बुधवार, 4 सितंबर 2013

VICKS नाम की दवा का पूरा सच









  • सावधान !
    VICKS नाम की दवा का पूरा सच जरूर पढ़ें !

    भारत मे एक विदेशी कंपनी हैं Procter and Gamble ( P & G ) ! जो भारत मे VICKS VAPORUB नाम की एक दवा बेचती है ! क्या आप जानते हैं VICKS नाम की दावा अमेरिका में बनाना और बेचना दोनों जुर्म है, WHO (World Health Organisation) ने खुद इसे जहर घोषित किया है !

    आप Google पर भी "Vicks Vaporub Banned " लिख कर Search कर सकते हैं ! अमेरिका मे अगर किसी डॉक्टर ने किसी को VICKS VAPORUB की prescription लिख दे तो उस डॉक्टर को 14 साल की जेल हो जाती है, उसकी डिग्री छीन ली जाती है| क्यूंकि की Vicks Vaporub जहर है, ये आपको दमा, अस्थमा, ब्रोंकिअल अस्थमा कर सकता है | इसीलिए दुनिया भर में WHO और वैज्ञानिको ने इसे जहर घोषित किया | और ये जहर भारत में सबसे ज्यादा बिकता है विज्ञापनो की मदद से |

    लेकिन क्या आप जानते हैं ?? भारत मे एक कानून है ? उस कानून के अनुसार किसी भी दवा का विज्ञापन टीवी, अखबार, या किसी भी मैगजीन पे नही दिया जा सकता ! लेकिन इसके बावजूद भी पैसे के ताकत से, घूसख़ोरी से ये सब होता है ! और द्वाईयों के विज्ञापन लगातार टीवी, अखबारों आदि मे दिखाये जाते हैं !
    और ये vicks vaporub नाम की दवा कितनी महंगी आपको बेची जाती है ! 25 ग्राम 40 रूपये की है तो 50 ग्राम 80 रूपये की तो 100 ग्राम 160 रूपये की मतलब 1 किलो vicks की 1600 रूपये हुई ! 1600 रूपये किलो का जहर खरीद आप खुद लगा रहे हैं और अपने बच्चों को लगा रहे हैं ! जिससे आपको दमा, अस्थमा, ब्रोंकिअल अस्थमा TB हो सकता है !!

    सर्दी खांसी की आयुर्वेद मे बहुत अच्छी दवा है उसका नाम है - दालचीनी (ध्यान रहे ये दालचीनी आम घरो मे होने वाली आम दाल और चीनी नहीं है) ज्यादा न पता हो तो Google पर "दालचीनी" लिख photo देख लें !

    इस दालचीनी को पीस ले और एक चम्मच शहद के ऊपर कुछ चुटकी डाले और सीधा निगल जाएँ बहुत ही ज्यादा लाभकारी हैं ! अगर किसी को गले मे ज्यादा दर्द हो या tonsils की समस्या हो ! तो आप एक चुटकी शुद्ध हल्दी बिलकुल गले मे घंटी की पास रखे ! मात्र 3 दिन करने से आपको बहुत अधिक लाभ होगा !!

    इस VICKS नाम के जहर को घर से बाहर फेंके और RTI माध्यम से सरकार से सवाल करे की अगर ये अगर अमेरिका मे BAN है तो भारत मे क्यूँ बिक रही है !! एक भाई ने 28 जनवरी 2013 को RTI की website पर सवाल भी पूछा था लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया !!

    VICKS पेट्रोलियम जेल्ली से बनता है जिसकी कीमत 60-70 रुपिया किलो है और विक्स की बिक्री में Procter and Gamble कंपनी को 20000% से ज्यादा का मुनाफा है | ये मुनाफा आप की जेब से लूटा जा रहा है और सरकार इस घोटाले में शामिल है | सरकार ने लाइसेन्स दे रखी है, आँखे बंद कर रखी है और कंपनी देश को लूटा जा रहा है |

गुरुवार, 29 अगस्त 2013

सुकन्या देवी बलात्कार काण्ड

बलात्कारी राहुल गांधी ने किया बलात्कार, मामले को दबा रही है सरकार
मित्रो राहुल गांधी -सुकन्या देवी बलात्कार काण्ड के बारे में लगभग सबको पता चल चुका है . लेकिन अभिषेक मनू सिंघवी सेक्स कांड की तरह भारत की बिकाऊ मिडिया इस मामले पर भी खामोश है. अब हम सोशल मिडिया से इस खबर को सब के सामने लायेंगे. हर देशभक्त का फर्ज है वह इस को शेयर करे.

राहुल गांधी और उनके छह दोस्तों ने 3 दिसंबर 2006 की रात अमेठी के एक गेस्ट हाउस में 24 वर्षीय सुकन्या देवी के साथ बारी बारी से बलात्कार किया था. राहुल गांधी और सोनिया गांधी के इशारे पर सुकन्या सहित उसके माता पिता को "गायब" कर दिया गया है. लेकिन इस बीच एक नोटिस ने राज के ऐसे बहुत सारी पर्तों को उघाड़ देती है जो राहुल गांधी बलात्कार कांड को संदेह के घेरे में ला खड़ा करता है.इस संबंध में 1 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी को एक नोटिस जारी करते हुए उनसे पूछा था कि वे इस संबंध में अदालत को अपने पक्ष से अवगत कराएं. राहुल गांधी को अदालत ने दो सप्ताह का वक्त दिया था. लेकिन एक सप्ताह के भीतर ही अदालत में एक डबल बेंच बैठी और उसने न केवल उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें राहुल गांधी द्वारा सुकन्या तथा उसके परिजनों को बंधक बनाकर रख लेने का संदेह जताया गया था बल्कि याचिकाकर्ता किशोर समरीते पर पचास लाख का जुर्माना भी लगा दिया.

अब किशोर समरीते क्या कहते हैं?क्या है घटना?3 दिसंबर 2006 की रात नौ बजे अमेठी के गेस्ट हाउस में राहुल गांधी अपने छह विदेशी मित्रों के साथ रुके थे. कांग्रेस के प्रमुख कार्यकर्ता और सोनिया गांधी के भक्त बलराम सिंह उसी गेस्ट हाउस की देखभाल करते थे. ऐसा समझा जाता है कि राहुल गांधी के करीब पहुंचने के लिए बलराम सिंह ने अपनी 24 वर्षीय सुकन्या देवी को किसी बहाने से उनके पास भेजा. वहां सुकन्या देवी को पहले राहुल गांधी और उनके दोस्तों ने शराब पिलाई और बारी बारी से बलात्कार किया. बताते हैं कि सुकन्या देवी चीखती चिल्लाती रही लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी. बलराम सिंह को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप हो जाएगा. घटना के बाद बलराम सिंह ने स्थानीय पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन बलराम सिंह की शिकायत दर्ज नहीं की गयी, उल्टे उन्हें मुंह बंद रखने का सख्त निर्देश भी दिया गया.उस रात पूरी अमेठी में कांग्रेस के गुंडों ने लोगों को मुंह खोलने पर सबक सिखाने की धमकियां दी और जब इस बारे में सुकन्या की मां सुमित्रा देवी ने प्रेस से बात करने की कोशिश की तो उसे और सुकन्या को जान से मारने की धमकी भी दी गयी. इसके बाद भी सुकन्या और उसकी मां चुप नहीं बैठे और बताया जाता है कि 27 दिसंबर 2006 को बलराम सिंह सहित पूरे परिवार ने सोनिया गांधी से मिलने की कोशिश की. सोनिया गांधी ने मिलने से इंकार कर दिया. इसके बाद भी वह परिवार चुप नहीं बैठा और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की. शिकायत हुए तीन साल से ज्यादा बीत गये लेकिन आज तक इस मामले में राहुल गांधी या सोनियो गांधी को कोई नोटिस जारी नहीं हुआ है.इस बीच अफवाहों का दौर जारी रहा. लेकिन मामला उस वक्त एक बार फिर सामने आ गया जब सुकन्या सहित उसके पूरे परिवार के गायब होने की खबर सामने आ गयी. लेकिन विडंबना देखिए कि मीडिया ने नोटिस को खबर नहीं बनाया लेकिन जब नोटिस को खारिज करके याची पर जुर्माना लगाया गया तो समूची मीडिया ने उसे खबर बना दिया और यह साबित करने की कोशिश में जुट गया मानों राहुल गांधी पर कोई सिरफिरा आरोप लगा रहा है. कांग्रेस के लिए यह जीवन मरण का प्रश्न है इसलिए सच्चाई बताने या लिखनेवाले को कभी भी कहीं भी मौत की नींद सुलाया जा सकता है. शायद यही डर है कि मीडिया घराने इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे राहुल को पाक साफ घोषित कर रहे हैं लेकिन कोई किशोर समरीते को नहीं सुन रहा है जो चीख चीख कर रहे हैं कि उनकी जान को भी खतरा पैदा हो गया है क्योंकि उन्होंने सच्चाई को सामने लाने की कोशिश की है. सुकन्या और उसका पूरा परिवार कहां है यह आज भी रहस्य बना हुआ।

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घ्यानचंद्र 'को कैसे भूल सकते है

राष्ट्रीय खेल दिवस आज के दिन हम दद्आ जी ' घ्यानचंद्र 'को कैसे भूल सकते है जो की उतर् प्रदेश के इलाहाबाद शहर के छोटे कसबे से पूरे विशव में अपना और भारत का नाम एक हॉकी खेल के द्वारा रोशन किया...............— 

बुधवार, 28 अगस्त 2013

विश्वगुरु बनने की क्षमता



















आज के तथाकथित रूप से विकसित कहे जाने वाले पश्चिमी सभ्यता के लोग ..... खुद के विकसित होने का चाहे कितना भी झूठा ढोल ना पीट लें..... परन्तु, सच के सामने आते ही..... हर झूठ उसी तरह साफ़ हो जाती है... जिस तरह , हिंदुत्व के जागरण पश्चात् .... इस्लाम का सफाया हो जाया करता है....!

आप यह जानकर शायद ख़ुशी से उछल ही पड़ेंगे कि ...... जिस समय अंग्रेजों के पूर्वज नंग-धडंग जंगलों में घूमा करते थे.... उस समय हम हिन्दू ..... क्रमांकन पद्धति का पूर्ण विकास कर चुके थे....!

यहाँ तक कि.... लाख प्रयासों के बाद भी..... आज तक अंग्रेज हमारी उस क्रमांकन और गणना पद्धति का पूर्ण नक़ल तक नहीं कर पाए हैं.....!

उदाहरण के लिए .. अगर पूछा जाए कि पृथ्वी से सूर्य की दूरी क्या है तो.... उसे अंग्रेजों की भाषा में कहना होगा कि...... 150 मिलियन किलोमीटर ..!

परन्तु यदि .... यही बात किसी हिंदुस्थानी से पूछी जाए तो.... उसका जबाब होगा.... 1 .5 अरब किलोमीटर .

ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि.... अंग्रेजी की क्रमांकन और गणना पद्धति का उतना विकास आज तक नहीं हो पाया है.... जितना विकास हम हिन्दुओं ने हजारों साल पहले ही कर लिए थे....!

इसे ठीक से इस तरह समझ सकते हैं ......

जहाँ अमरीकी प्रणाली में .....100,000 .......100 हजार होते हैं.......... वही भारतीय गिनती में ............1,00,000 ........... एक लाख है

उसी तरह....... 10 ,000 ,000 ........ जहाँ अंग्रेजों के लिए.... 10 मिलियन ( दस दस लाख ) होते हैं ........... वही भारतीय गिनती में ये ..... एक करोड़ कहे जाते हैं....

और, हम भारतीयों के लिए.... ये कोई कठिन गिनती नहीं है...... क्योंकि, गिनती और क्रमांकन पद्धति का उल्लेख ..... हमारे यहाँ रामायण काल में भी हुआ है.....

जहाँ वानर राज सुग्रीव .... भगवान् राम को अपनी सेना के बारे में बताते हैं कि..... ""असंख्य बानर आ रहे हैं "".. अर्थात सेना में इतने बानर आ रहे हैं..... जिनकी गिनती नहीं की जा सकती ..!

दरअसल.... 1 , 10 , 100 , 1000 , 10000 इत्यादि के बढ़ते क्रम को ही दशमलव प्रणाली कहा जाता है.... क्योंकि, इसमें हर अलग अंक में..... पिछले अंक से 10 गुणा की बढ़ोत्तरी होती चली जाती है...!

इस दशमलव प्रणाली को बाल्मीकि रामायण में कुछ इस तरह समझाया गया है....

इक पानी का छींटा सहस्त्र आयुत लक्ष प्रयुत कोट्यः क्रमशः |
अर्बुदम अब्दम खर्व निखार्वं महापद्मं शंख्वः तस्मात् | |
निधिः चा अन्तम मध्यम परर्द्हम आईटीआई पानी का छींटा गुना उत्तरं संज्ञाह |
संख्याय स्थानानाम व्यवहार अर्थम् कृताः पूर्विः इति | |
[वाल्मीकि रामायण 3/39/44 ]

अर्थात....

एक = 1
1 दस = 10;
10 दस = 1 सौ;
10 सौ = 1 हजार (Ayut)
10 हजार
हजार 100 = 1 लाख
1 प्रयुतम = 10 लाख, = 1 मिलियन;
100 लाख = 1 कोटि = 1 करोड़;
100 करोड़ = 1 अर्बुद (अरब) = 1 अरब
100 अर्बुद = 1 वृन्दा
100 वृन्दा = 1 खर्व (खरब )
100 खर्व = 1 निखर्व (नील)
100 निखर्व = 1 महा पद्म (पद्म )
100 महा पद्म = 1 शंकु (शंख) = 1 लाख करोड़
100 शंकु = 1 समुद्र
100 समुद्र = 1 अन्त्य
100 अन्त्य = 1 मध्यम
100 मध्यम = 1 परार्ध
============================

इस तरह.... जिस गिनती को पश्चिमी देशों में हाल के वर्षों के सीखा है.... वो जानकारी हमारे हजारों -लाखों लाख पहले से ही मौजूद है....!

फिर भी.... हमारा दुर्भाग्य है कि...... हम खुद को और अपने धर्म ग्रंथों को पहचानने के बजाए.... अंग्रेजों की अंधभक्ति और अंधे अनुकरण में लगे हुए हैं.....!

जागो हिन्दुओं और पहचानो अपने आपको .....

हम विश्वगुरु थे..... और, फिर से दुनिया का विश्वगुरु बनने की क्षमता रखते हैं ....!!

बलात्कारी राहुल





















बलात्कारी राहुल गांधी ने किया बलात्कार, मामले को दबा रही है सरकार
मित्रो राहुल गांधी -सुकन्या देवी बलात्कार काण्ड के बारे में लगभग सबको पता चल चुका है . लेकिन अभिषेक मनू सिंघवी सेक्स कांड की तरह भारत की बिकाऊ मिडिया इस मामले पर भी खामोश है. अब हम सोशल मिडिया से इस खबर को सब के सामने लायेंगे. हर देशभक्त का फर्ज है वह इस को शेयर करे.

राहुल गांधी और उनके छह दोस्तों ने 3 दिसंबर 2006 की रात अमेठी के एक गेस्ट हाउस में 24 वर्षीय सुकन्या देवी के साथ बारी बारी से बलात्कार किया था. राहुल गांधी और सोनिया गांधी के इशारे पर सुकन्या सहित उसके माता पिता को "गायब" कर दिया गया है. लेकिन इस बीच एक नोटिस ने राज के ऐसे बहुत सारी पर्तों को उघाड़ देती है जो राहुल गांधी बलात्कार कांड को संदेह के घेरे में ला खड़ा करता है.इस संबंध में 1 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी को एक नोटिस जारी करते हुए उनसे पूछा था कि वे इस संबंध में अदालत को अपने पक्ष से अवगत कराएं. राहुल गांधी को अदालत ने दो सप्ताह का वक्त दिया था. लेकिन एक सप्ताह के भीतर ही अदालत में एक डबल बेंच बैठी और उसने न केवल उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें राहुल गांधी द्वारा सुकन्या तथा उसके परिजनों को बंधक बनाकर रख लेने का संदेह जताया गया था बल्कि याचिकाकर्ता किशोर समरीते पर पचास लाख का जुर्माना भी लगा दिया.

अब किशोर समरीते क्या कहते हैं?क्या है घटना?3 दिसंबर 2006 की रात नौ बजे अमेठी के गेस्ट हाउस में राहुल गांधी अपने छह विदेशी मित्रों के साथ रुके थे. कांग्रेस के प्रमुख कार्यकर्ता और सोनिया गांधी के भक्त बलराम सिंह उसी गेस्ट हाउस की देखभाल करते थे. ऐसा समझा जाता है कि राहुल गांधी के करीब पहुंचने के लिए बलराम सिंह ने अपनी 24 वर्षीय सुकन्या देवी को किसी बहाने से उनके पास भेजा. वहां सुकन्या देवी को पहले राहुल गांधी और उनके दोस्तों ने शराब पिलाई और बारी बारी से बलात्कार किया. बताते हैं कि सुकन्या देवी चीखती चिल्लाती रही लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी. बलराम सिंह को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप हो जाएगा. घटना के बाद बलराम सिंह ने स्थानीय पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन बलराम सिंह की शिकायत दर्ज नहीं की गयी, उल्टे उन्हें मुंह बंद रखने का सख्त निर्देश भी दिया गया.उस रात पूरी अमेठी में कांग्रेस के गुंडों ने लोगों को मुंह खोलने पर सबक सिखाने की धमकियां दी और जब इस बारे में सुकन्या की मां सुमित्रा देवी ने प्रेस से बात करने की कोशिश की तो उसे और सुकन्या को जान से मारने की धमकी भी दी गयी. इसके बाद भी सुकन्या और उसकी मां चुप नहीं बैठे और बताया जाता है कि 27 दिसंबर 2006 को बलराम सिंह सहित पूरे परिवार ने सोनिया गांधी से मिलने की कोशिश की. सोनिया गांधी ने मिलने से इंकार कर दिया. इसके बाद भी वह परिवार चुप नहीं बैठा और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की. शिकायत हुए तीन साल से ज्यादा बीत गये लेकिन आज तक इस मामले में राहुल गांधी या सोनियो गांधी को कोई नोटिस जारी नहीं हुआ है.इस बीच अफवाहों का दौर जारी रहा. लेकिन मामला उस वक्त एक बार फिर सामने आ गया जब सुकन्या सहित उसके पूरे परिवार के गायब होने की खबर सामने आ गयी. लेकिन विडंबना देखिए कि मीडिया ने नोटिस को खबर नहीं बनाया लेकिन जब नोटिस को खारिज करके याची पर जुर्माना लगाया गया तो समूची मीडिया ने उसे खबर बना दिया और यह साबित करने की कोशिश में जुट गया मानों राहुल गांधी पर कोई सिरफिरा आरोप लगा रहा है. कांग्रेस के लिए यह जीवन मरण का प्रश्न है इसलिए सच्चाई बताने या लिखनेवाले को कभी भी कहीं भी मौत की नींद सुलाया जा सकता है. शायद यही डर है कि मीडिया घराने इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे राहुल को पाक साफ घोषित कर रहे हैं लेकिन कोई किशोर समरीते को नहीं सुन रहा है जो चीख चीख कर रहे हैं कि उनकी जान को भी खतरा पैदा हो गया है क्योंकि उन्होंने सच्चाई को सामने लाने की कोशिश की है. सुकन्या और उसका पूरा परिवार कहां है यह आज भी रहस्य बना हुआ।

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बुधवार, 13 मार्च 2013

पथरी का होमियोपेथी इलाज


मित्रो जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान
मे डाल कर खा जाते हैं )
क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का
होना है | मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक
मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे|
इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|

आयुर्वेदिक इलाज !
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पखानबेद नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके
पत्तों को पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी
पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती !!!


होमियोपेथी इलाज !
______________

अब होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर
मिलेगी उसका नाम हे BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER
TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी हे|
वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये|

(ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना
है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS
VULGARIS ही है )

अब इस दवा की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/ 4) कप गुण गुने पानी मे
मिलाकर दिन मे चार बार (सुबह,दोपहर,शाम और रात) लेना है | चार बार अधिक
से अधिक और कमसे कम तीन बार|इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक लेना है
कभी कभी दो महीने भी लग जाते है |

इससे जीतने भी stone है ,कही भी हो गोलब्लेडर gall bladder )मे हो या
फिर किडनी मे हो,या युनिद्रा के आसपास हो,या फिर मुत्रपिंड मे हो| वो सभी
स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे|

99% केस मे डेढ़ से दो महीने मे ही सब टूट कर निकाल देता हे कभी कभी हो
सकता हे तीन महीने भी हो सकता हे लेना पड़े|तो आप दो महिने बाद
सोनोग्राफी करवा लीजिए आपको पता चल जायेगा कितना टूट गया है कितना रह
गया है | अगर रह गया हहै तो थोड़े दिन और ले लीजिए|यह दवा का साइड
इफेक्ट नहीं है |

____________________
ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके
लिए क्या??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट
के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ???

इसके लिए एक और होमियोपेथी मे दवा है CHINA 1000|
प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद
सीधे जीभ पर डाल दीजिए|सिर्फ एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य
मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा|

मोतियाबिंद का आयुर्वेदिक इलाज


मोतियाबिंद का आयुर्वेदिक इलाज -----------------
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मोतियाबिंद एक आम समस्या बनता जा रहा है, अब तो युवा भी इस रोग के शिकार होने लगे हैं। अगर इस रोग का समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी अंधेपन का शिकार हो जाता है।

कारण : मोतियाबिंद रोग कई कारणों से होता है। आंखों में लंबे समय तक सूजन बने रहना, जन्मजात सूजन होना, आंख की संरचना में कोई कमी होना, आंख में चोट लग जाना, चोट लगने पर लंबे समय तक घाव बना रहना, कनीनिका में जख्म
बन जाना, दूर की चीजें धूमिल नजर आना या सब्जमोतिया रोग होना, आंख के परदे का किसी कारणवश अलग हो जाना, कोई गम्भीर दृष्टि दोष होना, लंबे समय तक तेज रोशनी या तेज गर्मी में कार्य करना, डायबिटीज होना, गठिया होना, धमनी रोग होना, गुर्दे में जलन का होना, अत्याधिक कुनैन का सेवन, खूनी बवासीर का रक्त स्राव अचानक बंद हो जाना आदि समस्याएँ मोतियाति‍बिंद को जन्म दे सकती हैं।

मोतियाबिंद का आयुर्वेदिक इलाज
रक्त मोतियाबिंद में सभी चीजें लाल, हरी, काली, पीली और सफेद नजर आती हैं। परिम्लामिन मोतियाबिंद में सभी ओर पीला-पीला नजर आता है। ऐसा लगता है जैसे कि पेड़-पौधों में आग लग गई हो।
सभी प्रकार के मोतियाबिंद में आंखों के आस-पास की स्थिति भी अलग-अलग होती है। वातज मोतियाबिंद में आंखों की पुतली लालिमायुक्त, चंचल और कठोर होती है। पित्तज मोतियाबिंद में आंख की पुतली कांसे के समान पीलापन लिए होती है। कफज मोतियाबिंद में आंख की पुतली सफेद और चिकनी होती है या शंख की तरह सफेद खूँटों से युक्त व चंचल होती है। सन्निपात के मोतियाबिंद में आंख की पुतली मूंगे या पद्म पत्र के समान तथा उक्त सभी के मिश्रित लक्षणों वाली होती है। परिम्लामिन में आंख की पुतली भद्दे रंग के कांच के समान, पीली व लाल सी, मैली, रूखी और नीलापन लिए होती है।

मोतियाबिंद का आयुर्वेदिक इलाज


आंखों में लगाने वाली औषधियाँ-

त्रिफला के जल से आंखें धोना::
आयुर्वेद में हरड़ की छाल (छिलका), बहेड़े की छाल और आमले की छाल - इन तीनों को त्रिफला कहते हैं । यह त्रिदोषनाशक है अर्थात् वात, पित्त, कफ इन तीनों दोषों के कुपित होने से जो रोग उत्पन्न होते हैं उन सबको दूर करने वाला है । मस्तिष्क सम्बन्धी तथा उदर रोगों को दूर भगाता है तथा इन्हें शक्ति प्रदान करता है । सभी ज्ञानेन्द्रियों के लिये लाभदायक तथा शक्तिप्रद है । विशेषतया चक्षुरोग के लिये तो रामबाण है । कभी-कभी स्वस्थ मनुष्यों को भी त्रिफला के जल से अपने नेत्र धोते रहना चाहिये । नेत्रों के लिए अत्यन्त लाभदायक है । कभी-कभी त्रिफला की सब्जी खाना भी हितकर है ।
धोने की विधि - त्रिफला को जौ से समान (यवकुट) कूट लो और रात्रि के समय किसी मिट्टी, शीशे वा चीनी के पात्र में शुद्ध जल में भिगो दो । दो तोले वा एक छटांक त्रिफला को आधा सेर वा एक सेर शुद्ध जल में भिगोवो । प्रातःकाल पानी को ऊपर से नितारकर छान लो । उस जल से नेत्रों को खूब छींटे लगाकर धोवो । सारे जल का उपयोग एक बार के धोने में ही करो । इससे निरन्तर धोने से आंखों की उष्णता, रोहे, खुजली, लाली, जाला, मोतियाबिन्द आदि सभी रोगों का नाश होता है । आंखों की पीड़ा (दुखना) दूर होती है, आंखों की ज्योति बढ़ती है । शेष बचे हुए फोकट सिर पर रगड़ने से लाभ होता है ।
त्रिफला की टिकिया
(१) त्रिफला को जल के साथ पीसकर टिकिया बनायें और आंखों पर रखकर पट्टी बांध दें । इससे तीनों दोषों से दुखती हुई आंखें ठीक हो जाती हैं ।
(२) हरड़ की गिरी (बीज) को जल के साथ निरन्तर आठ दिन तक खरल करो । इसको नेत्रों में डालते रहने से मोतियाबिन्द रुक जाता है । यह रोग के आरम्भ में अच्छा लाभ करता है ।

* मोतियाबिंद की शुरुआती अवस्था में भीमसेनी कपूर स्त्री के दूध में घिसकर नित्य लगाने पर यह ठीक हो जाता है।

* हल्के बड़े मोती का चूरा 3 ग्राम और काला सुरमा 12 ग्राम लेकर खूब घोंटें। जब अच्छी तरह घुट जाए तो एक साफ शीशी में रख लें और रोज सोते वक्त अंजन की तरह आंखों में लगाएं। इससे मोतियाबिंद अवश्य ही दूर हो जाता है।

* छोटी पीपल, लाहौरी नमक, समुद्री फेन और काली मिर्च सभी 10-10 ग्राम लें। इसे 200 ग्राम काले सुरमा के साथ 500 मिलीलीटर गुलाब अर्क या सौंफ अर्क में इस प्रकार घोटें कि सारा अर्क उसमें सोख लें। अब इसे रोजाना आंखों में लगाएं।

* 10 ग्राम गिलोय का रस, 1 ग्राम शहद, 1 ग्राम सेंधा नमक सभी को बारीक पीसकर रख लें। इसे रोजाना आंखों में अंजन की तरह प्रयोग करने से मोतियाबिंद दूर होता है।

* मोतियाबिंद में उक्त में से कोई भी एक औषधि आंख में लगाने से सभी प्रकार का मोतियाबिंद धीरे-धीरे दूर हो जाता है। सभी औषधियां परीक्षित हैं।
नेत्र रोगों में कुदरती पदार्थों से ईलाज करना फ़ायदेमंद रहता है। मोतियाबिंद बढती उम्र के साथ अपना तालमेल बिठा लेता है। अधिमंथ बहुत ही खतरनाक रोग है जो बहुधा आंख को नष्ट कर देता है। आंखों की कई बीमारियों में नीचे लिखे सरल उपाय करने हितकारी सिद्ध होंगे-

१) सौंफ़ नेत्रों के लिये हितकर है। मोतियाबिंद रोकने के लिये इसका पावडर बनालें। एक बडा चम्मच भर सुबह शाम पानी के साथ लेते रहें। नजर की कमजोरी वाले भी यह उपाय करें।

२) विटामिन ए नेत्रों के लिये अत्यंत फ़ायदेमंद होता है। इसे भोजन के माध्यम से ग्रहण करना उत्तम रहता है। गाजर में भरपूर बेटा केरोटिन पाया जाता है जो विटामिन ए का अच्छा स्रोत है। गाजर कच्ची खाएं और जिनके दांत न हों वे इसका रस पीयें। २०० मिलि.रस दिन में दो बार लेना हितकर माना गया है। इससे आंखों की रोशनी भी बढेगी। मोतियाबिंद वालों को गाजर का उपयोग अनुकूल परिणाम देता है।

३) आंखों की जलन,रक्तिमा और सूजन हो जाना नेत्र की अधिक प्रचलित व्याधि है। धनिया इसमें उपयोगी पाया गया है।सूखे धनिये के बीज १० ग्राम लेकर ३०० मिलि. पानी में उबालें। उतारकर ठंडा करें। फ़िर छानकर इससे आंखें धोएं। जलन,लाली,नेत्र शौथ में तुरंत असर मेहसूस होता है।

४) आंवला नेत्र की कई बीमारियों में लाभकारी माना गया है। ताजे आंवले का रस १० मिलि. ईतने ही शहद में मिलाकर रोज सुबह लेते रहने से आंखों की ज्योति में वृद्धि होती है। मोतियाबिंद रोकने के तत्व भी इस उपचार में मौजूद हैं।

५) भारतीय परिवारों में खाटी भाजी की सब्जी का चलन है। खाटी भाजी के पत्ते के रस की कुछ बूंदें आंख में सुबह शाम डालते रहने से कई नेत्र समस्याएं हल हो जाती हैं। मोतियाबिंद रोकने का भी यह एक बेहतरीन उपाय है।

६) अनुसंधान में साबित हुआ है कि कद्दू के फ़ूल का रस दिन में दो बार आंखों में लगाने से मोतियाबिंद में लाभ होता है। कम से कम दस मिनिट आंख में लगा रहने दें।

७) घरेलू चिकित्सा के जानकार विद्वानों का कहना है कि शहद आंखों में दो बार लगाने से मोतियाबिंद नियंत्रित होता है।

८) लहसुन की २-३ कुली रोज चबाकर खाना आंखों के लिये हितकर है। यह हमारे नेत्रों के लेंस को स्वच्छ करती है।

९) पालक का नियमित उपयोग करना मोतियाबिंद में लाभकारी पाया गया है। इसमें एंटीआक्सीडेंट तत्व होते हैं। पालक में पाया जाने वाला बेटा केरोटीन नेत्रों के लिये परम हितकारी सिद्ध होता है। ब्रिटीश मेडीकल रिसर्च में पालक का मोतियाबिंद नाशक गुण प्रमाणित हो चुका है।

१०) एक और सरल उपाय बताते हैं- अपनी दोनों हथेलियां आंखों पर ऐसे रखें कि ज्यादा दबाव मेहसूस न हो। हां, हल्का सा दवाब लगावे। दिन में चार-पांच बार और हर बार आधा मिनिट के लिये करें। मोतियाबिंद से लडाई का अच्छा तरीका है।

११) किशमिश ,अंजीर और खारक पानी में रात को भिगो दें और सुबह खाएं । मोतियाबिंद की अच्छी घरेलू दवा है।

१२) भोजन के साथ सलाद ज्यादा मात्रा में शामिल करें । सलाद पर थोडा सा जेतून का तेल भी डालें। इसमें प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के गुण हैं जो नेत्रों के लिये भी हितकर है।

मोतियाबिंद दो प्रकार का होता है।

1.nuclear cataract.

2.cortical cataract.

उक्त दोनो तरह के मोतियाबिंद बनने से रोकने के लिये विटामिन ए तथा बी काम्प्प्लेक्स का दीर्घावधि तक उपयोग करने की सलाह दी जाती है। अगर मोतियाबिंद प्रारंभिक हालत में है तो रोक लगेगी।


खाने वाली औषधियाँ-
आंखों में लगने वाली औषधि के साथ-साथ जड़ी-बूटियों का सेवन भी बेहद फायदेमन्द साबित होता है। एक योग इस प्रकार है, जो सभी तरह के मोतियाबिंद में फायदेमन्द है-

* 500 ग्राम सूखे आँवले गुठली रहित, 500 ग्राम भृंगराज का संपूर्ण पौधा, 100 ग्राम बाल हरीतकी, 200 ग्राम सूखे गोरखमुंडी पुष्प और 200 ग्राम श्वेत पुनर्नवा की जड़ लेकर सभी औषधियों को खूब बारीक पीस लें। इस चूर्ण को अच्छे प्रकार के काले पत्थर के खरल में 250 मिलीलीटर अमरलता के रस और 100 मिलीलीटर मेहंदी के पत्रों के रस में अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद इसमें शुद्ध भल्लातक का कपड़छान चूर्ण 25 ग्राम मिलाकर कड़ाही में लगातार तब तक खरल करें, जब तक वह सूख न जाए। इसके बाद इसे छानकर कांच के बर्तन में सुरक्षित रख लें। इसे रोगी की शक्ति व अवस्था के अनुसार 2 से 4 ग्राम की मात्रा में ताजा गोमूत्र से खाली पेट सुबह-शाम सेवन करें।


फायदेमन्द व्यायाम व योगासन-

* औषधियाँ प्रयोग करने के साथ-साथ रोज सुबह नियमित रूप से सूर्योदय से दो घंटे पहले नित्य क्रियाओं से निपटकर शीर्षासन और आंख का व्यायाम अवश्य करें।

* आंख के व्यायाम के लिए पालथी मारकर पद्मासन में बैठें। सबसे पहले आंखों की पुतलियों को एक साथ दाएँ-बाएँ घुमा-घुमाकर देखें फिर ऊपर-नीचे देखें। इस प्रकार यह अभ्यास कम से कम 10-15 बार अवश्य करें। इसके बाद सिर को स्थिर रखते हुए दोनों आंखों की पुतलियों को एक गोलाई में पहले सीधे फिर उल्टे (पहले घड़ी की गति की दिशा में फिर विपरीत दिशा में) चारों ओर घुमाएँ। इस प्रकार कम से कम 10-15 बार करें। इसके बाद शीर्षासन करें।

कुछ खास हिदायतें

* मोतियाबिंद के रोगी को गेहूँ की ताजी रोटी खानी चाहिए। गाय का दूध बगैर चीनी का ही पीएँ। गाय के दूध से निकाला हुआ घी भी सेवन करें। आंवले के मौसम में आंवले के ताजा फलों का भी सेवन अवश्य करें। फलों में अंजीर व गूलर अवश्यक खाएं।

* सुबह-शाम आंखों में ताजे पानी के छींटे अवश्य मारें। मोतियाबिंद के रोगी को कम या बहुत तेज रोशनी में नहीं पढ़ना चाहिए और रोशनी में इस प्रकार न बैठें कि रोशनी सीधी आंखों पर पड़े। पढ़ते-लिखते समय रोशनी बार्ईं ओर से आने दें।

* वनस्पति घी, बाजार में मिलने वाले घटिया-मिलावटी तेल, मांस, मछली, अंडा आदि सेवन न करें। मिर्च-मसाला व खटाई का प्रयोग न करें। कब्ज न रहने दें। अधिक ठंडे व अधिक गर्म मौसम में बाहर न निकलें