख लें, फिर उबाल लें, जब पानी आधा रह जाए तब इसे छान लें, इसमें 750 ग्राम बूरा (पिसी हुई मिश्री या शक्कर) मिलाकर शर्बत बना लें, यह शर्बत खून को साफ करता है। शीशम के 3 से 6 ग्राम बुरादे का शर्बत बनाकर रोगी को पिलाने से खून की खराबी दूर होती है।

कष्टार्त्तव या मासिक धर्म का कष्ट का आना : 3 से 6 ग्राम शीशम का चूर्ण या 50 से 100 मिलीलीटर काढ़ा कष्टार्त्तव रोग में दिन में 2 बार सेवन करने से लाभ होता है।

कफ : 10 से 15 बूंद शीशम का तेल सुबह-शाम गर्म दूध में मिलाकर सेवन करने से बलगम समाप्त हो जाता है।

आंवरक्त या पेचिश : 6 ग्राम शीशम के हरे पत्ते और 6 ग्राम पोदीना के पत्तों को पानी में ठंडाई की तरह घोंटकर पीने से पेचिश के रोग में लाभ होता है।

घाव में : शीशम के पत्तों से बने तेल को घाव पर लगाने से घाव जल्दी ठीक होता है। यहां तक की कुष्ठ (कोढ़) के घाव में भी इसका उपयोग लाभकारी होता है।

माता-बहनो में प्रदर रोग : 40-40 ग्राम शीशम के पत्ते और फूल, 40 ग्राम इलायची, 20 ग्राम मिश्री और 16 कालीमिर्च को एक साथ पीसकर पीने से प्रदर रोग में लाभ मिलता है।

पौरुष शक्ति में : रात में एक मिट्टी के बर्तन में पानी रखें शीशम के हरे और कोमल पत्तों को रखकर ढक दें। सुबह इन्हें निचोड़कर छान लें और ताल मिश्री मिलाकर खाने से लाभ होता है।

कुष्ठ (कोढ़) : कुष्ठ रोग में शीशम के तेल को लगाने से या शीशम के पत्तों से बने तेल को लगाने से कुष्ठ (कोढ़) रोग में आराम आता है।

नाड़ी का दर्द : शीशम की जड़ व पत्तें और बराबर मात्रा में सैंधा नमक लेकर कांजी में इसका लेप बनाकर लगाने से नाड़ी रोग जल्द ठीक होता है।

हृदय रोग में फायदेमंद : यदि आपका कोलेस्ट्राल बढ़ गया है और आप हृदय रोग से ग्रस्त हैं तो शीशम के तेल का सेवन आपके लिए रामबाण साबित हो सकता है। शीशम के तेल का सेवन रक्त प्रवाह को बेहतर रखता है। इस तेल से बना खाना खाने से पाचन शक्ति भी मजबूत होती है।

अवसाद से दूर रखने में सहायक : शीशम के तेल का सेवन करने से अवसाद ग्रस्त रोगियों को कुछ ही देर में आराम मिल जाता है। इसका सेवन आपको उदासी और निराशा से दूर रखता है। साथ ही जिंदगी में सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने में मदद करता है। खाने में इसका प्रयोग उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है जो हाल-फिलहाल ही अपने किसी लक्ष्य को नहीं पा सके।

चोट का घाव : यदि आपके शरीर के किसी हिस्से में चोट का घाव है तो इसे भरने में शीशम का तेल सहायक है। घाव वाली जगह पर आप शीशम के तेल में हल्दी मिलाकर बांध लें। इससे घाव जल्द भर जाएगा। इसके अलावा फटी हुई एडियों (बिवाई) पर शीशम का तेल लगाने से एडियों की रंगत लौट आती है।

सोमवार, 19 मार्च 2018

मेरा कुछ शुरुआती चिकित्सकीय अनुभव

मेरा कुछ शुरुआती चिकित्सकीय अनुभव 

अब मैं एक चिकित्सक के रूप में अपना अनुभव मैं आप के बीच बांटता हूं…
1-दिनांक 16-10-2001. रोगी-श्रीमती क देवी, पति-ख मंडल. पता-बंगाली टोला, कल्याणपुर. जिला-मुंगेर (बिहार). 
क देवी की मां ग देवी अपनी बेटी के साथ मेरे पास आकर कहने लगीं. डॉ साहब, मेरी बेटी की शादी के 12 वर्ष बीत गये हैं, लेकिन अभी तक मां नहीं बन पायी. काफी इलाज कराया, झाड़-फूंक, जादू-टोना भी कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ… अब आप दवा दें कि मेरी बेटी मां बन जाये. मैंने जांच की तो देखा, क देवी के बाल उलझ कर चिपके हुए थे, मासिक स्राव में प्रसव पीड़ा की तरह दर्द, बांझपन एवं बराबर सर्दी का रहना. मैंने लक्षण के अनुसार बोरेक्स-30 सुबह-शाम एवं बायो कांबिनेशन-5, 4×4 दिया. इसी प्रकार दो माह तक समय के अनुसार बोरेक्स-30, सेकलेक एवं बी.सी-5 देता रहा. 20/12/2001 को सर्दी एवं मासिक स्राव में शत-प्रतिशत आराम मिल गया. 20/12/2001 को यौन संबंध के आधा घंटा पहले एवं आधा घंटा बाद बोरेक्स-6x दिया. सत्यव्रत सिद्धांलंकार मां तथा बच्चा पृष्ठ संख्या-6, 28-01-2002 को क देवी की मां ग देवी ने मुस्कुराते हुए आयीं और बोली- डॉक्टर साहब, 10 दिन बीत गये, मेरी बेटी मासिक धर्म नहीं आया है. सेकलेक तीन बार मैंने लेने के लिए दिया. 26-03-2002 को उल्टी-मितली की शिकायत पर इपिकाक-30 एवं बी.सी.-26 4×4 समय के अनुसार चलाता रहा. क देवी को 10-10-2003 को नार्मल ढंग से बेटा हुआ.
2- श्री क राम, उम्र 60 साल, ग्राम-रूतपय, पत्रालय- शंभूगंज, जिला भागलपुर (बिहार). सुल्तानगंज से 15 किलोमीटर दक्षिण. ससुराल मेरे गांव कल्याणपुर में है.
-दिनांक 12-06-2002 को अपने दोनों पैर मे सफेद दाग दिखाते हुए बताया कि पहले दोनों पैर में सफेद दाग के स्थान लसलसा स्राव बहने वाला एक्जिमा थआ, जो छूटने का नाम नहीं लेता था, बहुत दिनों तक एलोपैथ की सूई दवा एवं मलहम लगाने के बाद एक्जिमा ठीक हो गया, लेकिन तीन वर्ष पहले उसी स्थान पर सफेद दाग हो गया, जो धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. हाथ-पैर का नाखून अपने आप टूट रहा है.
मैंने इन लक्षणों के आधार पर एवं डॉ विनय कुमार राय (सफेद दाग) पृष्ठ संख्या -23 के आधार पर ग्रेफाइटिस 200 का एक एक डोज के साथ सेकलेक दिया. 24-06-2002 को रोगी जगत राम घबराते हुए निराशा भाव से दोनों पैर दिखाते हुए बोला-पहले वाला एक्जिमा हो गया. सफेद दाग के स्थान से लसलसा शहद के समान स्राव निकल रहा था. मैंने उसे समझाया कि यह होमियोपैथ का शुभ लक्षण है. आप का सफेद दाग ठीक हो जायेगा. सेकलेक देकर 15 दिन बाद बुलाया. 10-07-2002 को जब वह मेरे पास आया तो  सफेद दाग एवं एक्जिमा में 30 प्रतिशत का आराम हो गया. ग्रेफाइटिस -200 का एक डोज के साथ सेकलेक. तीन माह तक सेकलेक देता रहा. सफेद दाग धीरे-धीरे गायब हो गया. ग्रेफाइटिस -200 की केवल दो मात्रा से सफेद दाग पूरी तरह ठीक हो गया.
3- रोगी का नाम- क कुमारी. पिता- ख सिंह. उम्र-18 साल. ग्राम-घोसैठ, पोस्ट आफिस-अभयपुर, जिला-मुंगेर (बिहार).
दिनांक- 16-04-2004 को दोनों हाथ-पैर में सफेद दाग दिखाते हुए बोली- वर्षों पहले हाथ-पैर में एक्जिमा हुआ था, एलोपैथ सूई-दवा, मलहम उपयोग करने से एक्जिमा ठीक हो गया, लेकिन चार साल से सफेद दाग हो गया है. ये धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. भागलपुर एवं पटना में एलोपैथ इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला. इतना बताते-बताते क कुमारी अनेक बार अपने मुंह पर हाथ फेरती रही. मैंने पूछा –मुंह पर हाथ क्यों फेरती हो.
क ने बताया- मुझे चेहरे पर मकड़ी का जाला जैसा अनुभव होता है.
डॉ. सत्यव्रत होमियोपैथी औषधियों का सजीव चित्रण पृष्ठ संख्या-321 इस लक्षण पर ग्रेफाइटिस-200 का एक डोज साथ में सेकलेक. 26-04-2004 को कुछ लाभ नहीं. क के साथ क के पिता भी आये थे, जो खांसते रहते थे. मैंने पिता से पूछा आप को दमा है क्या. तब उन्होंने बताया कि मुझे पहले क्षय रोग था. इसी आधार पर मैंने क को बैसीलिनम-1M का एक डोज एवं दूसरे दिन ग्रेफाइटिस-200 का एक डोज.
20-05-2004 को सफेद दाग के स्थान पर एक्जिमा उभर आया. एक्जिमा से लसलसा पानी चल रहा था. सेकलेक एक डोज. 30-05-2004 को सफेद दाग एवं एक्जिमा में आराम. बेसीलिनम-1M एक डोज. 16-06-2004 को काफी राहत. सेकलेक 26-06-2004 को 75 प्रतिशत सफेद दाग से राहत. बेसीलिनम-1M. दूसरे दिन ग्रेफाइटिस-1M. 10-07-2004 को 10 प्रतिशत राहत, सेकलेक 30-07-2004. सफेद दाग से पूरी तरह आराम. परंतु अभी 15 दिन ही बीते थे कि क देवी को फिर दिक्कत शुरू हुई. इसके बाद तीन महीने तक सेकलेक का डोज दिया. तब जाकर क देवी को सफेद दाग से पूरी तरह राहत मिली.
4- रोगी का नाम-क देवी. उम्र-22 वर्ष. पति-ख सिंह. तिलकामांझी, जिला-भागलपुर. माता-पिता का घर-कल्याणपुर (मुंगेर).
दिनांक-10-05-2004 को क देवी अपने पिता के साथ आकर बोलीं- मेरी गर्दन एवं गाल पर सफेद दाग हो गया है. मुझे नीचे की गति से काफी भय लगता है. श्वेत प्रदर गर्म पानी की धार की तरह बहता है. इसके सफेद दाग में लाल धब्बा देख कर मुझे डॉ दरबारी की लेखनी याद आयी. बोरेक्स-30 सुबह-शाम दे दिया. 25-05-2004 सफेद दाग मलिन. 13-06-2004 को सफेद दाग 50 फीसदी गायब, सेकलेक. 27-06-2004 को सफेद दाग से पूर्ण लाभ. फिर भी मैंने कुछ माह लगातार क देवी को सेकलेक देता रहा. अब जाकर क देवी पूरी तरह से ठीक हैं.
5- रोगी का नाम-क कुमार (कारीगर वेल्डिंग शॉप), स्थान- जमालपुर रेल कारखाना, मुंगेर.
मैं जमालपुर रेल कारखाना में 20 वर्षों से बीमार, रेल इंजन एवं 140 टन क्रेन का इलाज तकनीशियन के रूप में करते-करते अब रेल कर्मी एवं अधिकारियों का होमियोपैथ से इलाज करने वाला चिकित्सक बन चुका था. दिनांक 02-02-2002 को क कुमार दायें-बायें गले पर एवं होंठ पर सफेद दाग की शिकायत लेकर मुझसे मिले और बोले- पांच साल से एलोपैथ, होमियोपैथ एवं आयुर्वेद का इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला.
मैंने तमाम बातें पूछीं, लेकिन कुछ भी लक्षण स्पष्ट नहीं हुआ, केवल पिता को खुजली एवं एक्जिमा के इतिहास के. मैंने सोरिनम-1M 15 दिन पर एवं एचसी-85, दो गोली चार बार शुरू कर दिया. 10-04-2002 को सफेद दाग में कुछ अंतर आने लगा. इसी दवा को लगभग आठ माह तक चलाता रहा. 17-10-2002 को सफेद दाग पूर्ण रूप से ठीक हो गया. रोगी मेरे साथ ही कार्यरत हैं. अभी वो पूरी तरह ठीक हैं.
6- रोगी का नाम-क देवी, ग्राम-भदौड़ा, पोस्टआफिस-लोहची, जिला-मुंगेर. कल्याणपुर से पांच किमी दक्षिण.
दिनांक 06-01-2001 को आठ वर्षों से एक पैर में फील पांव था. कुछ दिन आयुर्वेद इलाज कराया, फायदा नहीं मिलने पर मेरे पास आयीं. मैंने डॉ सत्यव्रत साहब की रोग तथा होमियोपैथी चिकित्सा पृष्ठ संख्या 270 के अनुसार हाइड्रोकोटाइल-1M एवं डॉ राजेश दीक्षित के कंप्लीट बायोकैमी पृष्ठ संख्या 207 के अनुसार कैलि सल्फ-3X, नेट्रम सल्फ 3X तथा साइलिशिया 12X का मिश्रण एक वर्ष तक देता रहा. मरीज पूरी तरह ठीक हो गयी.
7- रोगी का नाम- क कुमारी. उम्र-30 साल. पति ख कुमार. स्थान-रेलवे अस्पताल-जमालपुर में नर्स के पद पर कार्यरत.
इनकी शिकायत थी कि जुकाम के साथ लगातार छींक आना. छींकते-छींकते आंखों में पानी भर आना. छींक-जुकाम के साथ बेहद सिर दर्द.
दिनांक 04-10-2002 को सेवाडिल्ला-30 एवं बी.सी.-5 दवा देते रहने के बाद वर्षों का रोग एक माह में ही ठीक हो गया.
8- रोगी का नाम-श्री क चटर्जी, वरीय अभियंता-स्टील फाउंड्री, रेलवे वर्कशॉप जमालपुर कारखाना.
चटर्जी साहब ने 22-06-2004 को मुझसे बताया कि मेरे दायें पैर की जांघ से घुटने तक दर्द रहता है. आराम करने पर दर्द बढ़ जाता है. सूई चुभने सा दर्द रहता है. कभी कभी दर्द इतना अधिक होता है कि जैसे चाकू से मेरे पैर को कोई काट रहा है. एलोपैथ दवा से कुछ आराम मिलता है, लेकिन पेट में जलन होने लगती है. मैंने लक्षण जानकर कैलि कार्ब-30 की एक पुड़िया खिला कर मैग फॉस -6X, 4X4 का निर्देश देते हुए एक सप्ताह के बाद बुलाया. चटर्जी साहब तीन दिन बाद मिले और बोले- आप तो जादू की पुड़िया दिये, मेरा दर्द पहली ही खुराक से गायब हो गया.

9- रोगी का नाम- क राय, अनुभाग अभियंता-वेल्डिंग शॉप, रेलवे वर्कशॉप, जमालपुर कारखाना, जिला –मुंगेर.
दिनांक 02-02-03. राय जी ने मुझसे शिकायत की कि गड़गड़ाहट के साथ बार-बार पैखाना होता है. इसका इलाज मैं रेलवे अस्पताल जमालपुर में कराया. भागलपुर के मशहूर फिजीशियन डॉ हेमशंकर शर्मा और पटना के मशहूर फिजीशियन डॉ बीके अग्रवाल को भी दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. दवा बंद करता हूं, तो मर्ज शुरू हो जाता है. मैंने होमियोपैथ इलाज शुरू करने से पहले उनसे पूछताछ शुरू की, तो पता चला कि उनका पैखाना अत्यंत बदबूदार, सुबह से दोपहर तक रोग में वृद्धि, पैखाना होने के बाद पांव में ऐठन, कभी कब्ज, कभी दस्त बना रहता है. सारा का सारा लक्षण पोडोफाइलम दवा से मिलता लगा. मैंने राय जी को पोडोफाइलम-30 दिन में तीन बार लेने का निर्देश दिया. लगभग एक सप्ताह में उनका सारा कष्ट दूर हो गया. मैं उन्हें तीन माह तक सेकलैक देता रहा. अभियंता साहब का पुराना मर्ज हमेशा के लिए गायब हो गया.
10- रोगी का नाम- श्री क कुमार, सेक्शन आफिसर, ब्वायलर शॉप, रेलवे कारखाना जमालपुर, मुंगेर.
दिनांक 16-04-03 को अपने शरीर में जहां-तहां ग्रंथियों में कड़ा पन दिखाते हुए बोले- महीनों से एलोपैथ इलाज करा रहा हूं, ठीक नहीं हो रहा है. मैंने उन्हें कार्बो एनीमल-200 का डोज एक सप्ताह के लिए दिया. तीन सप्ताह में उनका सारा कष्ट दूर हो गया.
11- रोगी का नाम- क गोस्वामी, उम्र-28 साल, स्थान- कुमारपुर (कल्याणपुर), जिला-मुंगेर.
दिनांक 07-07-2003 को अपने पिता के साथ ट्राली पर लदे कराहते हुए आये और बोले- मेरे कमर के पिछले भाग से पैर की एड़ी तक जोर का दर्द होता है, कभी सुन्न हो जाता है. मैं बहुत दिनों से एलोपैथ दवा खा कर इसे दबा देता रहा, लेकिन अब एलोपैथ दवा का कुछ भी असर नहीं रहता है. मैंने नेफेलियम दवा की 30 शक्ति की दवा तीन बार खाने का निर्देश देकर एक सप्ताह के बाद बुलाया. परंतु गोस्वामी जी अगली बार साइकिल चलाते हुए आये और बोले- आप की दवा ने तो जादू कर दिया. मुझे अब किसी तरह का दर्द नहीं है.