सोमवार, 26 मार्च 2018

शीशम को आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग

शीशम को आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग किया जाता है। शीशम के पत्तों से निकलने वाले चिपचिपे पदार्थ को कई रोगों के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। इसके तेल को दर्दनाशक, अवसादरोधी, सड़न रोकने वाले, जीवाणु रोधक, कीटनाशक और स्फूर्तिदायक आदि के तौर पर प्रयोग किया जाता है।इस का प्रयोग गर्मी के मौसम में अधिक लाभदायक होता है क्योंकि यह पित शामक है तथा शरीर में ठंडक महसूस करती हैं! कृपया इसे जनहित में शेयर करें व पुन्‍य के भागी बने आपका अपना डॉ जितेंद्र गिल सदस्य भारतीय चिकित्सा परिषद्.

मूत्रकृच्छ : मूत्रकृच्छ (पेशाब करते समय परेशानी) की ज्यादा पीड़ा में शीशम के पत्तों का 50-100 मिलीलीटर काढ़ा दिन में 3 बार रोगी को पिलाने से लाभ मिलता है।

लालामेह और पूयमेह : लालामेह और पूयमेह में 10-15 मिलीलीटर शीशम के पत्तों का रस दिन में 3 बार रोगी को देने से लाभ होता है।

हैजा या विसूचिका : सुगंधित और चटपटी औषधियों के साथ शीशम की गोलियां बनाकर विसूचिका (हैजा) में देने से आराम मिलता है।

आँखों का दर्द : शीशम के पत्तों का रस और शहद मिलाकर इसकी बूंदें आंखों में डालने से दु:खती आंखें ठीक होती है।

वक्ष सूजन : शीशम के पत्तों को गर्म करके स्तनों पर बांधने से और इसके काढ़े से वक्षो को धोने से सूजन दुुर हो जााती है।

पेट की जलन और पीलिया : उदर (पेट) की जलन में 10-15 मिलीलीटर शीशम के पत्तों का रस रोगी को देने से लाभ होता है। पीलिया के रोग में भी शीशम के पत्तों का रस 10-15 मिलीलीटर सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।

हर तरह का बुखार : हर तरह के बुखार में 20 मिलीलीटर शीशम का सार, 320 मिलीलीटर पानी, 160 मिलीलीटर दूध को मिलाकर गर्म करने के लिए रख दें। दूध शेष रहने पर दिन में 3 बार रोगी को पिलाने से लाभ होता है।

गृघसी या जोड़ों का दर्द : शीशम की 10 किलोग्राम छाल का मोटा चूरा बनाकर साढ़े 23 लीटर पानी में उबालें, पानी का 8वां भाग जब शेष रह जाए तब इसे ठंडा होने पर कपड़े में छानकर फिर इसको चूल्हे पर चढ़ाकर गाढ़ा करें। इस गाढ़े पदार्थ को 10 मिलीलीटर की मात्रा में घी युक्त दूध पकाने के साथ 21 दिन तक दिन में 3 बार लेने से गृधसी रोग (जोड़ों का दर्द) खत्म हो जाता है।

रक्त विकार : शीशम के 1 किलोग्राम बुरादे को 3 लीटर पानी में भिगोकर रख लें, फिर उबाल लें, जब पानी आधा रह जाए तब इसे छान लें, इसमें 750 ग्राम बूरा (पिसी हुई मिश्री या शक्कर) मिलाकर शर्बत बना लें, यह शर्बत खून को साफ करता है। शीशम के 3 से 6 ग्राम बुरादे का शर्बत बनाकर रोगी को पिलाने से खून की खराबी दूर होती है।

कष्टार्त्तव या मासिक धर्म का कष्ट का आना : 3 से 6 ग्राम शीशम का चूर्ण या 50 से 100 मिलीलीटर काढ़ा कष्टार्त्तव रोग में दिन में 2 बार सेवन करने से लाभ होता है।

कफ : 10 से 15 बूंद शीशम का तेल सुबह-शाम गर्म दूध में मिलाकर सेवन करने से बलगम समाप्त हो जाता है।

आंवरक्त या पेचिश : 6 ग्राम शीशम के हरे पत्ते और 6 ग्राम पोदीना के पत्तों को पानी में ठंडाई की तरह घोंटकर पीने से पेचिश के रोग में लाभ होता है।

घाव में : शीशम के पत्तों से बने तेल को घाव पर लगाने से घाव जल्दी ठीक होता है। यहां तक की कुष्ठ (कोढ़) के घाव में भी इसका उपयोग लाभकारी होता है।

माता-बहनो में प्रदर रोग : 40-40 ग्राम शीशम के पत्ते और फूल, 40 ग्राम इलायची, 20 ग्राम मिश्री और 16 कालीमिर्च को एक साथ पीसकर पीने से प्रदर रोग में लाभ मिलता है।

पौरुष शक्ति में : रात में एक मिट्टी के बर्तन में पानी रखें शीशम के हरे और कोमल पत्तों को रखकर ढक दें। सुबह इन्हें निचोड़कर छान लें और ताल मिश्री मिलाकर खाने से लाभ होता है।

कुष्ठ (कोढ़) : कुष्ठ रोग में शीशम के तेल को लगाने से या शीशम के पत्तों से बने तेल को लगाने से कुष्ठ (कोढ़) रोग में आराम आता है।

नाड़ी का दर्द : शीशम की जड़ व पत्तें और बराबर मात्रा में सैंधा नमक लेकर कांजी में इसका लेप बनाकर लगाने से नाड़ी रोग जल्द ठीक होता है।

हृदय रोग में फायदेमंद : यदि आपका कोलेस्ट्राल बढ़ गया है और आप हृदय रोग से ग्रस्त हैं तो शीशम के तेल का सेवन आपके लिए रामबाण साबित हो सकता है। शीशम के तेल का सेवन रक्त प्रवाह को बेहतर रखता है। इस तेल से बना खाना खाने से पाचन शक्ति भी मजबूत होती है।

अवसाद से दूर रखने में सहायक : शीशम के तेल का सेवन करने से अवसाद ग्रस्त रोगियों को कुछ ही देर में आराम मिल जाता है। इसका सेवन आपको उदासी और निराशा से दूर रखता है। साथ ही जिंदगी में सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने में मदद करता है। खाने में इसका प्रयोग उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है जो हाल-फिलहाल ही अपने किसी लक्ष्य को नहीं पा सके।

चोट का घाव : यदि आपके शरीर के किसी हिस्से में चोट का घाव है तो इसे भरने में शीशम का तेल सहायक है। घाव वाली जगह पर आप शीशम के तेल में हल्दी मिलाकर बांध लें। इससे घाव जल्द भर जाएगा। इसके अलावा फटी हुई एडियों (बिवाई) पर शीशम का तेल लगाने से एडियों की रंगत लौट आती है।

सोमवार, 19 मार्च 2018

मेरा कुछ शुरुआती चिकित्सकीय अनुभव

मेरा कुछ शुरुआती चिकित्सकीय अनुभव 

अब मैं एक चिकित्सक के रूप में अपना अनुभव मैं आप के बीच बांटता हूं…
1-दिनांक 16-10-2001. रोगी-श्रीमती क देवी, पति-ख मंडल. पता-बंगाली टोला, कल्याणपुर. जिला-मुंगेर (बिहार). 
क देवी की मां ग देवी अपनी बेटी के साथ मेरे पास आकर कहने लगीं. डॉ साहब, मेरी बेटी की शादी के 12 वर्ष बीत गये हैं, लेकिन अभी तक मां नहीं बन पायी. काफी इलाज कराया, झाड़-फूंक, जादू-टोना भी कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ… अब आप दवा दें कि मेरी बेटी मां बन जाये. मैंने जांच की तो देखा, क देवी के बाल उलझ कर चिपके हुए थे, मासिक स्राव में प्रसव पीड़ा की तरह दर्द, बांझपन एवं बराबर सर्दी का रहना. मैंने लक्षण के अनुसार बोरेक्स-30 सुबह-शाम एवं बायो कांबिनेशन-5, 4×4 दिया. इसी प्रकार दो माह तक समय के अनुसार बोरेक्स-30, सेकलेक एवं बी.सी-5 देता रहा. 20/12/2001 को सर्दी एवं मासिक स्राव में शत-प्रतिशत आराम मिल गया. 20/12/2001 को यौन संबंध के आधा घंटा पहले एवं आधा घंटा बाद बोरेक्स-6x दिया. सत्यव्रत सिद्धांलंकार मां तथा बच्चा पृष्ठ संख्या-6, 28-01-2002 को क देवी की मां ग देवी ने मुस्कुराते हुए आयीं और बोली- डॉक्टर साहब, 10 दिन बीत गये, मेरी बेटी मासिक धर्म नहीं आया है. सेकलेक तीन बार मैंने लेने के लिए दिया. 26-03-2002 को उल्टी-मितली की शिकायत पर इपिकाक-30 एवं बी.सी.-26 4×4 समय के अनुसार चलाता रहा. क देवी को 10-10-2003 को नार्मल ढंग से बेटा हुआ.
2- श्री क राम, उम्र 60 साल, ग्राम-रूतपय, पत्रालय- शंभूगंज, जिला भागलपुर (बिहार). सुल्तानगंज से 15 किलोमीटर दक्षिण. ससुराल मेरे गांव कल्याणपुर में है.
-दिनांक 12-06-2002 को अपने दोनों पैर मे सफेद दाग दिखाते हुए बताया कि पहले दोनों पैर में सफेद दाग के स्थान लसलसा स्राव बहने वाला एक्जिमा थआ, जो छूटने का नाम नहीं लेता था, बहुत दिनों तक एलोपैथ की सूई दवा एवं मलहम लगाने के बाद एक्जिमा ठीक हो गया, लेकिन तीन वर्ष पहले उसी स्थान पर सफेद दाग हो गया, जो धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. हाथ-पैर का नाखून अपने आप टूट रहा है.
मैंने इन लक्षणों के आधार पर एवं डॉ विनय कुमार राय (सफेद दाग) पृष्ठ संख्या -23 के आधार पर ग्रेफाइटिस 200 का एक एक डोज के साथ सेकलेक दिया. 24-06-2002 को रोगी जगत राम घबराते हुए निराशा भाव से दोनों पैर दिखाते हुए बोला-पहले वाला एक्जिमा हो गया. सफेद दाग के स्थान से लसलसा शहद के समान स्राव निकल रहा था. मैंने उसे समझाया कि यह होमियोपैथ का शुभ लक्षण है. आप का सफेद दाग ठीक हो जायेगा. सेकलेक देकर 15 दिन बाद बुलाया. 10-07-2002 को जब वह मेरे पास आया तो  सफेद दाग एवं एक्जिमा में 30 प्रतिशत का आराम हो गया. ग्रेफाइटिस -200 का एक डोज के साथ सेकलेक. तीन माह तक सेकलेक देता रहा. सफेद दाग धीरे-धीरे गायब हो गया. ग्रेफाइटिस -200 की केवल दो मात्रा से सफेद दाग पूरी तरह ठीक हो गया.
3- रोगी का नाम- क कुमारी. पिता- ख सिंह. उम्र-18 साल. ग्राम-घोसैठ, पोस्ट आफिस-अभयपुर, जिला-मुंगेर (बिहार).
दिनांक- 16-04-2004 को दोनों हाथ-पैर में सफेद दाग दिखाते हुए बोली- वर्षों पहले हाथ-पैर में एक्जिमा हुआ था, एलोपैथ सूई-दवा, मलहम उपयोग करने से एक्जिमा ठीक हो गया, लेकिन चार साल से सफेद दाग हो गया है. ये धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. भागलपुर एवं पटना में एलोपैथ इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला. इतना बताते-बताते क कुमारी अनेक बार अपने मुंह पर हाथ फेरती रही. मैंने पूछा –मुंह पर हाथ क्यों फेरती हो.
क ने बताया- मुझे चेहरे पर मकड़ी का जाला जैसा अनुभव होता है.
डॉ. सत्यव्रत होमियोपैथी औषधियों का सजीव चित्रण पृष्ठ संख्या-321 इस लक्षण पर ग्रेफाइटिस-200 का एक डोज साथ में सेकलेक. 26-04-2004 को कुछ लाभ नहीं. क के साथ क के पिता भी आये थे, जो खांसते रहते थे. मैंने पिता से पूछा आप को दमा है क्या. तब उन्होंने बताया कि मुझे पहले क्षय रोग था. इसी आधार पर मैंने क को बैसीलिनम-1M का एक डोज एवं दूसरे दिन ग्रेफाइटिस-200 का एक डोज.
20-05-2004 को सफेद दाग के स्थान पर एक्जिमा उभर आया. एक्जिमा से लसलसा पानी चल रहा था. सेकलेक एक डोज. 30-05-2004 को सफेद दाग एवं एक्जिमा में आराम. बेसीलिनम-1M एक डोज. 16-06-2004 को काफी राहत. सेकलेक 26-06-2004 को 75 प्रतिशत सफेद दाग से राहत. बेसीलिनम-1M. दूसरे दिन ग्रेफाइटिस-1M. 10-07-2004 को 10 प्रतिशत राहत, सेकलेक 30-07-2004. सफेद दाग से पूरी तरह आराम. परंतु अभी 15 दिन ही बीते थे कि क देवी को फिर दिक्कत शुरू हुई. इसके बाद तीन महीने तक सेकलेक का डोज दिया. तब जाकर क देवी को सफेद दाग से पूरी तरह राहत मिली.
4- रोगी का नाम-क देवी. उम्र-22 वर्ष. पति-ख सिंह. तिलकामांझी, जिला-भागलपुर. माता-पिता का घर-कल्याणपुर (मुंगेर).
दिनांक-10-05-2004 को क देवी अपने पिता के साथ आकर बोलीं- मेरी गर्दन एवं गाल पर सफेद दाग हो गया है. मुझे नीचे की गति से काफी भय लगता है. श्वेत प्रदर गर्म पानी की धार की तरह बहता है. इसके सफेद दाग में लाल धब्बा देख कर मुझे डॉ दरबारी की लेखनी याद आयी. बोरेक्स-30 सुबह-शाम दे दिया. 25-05-2004 सफेद दाग मलिन. 13-06-2004 को सफेद दाग 50 फीसदी गायब, सेकलेक. 27-06-2004 को सफेद दाग से पूर्ण लाभ. फिर भी मैंने कुछ माह लगातार क देवी को सेकलेक देता रहा. अब जाकर क देवी पूरी तरह से ठीक हैं.
5- रोगी का नाम-क कुमार (कारीगर वेल्डिंग शॉप), स्थान- जमालपुर रेल कारखाना, मुंगेर.
मैं जमालपुर रेल कारखाना में 20 वर्षों से बीमार, रेल इंजन एवं 140 टन क्रेन का इलाज तकनीशियन के रूप में करते-करते अब रेल कर्मी एवं अधिकारियों का होमियोपैथ से इलाज करने वाला चिकित्सक बन चुका था. दिनांक 02-02-2002 को क कुमार दायें-बायें गले पर एवं होंठ पर सफेद दाग की शिकायत लेकर मुझसे मिले और बोले- पांच साल से एलोपैथ, होमियोपैथ एवं आयुर्वेद का इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला.
मैंने तमाम बातें पूछीं, लेकिन कुछ भी लक्षण स्पष्ट नहीं हुआ, केवल पिता को खुजली एवं एक्जिमा के इतिहास के. मैंने सोरिनम-1M 15 दिन पर एवं एचसी-85, दो गोली चार बार शुरू कर दिया. 10-04-2002 को सफेद दाग में कुछ अंतर आने लगा. इसी दवा को लगभग आठ माह तक चलाता रहा. 17-10-2002 को सफेद दाग पूर्ण रूप से ठीक हो गया. रोगी मेरे साथ ही कार्यरत हैं. अभी वो पूरी तरह ठीक हैं.
6- रोगी का नाम-क देवी, ग्राम-भदौड़ा, पोस्टआफिस-लोहची, जिला-मुंगेर. कल्याणपुर से पांच किमी दक्षिण.
दिनांक 06-01-2001 को आठ वर्षों से एक पैर में फील पांव था. कुछ दिन आयुर्वेद इलाज कराया, फायदा नहीं मिलने पर मेरे पास आयीं. मैंने डॉ सत्यव्रत साहब की रोग तथा होमियोपैथी चिकित्सा पृष्ठ संख्या 270 के अनुसार हाइड्रोकोटाइल-1M एवं डॉ राजेश दीक्षित के कंप्लीट बायोकैमी पृष्ठ संख्या 207 के अनुसार कैलि सल्फ-3X, नेट्रम सल्फ 3X तथा साइलिशिया 12X का मिश्रण एक वर्ष तक देता रहा. मरीज पूरी तरह ठीक हो गयी.
7- रोगी का नाम- क कुमारी. उम्र-30 साल. पति ख कुमार. स्थान-रेलवे अस्पताल-जमालपुर में नर्स के पद पर कार्यरत.
इनकी शिकायत थी कि जुकाम के साथ लगातार छींक आना. छींकते-छींकते आंखों में पानी भर आना. छींक-जुकाम के साथ बेहद सिर दर्द.
दिनांक 04-10-2002 को सेवाडिल्ला-30 एवं बी.सी.-5 दवा देते रहने के बाद वर्षों का रोग एक माह में ही ठीक हो गया.
8- रोगी का नाम-श्री क चटर्जी, वरीय अभियंता-स्टील फाउंड्री, रेलवे वर्कशॉप जमालपुर कारखाना.
चटर्जी साहब ने 22-06-2004 को मुझसे बताया कि मेरे दायें पैर की जांघ से घुटने तक दर्द रहता है. आराम करने पर दर्द बढ़ जाता है. सूई चुभने सा दर्द रहता है. कभी कभी दर्द इतना अधिक होता है कि जैसे चाकू से मेरे पैर को कोई काट रहा है. एलोपैथ दवा से कुछ आराम मिलता है, लेकिन पेट में जलन होने लगती है. मैंने लक्षण जानकर कैलि कार्ब-30 की एक पुड़िया खिला कर मैग फॉस -6X, 4X4 का निर्देश देते हुए एक सप्ताह के बाद बुलाया. चटर्जी साहब तीन दिन बाद मिले और बोले- आप तो जादू की पुड़िया दिये, मेरा दर्द पहली ही खुराक से गायब हो गया.

9- रोगी का नाम- क राय, अनुभाग अभियंता-वेल्डिंग शॉप, रेलवे वर्कशॉप, जमालपुर कारखाना, जिला –मुंगेर.
दिनांक 02-02-03. राय जी ने मुझसे शिकायत की कि गड़गड़ाहट के साथ बार-बार पैखाना होता है. इसका इलाज मैं रेलवे अस्पताल जमालपुर में कराया. भागलपुर के मशहूर फिजीशियन डॉ हेमशंकर शर्मा और पटना के मशहूर फिजीशियन डॉ बीके अग्रवाल को भी दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. दवा बंद करता हूं, तो मर्ज शुरू हो जाता है. मैंने होमियोपैथ इलाज शुरू करने से पहले उनसे पूछताछ शुरू की, तो पता चला कि उनका पैखाना अत्यंत बदबूदार, सुबह से दोपहर तक रोग में वृद्धि, पैखाना होने के बाद पांव में ऐठन, कभी कब्ज, कभी दस्त बना रहता है. सारा का सारा लक्षण पोडोफाइलम दवा से मिलता लगा. मैंने राय जी को पोडोफाइलम-30 दिन में तीन बार लेने का निर्देश दिया. लगभग एक सप्ताह में उनका सारा कष्ट दूर हो गया. मैं उन्हें तीन माह तक सेकलैक देता रहा. अभियंता साहब का पुराना मर्ज हमेशा के लिए गायब हो गया.
10- रोगी का नाम- श्री क कुमार, सेक्शन आफिसर, ब्वायलर शॉप, रेलवे कारखाना जमालपुर, मुंगेर.
दिनांक 16-04-03 को अपने शरीर में जहां-तहां ग्रंथियों में कड़ा पन दिखाते हुए बोले- महीनों से एलोपैथ इलाज करा रहा हूं, ठीक नहीं हो रहा है. मैंने उन्हें कार्बो एनीमल-200 का डोज एक सप्ताह के लिए दिया. तीन सप्ताह में उनका सारा कष्ट दूर हो गया.
11- रोगी का नाम- क गोस्वामी, उम्र-28 साल, स्थान- कुमारपुर (कल्याणपुर), जिला-मुंगेर.
दिनांक 07-07-2003 को अपने पिता के साथ ट्राली पर लदे कराहते हुए आये और बोले- मेरे कमर के पिछले भाग से पैर की एड़ी तक जोर का दर्द होता है, कभी सुन्न हो जाता है. मैं बहुत दिनों से एलोपैथ दवा खा कर इसे दबा देता रहा, लेकिन अब एलोपैथ दवा का कुछ भी असर नहीं रहता है. मैंने नेफेलियम दवा की 30 शक्ति की दवा तीन बार खाने का निर्देश देकर एक सप्ताह के बाद बुलाया. परंतु गोस्वामी जी अगली बार साइकिल चलाते हुए आये और बोले- आप की दवा ने तो जादू कर दिया. मुझे अब किसी तरह का दर्द नहीं है.

कब्ज का होमियोपैथी में इलाज

कब्ज का होमियोपैथी में इलाज

होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति में इलाज के लिए दवाओं का चयन व्यक्तिगत लक्षणों पर आधारित होता है. यही एक तरीका है जिसके माधयम से रोगी के सब विकारों को दूर कर सम्पूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है. होमियोपैथी का उद्देश्य कब्ज (Constipation) करने वाले कारणों का सर्वमूल नाश करना है न की केवल कब्ज (Constipation) का. जहां तक चिकित्सा सम्बन्धी उपाय की बात है तो होमियोपैथी में कब्ज (Constipation) के लिए अनेक दवाइयां ( Drugs) उपलब्ध हैं. व्यतिगत इलाज़ के लिए एक योग्य होम्योपैथिक (Qualified Homeopathic) डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
नक्स-वोमिका, ग्रैफाइटिस, प्लम्बम, ओपियम तथा ब्रायोनिया आदि इस रोग की श्रेष्ठ औषधियां मानी जाती हैं.
नक्स-वोमिका 30, 200 – जिन लोगों को अधिक पढ़ना-लिखना पड़ता है, जो आलसी की भांति बैठे-बैठे दिन बिताते हैं, जो जरा-सी बात में ही चिढ़ जाते हैं, खिन्न रहते हैं तथा जिनके पेट में कब्ज और गड़बड़ी रहती है, उनके लिए इस औषधि को 30 क्रम में देना अच्छा रहा है. यदि बारंबार पाखाने की हाजत हो, परन्तु हर बार थोड़ा पाखाना ही हो तथा पेट भली-भांति साफ न हो, बार-बार पाखाना हो जाने पर ही कुछ आराम का अनुभव होता हैं – ऐसे विशेष लक्षणों में ही इस औषधि का प्रयोग करना चाहिए. यदि दस्त की हाजत बिल्कुल न हो तो इसे नहीं देना चाहिए. डॉ० कार्टियर के मतानुसार कब्ज दूर करने के लिए ‘नक्स’ को निम्नक्रम में तथा बार-बार देना वर्जित है. इसका प्रयोग उच्च-शक्ति में ही करना चाहिए.
मर्क-डलसिस 1x वि० – यदि पाखाना न आता हो तथा उसे लाना आवश्यक हो तो इस औषधि को 2 से 3 ग्रेन की मात्रा में हर एक घंटे बाद देते रहने से पाखाना आकर पेट साफ हो जाता है, परन्तु इसे उचित होमियो-चिकित्सा नहीं माना जाता है.
ब्रायोनिया 6, 30, 200- सिरदर्द, यकित में दर्द, सिहरन का अनुभव, वात से उत्पन्न कब्ज, गर्भावस्था एवं गर्मी के दिनों का कब्ज, बच्चों का कब्ज, सूखा-बड़ा-लंबा लेंड़ एवं आंतों का काम न करना – आदि लक्षणों में यह दवा कारगर है. इस औषधु का रोगी गरम प्रकृति का होने के कारण सूर्य की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाता. नक्स तथा ब्रायोनिया में यह अंतर है कि पाखाने की बारंबार हाजत होना नक्स का लक्षण है तथा पाखाने की हाजत न होना ब्रायोनिया का लक्षण है.
ग्रैफाइटिस 6, 30- यदि मल बड़ा तथा निकलने में कष्ट देता हो तो इस दवा को दिन में दो बार के हिसाब से कई महीने सेवन करते रहना चाहिए. महिलाओं के मासिक धर्म में विलंब होने के साथ ही लंबा, गांठों अथवा गोलियों वाला मल हो तथा उस पर आंव चिपकी हो, जो कठिनाई से निकले तथा कई दिनों तक पाखाना न आता हो, तो इस औषधि का उपयोग लाभकारी है
प्लम्बम 6- कब्ज के साथ शूल-वेदना हो तो इसका प्रयोग हितकर है.
ओपियम 30, 200- सिर में भारीपन, सिर में चक्कर आना, लगातार तंद्रा की स्थिति, चेहरे का लाल पड़ जाना, पेशाब कम मात्रा में होना, कुछ दिनों तक लगातार कोठा साफ न होना, आंखों का खुश्क होना, छोटी-छोटी कठोर काली तथा कठोर गोलियों की तरह मल निकले तो ये दवा फायदेमंद है.
हाईड्रैस्टिस Q, 2x,30- डॉ आर ह्यूजेज के मुताबिक कब्ज के लिए यह औषधि नक्स से भी अधिक लाभकारी है. सुबह नाश्ते से पूर्व इस दवा के मूल अर्क को 1बूंद की मात्रा में कई दिनों तक सेवन कीजिए, तो कब्ज में निश्चित लाभ होगा. यदि रोगी को केवल कब्ज की ही शिकायत हो, तो नक्स की अपेक्षा इसे देना अधिक अच्छा है. 2x शक्ति में भी यह औषधि बहुत लाभ करती है.
सल्फर 30- बार-बार पाखाना करने जाना, पेट का पूरी तरह साफ न होना, गुदा द्वार में भारीपन और गर्मी लगना, खुलजी या अन्य तरह का चर्म रोग हो, बेहोशी आती हो तथा अत्यधिक कमजोरी महसूस होती है, तो यह दवा अत्यंत गुणकारी है.
सीपिया 30, 200- मल-द्वार में दर्द, पाखाना होने के बाद गुदा में डाट सी लगी हुई अनुभव होना तथा मुलायम टट्टी का भी कठिनाई से निकलना आदि लक्षणों में यह दवा लाभ करती है. किंतु ध्यान रहे यह दवा स्त्रियों के कब्ज में ज्यादा फायदा पहुंचाती है क्योंकि इसके कब्ज में जरायु संबंधी कई रोग भी शामिल होते हैं.
मैग्नेशिया-म्यूर 30- यह औषधि बच्चों के दांत निकलते समय कब्ज में हितकर है. बच्चों का बकरी के मैंगनी के समान बहुत थोड़ी टट्टी करना, जो कि गुदा के किनारे पर आकर टूट-टूट कर गिरती हो, तो यह दवा लाभ करती है. बड़े लोगों में ऐसी कब्ज प्रायः जिगर के रोगियों को होती है.
एल्युमिना 30, 200- बहुत तेज कब्ज, पाखाना जाने की इच्छा न होना, कई दिनों के बाद पाखाने के लिए जाना, पाखाना निकालने के लिए गुदा पर बहुत जोर लगाना तथा कांखना, नरम टट्टी का भी सरलता से न निकलना, सख्त, सूखी, छोटी तथा बकरी की लेंड़ी  के समान लाल, काली, काली एवं खुश्क टट्टी होना, जिसे निकालने के लिए गुदा में अंगुली डालनी पड़े- इन लक्षणों में यह औषधि विशेष लाभ करती है. इस तरह के कब्ज का मरीज आलू को हजम नहीं कर पाता.
एलू 30- एल्युमिना से विपरीत लक्षणों में यह औषधि लाभ करती है. हर समय टट्टी की हाजत बने रहना तथा अनजाने में ही सख्त टट्टी का निकल जाना- जैसे लक्षणों में इसका प्रयोग करना चाहिए
फास्फोरस 3, 30- खूब संकरा तथा लंबा लेड़ निकलने के लक्षण में यह लाभकारी है.
नेट्रम-म्यूर 12X वि 200- यह भी कब्ज की उत्तम दवा है. लगातार पाखाना लगना, परन्तु कोठे का साफ न होना, बड़ा तथा मोटा लेंड़ अत्यंत कष्ट से निकलना तथा थोड़ा सा पतला पाखाना भी होना, तलपेट में दबाव, सिर में भारीपन तथा अरुचि के लक्षणों में यह फायदेमंद है.  
लाइकोपोडियम 30- मुंह में पानी भर आना, पाखाने की हाजत होते हुए भी पाखाना न होना तथा बड़े कष्ट से सूखा तथा कड़ा मल थोड़ी मात्रा में निकलना, पेट में आवाज होना, पेट का फूल जाना तथा पेट में गर्मी का अनुभव होना आदि लक्षणों में लाभकारी है.

यहां हम कुछ होम्योपैथिक दवाइयां कब्ज के उपचार के और बता रहे हैं, जो लाभकारी होती है…
गरिकस ( Agaricus), ऐथूसा (Aethusa), अलुमन (Alumen), एलुमिना (Alumina),
ब्रयोनिआ अलबा (Bryonia alba),  एलो सोकोट्रिना (Aloe socotrina), ऐन्टिम क्रूड (Antim crude), असफ़ोइतिदा (Asafoitida),बाप्टेसिआ (Baptesia), कालकरिअ कार्ब (Calcaria carb), चाइना (China),
कोलिन्सोनिआ (Collinsonia), ग्रैफाइटिस (Graphites).
कौन-सी होमियोपैथ दवा किस तरह के कब्ज में फायदेमंद
1.बच्चों का मलावरोध : अल्युमिना 30,नक्सवोमिका 200,ब्रायोनिया – 30
2. रेचक या दस्तावर औषधियां : हाइड्रास्टिस 30,नक्सवोम 200 के दुरुपयोग के बाद कब्ज
3. अधिक खाने वालों का कब्ज : नक्स वोम, सल्फर
4. बैठे रहने की आदत के कारण मलावरोध : अलेट्रिस, कॉलिन्सोनिया, नक्सवोभिका (लगातार कई घंटों तक बैठना)
5. गर्भावस्था के दौरान कब्ज : सीपिया 30, पोडो 30
6. वृद्धावस्था में कब्ज : प्लाटि., एल्युमिना, ओपियम, ऐवेना
7. यात्रियों का कब्ज : एल्यु., हाइड्रास्टिस, नक्स वोम
8. आंतों और मलाशय की दुर्बलता के कारण कब्ज, दर्द निवारक और अन्य आंतों की दुर्बलता : इस्क्युलस 30, एलोज 30, अल्फा Q + , एवेना Q + अलेट्रिस Q 10-15 बूंद  सुबह-शाम एलोपैथिक औषधियों के सेवन से उत्पन्न भोजन के बाद.
9. बवासीर के कारण कब्ज : जो एंटासिड इस्क्यूलस, कॉलिंसोनिया आदि औषधियों के सेवन से उत्पन्न हुआ है.
10. नर्वस, संवेगशील दुर्बल एवं अम्लीय मनोवृति के कारण उत्पन्न मलावरोध : अंब्रा 30 और अर्जेटम नाइट्रिक 30 पर्यायक्रम से दिन में 2-3 बार
11. वर्षों से चला आ रहा जीर्णकालिक कब्ज (जल्दी थक अवसाद मानों मल आंतों के निचले भाग में जा रहा है, भोजन के बाद. आंतों की दुर्बल क्रमाकुचन (पेरिस्टालसिस) क्रिया : हाइड्रास्टिस 30, अलेट्रिस Q सुबह शाम.

हमने ऐसे किया इलाज, आइए जानें

हरिओम होमियो से कब्ज के हजारों मरीज अब तक ठीक हुए होंगे, लेकिन यहां मैं एक बड़े अफसर का विवरण दे रहा हूं, जो कई वर्षों से कब्ज से पीड़ित थे. उन्होंने एलोपैथी से लेकर आयुर्वेदिक यहां तक कि त्रिफला चूर्ण आदि का भरपूर सेवन किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. थक-हार कर अंततः मेरे पास आये तो मैंने उनके जिद्दी कब्ज को काफी जांचने-परखने के बाद इन दवाओं से ठीक किया.
मैंने उन्हें लाइकोपोडियम 200 एक दिन का अंतर देकर, हाइड्रास्टिस Q 5 बूंद सुबह-शाम भोजन के बाद दिया. इसके साथ रोग के स्थायी निवारण के लिए मुझे सल्फर 200 सप्ताह में एक खुराक देना पड़ा. करीब एक महीने के इलाज के बाद ही उनका जिद्दी कब्ज ऐसा भागा कि आज तक वो पूरी तरह स्वस्थ हैं.

matke ka panee

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एलर्जी का होमियोपैथिक उपचार

होमियोपैथिक औषधियों से लक्षणों की समानता के आधार पर अनेकानेक औषधियां प्रभावकारी रहती हैं.
  • खाद्य पदार्थों से एलर्जी होने पर ‘आर्सेनिक’ 30 शक्ति में व ‘नक्सवोमिका’ 30 शक्ति में.
  • तम्बाकू व धुएं से एलर्जी होने पर ‘इग्नेशिया’ 30 या 200 शक्ति में.
  • धूल से एलर्जी होने पर ‘ब्रोमीन’ 30 शक्ति में.
  • अत्यधिक छींक आने पर नाक टपकने पर ‘नेट्रमम्यूर’ 200 की एक खुराक व ‘एलियम सीपा’ 30 शक्ति में.
  • चेहरा लाल पड़ने पर ‘बेलाडोना’ 30 शक्ति में.
  • कीट-पतंगों से एलजीं होने पर ‘एपिस’ 30 शक्ति में.
  • शरीर पर पित्ती उछलने पर ‘डल्कामारा’ 30 शक्ति में .
  • सूजन आने पर ‘एपिस’ 30 शक्ति में.
  • शरीर पर चकत्ते पड़ने पर ‘आर्टिका यूरेंस’ औषधि मूल अर्क में लें. शैल फिश (एक प्रकार की मछली) खाने से होने वाली एलर्जी में भी यह लाभकारी है.