सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

EMPORTENT OF E

Very nice Message Received after Long Time. This is such a Beautiful message - -
Please do read it - 😃
The ...E... life !!!!!
In this world of E-mails, E-ticket, E-paper, E-recharge, E-transfer and the latest E-Governance...
Never Forget "E-shwar ( God )"
who makes e-verything e-asy for e-veryone e-veryday.
"E" is the most Eminent letter of the English alphabet.
Men or Women don't exist without "E".
House or Home can't be made without "E".
Bread or Butter can't be found without "E".
"E" is the beginning of "existence" and the end of "trouble."
It's not at all in 'war'
but twice in 'peace'.
It's once in 'hell' but twice in 'heaven'.
"E" represented in 'Emotions'
Hence, all emotional relations like Father, Mother, Brother, Sister,wife & friends have 'e' in them.
"E" also represents 'Effort' & 'Energy'
Hence to be 'Better' from good both "e" 's are added.
Without "e", we would have no love, life, wife, friends or hope
& 'see', 'hear', 'smell', or 'taste' as 'eye' 'ear', 'nose' & 'tongue' are incomplete without "e".
Finally no 'Life' & 'Death' without "e".
Hence GO with "E"
but without E-GO.

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

गिलोय बेल

हो सकता है आपने गिलोय की बेल देखी हो लेकिन जानकारी अभाव में उसे पहचान नहीं पाए हों. गिलोय बेल के रूप में बढ़ती है और इसकी पत्त‍ियां पान के पत्ते की तरह होती हैं. गिलोय की पत्त‍ियों में कैल्शि‍यम, प्रोटीन, फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा इसके तनों में स्टार्च की भी अच्छी मात्रा होती है.
गिलोय का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों में किया जाता है. ये एक बेहतरीन पावर ड्रिंक भी है. ये इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है, जिसकी वजह से कई तरह की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है.
गिलोय के इन फायदों को जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे:
1. अगर आपको एनीमिया है तो गिलोय के पत्तों का इस्तेमाल करना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. गिलोय खून की कमी दूर करने में सहायक है. इसे घी और शहद के साथ मिलाकर लेने से खून की कमी दूर होती है.
2. पीलिया के मरीजों के लिए गिलोय लेना बहुत ही फायदेमंद है. कुछ लोग इसे चूर्ण के रूप में लेते हैं तो कुछ इसकी पत्त‍ियों को पानी में उबालकर पीते हैं. अगर आप चाहें तो गिलोय की पत्त‍ियों को पीसकर शहद के साथ मिलाकर भी ले सकते हैं. इससे पीलिया में फायदा होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है.
3. कुछ लोगों को पैरों में बहुत जलन होती है. कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी हथेलियां हमेशा गर्म बनी रहती हैं. ऐसे लोगों के लिए गिलोय बहुत फायदेमंद है. गिलोय की पत्त‍ियों को पीसकर उसका पेस्ट तैयार कर लें और उसे सुबह-शाम पैरों पर और हथेलियों पर लगाएं. अगर आप चाहें तो गिलोय की पत्त‍ियों का काढ़ा भी पी सकते हैं. इससे भी फायदा होगा.
4. अगर आपके कान में दर्द है तो भी गिलोय की पत्त‍ियों का रस निकाल लें. इसे हल्का गुनगुना कर लें. इसकी एक-दो बूंद कान में डालें. इससे कान का दर्द ठीक हो जाएगा.
5. पेट से जुड़ी कई बीमारियों में गिलोय का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है. इससे कब्ज और गैस की प्रॉब्लम नहीं होती है और पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है.
6. गिलोय का इस्तेमाल बुखार दूर करने के लिए भी किया जाता है. अगर बहुत दिनों से बुखार है और तापमान कम नहीं हो रहा है तो गिलोय की पत्त‍ियों का काढ़ा पीना फायदेमंद रहेगा. यूं तो गिलोय पूरी तरह सुरक्षि‍त है फिर भी एक बार डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें. (Giloy) Tinospora cordifolia को विभिन्न रोगों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक औषधीय जड़ी बूटी है। यह औषधि कड़वी, कसैली, तीखी, और शक्ति में गर्म है। गिलोय कायाकल्प टॉनिक है और इसमें जिगर (लीवर) के फंक्शन में सुधार, त्रिदोष हटाने, प्रतिरक्षा में सुधार करने की क्षमता है। गिलोय एक दिव्य अमृत है जिसकी वजह से इसे अमृता कहा जाता है। गिलोय के सेवन से प्लेटलेट बढ़ते हैं व नए रक्त का निर्माण होता है।
गिलोय से निकाले स्टार्च को गिलोय या गुडूची सत्व कहा जाता है। इसे बनाने के लिए गिलोय के तने को इकठ्ठा करके, छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इसे फिर कूटा जाता है और पानी में रात भर के लिए भिगो दिया जाता है। सुबह इसे अच्छे से मसला जाता है जिससे स्टार्च निकल जाए। फिर इसे कपड़े से छान लिया जाता है और पानी को इकठ्ठा कर लिया जाता है। पानी को कुछ घंटे पड़ा रहने देते हैं और नीचे बैठे स्टार्च को अलग कर सुखा लेते हैं। Giloy सत्व या Guduchi सत्व को बुखार, लीवर की कमजोरी-रोग, प्रतिरक्षा और कमजोरी समेत अनेक रोगों में प्रयोग किया जाता है।
गिलोय सत्व को गुडूची सत्व, अमृता सत, गिलो सत आदि कई अन्य नामों से जाना जाता है। आइये जाने Benefits of giloy Satva
गिलोय (giloy)सत्व के लाभ
★ यह रसायन औषधि है।
★ यह त्रिदोष को कम करता है लेकिन वात-पित्त को अधिक कम करता है।
★ इसके सेवन से बढ़ा हुआ पित्त कम होता है जिससे एसिडिटी, पेट के अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस आदि में लाभ होता है।
★ यह शरीर में टोक्सिन को दूर करता है लेकिन शरीर में गर्मी या पित्त को नहीं बढ़ाता।
★ यह इम्यून सिस्टम को ताकत देने वाली औषध है।
★ यह बुखार और इन्फेक्शन वाले रोगों में बहुत लाभप्रद है।
★ यह शरीर से आम दोष को दूर करता है।
★ यह लीवर को ताकत देता है।
★ यह लीवर फंक्शन को ठीक करता है।
★ यह एंटीऑक्सीडेंट है।
★ यह जोड़ों के दर्द में लाभप्रद है।
★ यह त्वचा रोगों में भी फायदेमंद है क्योंकि गिलोय आम दोष और रक्तविकारों को दूर करने वाली दवा है।
★ इसे प्रमेह रोगों में लेना चाहिए।
★ यह हृदय को ताकत देता है और हृदय की अनियमित धड़कन में लाभप्रद है।
★ यह बार-बार आने वाले, पुराने, या निश्चित समय पर आने वाले बुखार को नष्ट करने की दवा है।
★ यह बुखार में लीवर की रक्षा करती है।
★ यह अपने मूत्रल और सूजन दूर करने के गुणों के कारण शरीर में सूजन को कम करती है।
★ यह बहुत प्यास लगना और मूत्र रोगों में फायदेमंद है।
★ यह बढ़े यूरिक लेवल, अपच, गैस, भूख न लगना, शरीर में जलन, पेशाब में जलन, प्रमेह रोग, लीवर रोगों आदि सभी में लाभप्रद है।
गिलोय(giloy) सत्व की खुराक
★ गिलोय सत्व को लेने की व्यस्कों के लिए 500 मिग्रा से लेकर 2 ग्राम है।
★ 5 वर्ष के अधिक उम्र के बच्चों को इसकी आधी मात्रा दी जा सकता है।
★ कुछ फार्मेसी इसे कैप्सूल के रूप में भी बेचती हैं, जिनके एक कैप्सूल में गिलोय सत्व की मात्रा 250 mg अथवा 500 mg की होता है। इस प्रकार के कैप्सूल को 1-2 कैप्सूल की मात्रा में ले सकते है।
★ गिलोय सत्व 500 मिग्रा + पिप्पली चूर्ण 250 मिग्रा + मिलाकर मधु के साथ दिन में 3 बार देते रहने से अग्निमांद्य एवं दाहयुक्त जीर्ण-ज्वर दूर हो जाता है।
★ पुरुषों के प्रमेह, धातु विकार, कमजोरी, किडनी की कमजोरी, आमदोष आदि में ताल मखाना 40 ग्राम + गिलोय सत्व 25 ग्राम + जायफल 25 ग्राम + मिश्री 100 ग्राम को अलग-अलग कूटकर कपड़छन चूर्ण बनाकर रख लें। इस चूर्ण को 1 टीस्पून की मात्रा में सुबह-शाम लें।
★ वीर्य को गाढ़ा करने के लिए, स्वप्नदोष में, मूत्र में जलन में इस चूर्ण को 125mg वंग भस्म और 125 mg प्रवाल पिष्टी के साथ लें।
★ बहुत पेशाब आने पर, गिलोय सत्व को 1 टीस्पून घी के साथ लें।
★ पेशाब में पस जाने पर, गोनोरिया में, गिलोय सत्व को एक गिलास दूध में मिश्री मिलाकर लें। इसे दिन में तीन बार लें।
★ गिलोय और गेहूं घास का रस मिश्रण प्लेटलेट बढ़ाने में मदद करता है। इसे एलो वेरा के जूस के साथ लेने पर भी प्लेटलेट बढ़ते हैं।
★ गिलोय सत्व को वात रोगों में घी के साथ; पित्त रोग में मिश्री और कफ रोग में शहद के साथ लेना चाहिए।
★ इसे खाने के पहले या बाद में, कभी भी ले सकते हैं।
सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side-effects/Contraindications
★ गर्भावस्था में कोई दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
★ इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
★ इसके मूत्रल गुण है।
★ यह रक्त में शर्करा के स्तर को कम करती है। इसलिए डायबिटीज में लेते समय शर्करा स्तर की अक्सर जांच करवाते रहें।
★ सर्जरी से दो सप्ताह पहले गिलोय का सेवन न करें।
★ गर्भावस्था में किसी भी हर्बल दवा का सेवन बिना डॉक्टर के परामर्श के न करें।
★ यदि आपको ताज़ा गिलोय उपलब्ध हो जाती हो तो उसे काढ़ा बना कर लें।

शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

चूना का प्रयोग से बच्चे से बुढ़े तक कभी बीमार नहीं होते करीब 70 बीमारियों को खत्म करने में अकेला ही काफी है।

परचून की दुकान पर आम मिलने वाला ‘चूना’ काफी गुणकारी है। आयुर्वेद विभाग के अधिकारियों की माने तो अकेले चूना का प्रयोग से बच्चे से बुढ़े तक कभी बीमार नहीं होते। आयुर्वेदिक औषधियों में इसे सबसे सस्ता माना जाता है। जो करीब 70 बीमारियों को खत्म करने में अकेला ही काफी है। 
भारतीय चिकित्सा परिषद के सदस्य डॉ. जितेंद्र गिल ने बताया कि मनुष्य के शरीर को सबसे ज्यादा कैल्शियम की जरुरत होती है। कैल्शियम को सबसे जल्दी और ज्यादा मात्रा में चूना ही दे सकता है। रुटीन में चूने का प्रयोग करने से फायदे हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी बीमारी से पीडि़त है तो उसे बीमारी के अनुसार चूना को लेना होगा। उन्होंने बताया कि चूना का एक टुकड़ा छोटे से मिट्टी के बर्तन मे डालकर पानी से भर दें। चूना गलकर नीचे चला जाएगा और पानी ऊपर होगा। इसका एक चम्मच पानी किसी भी खाने की वस्तु के साथ लेना है। 50 के उम्र के बाद कोई कैल्शियम की दवा शरीर मे जल्दी नहीं घुलती, जबकि चूना तुरंत घुल व पच जाता है।
गेहूं के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिला के खाना चाहिए। दही नहीं है तो दाल में मिला के खा सकते हैं। यदि दाल भी नहीं मिला तो पानी के साथ पी सकते हैं। लंबाई बढऩे के साथ स्मरण शक्ति भी बहुत बढ़ती है।
गर्भवती मां व उसके बच्चे के लिए लाभदायक
अनार के रस का एक कप में चूना को गेहूं के दाने के बराबर मिलाकर रोजाना पीने से गर्भवती मां व उसके बच्चे का स्वास्थ्य बना रहता है। ऐसा नौ महीने तक किया जाना चाहिए। ऐसा करने से गर्भवती महिला को बच्चे के जन्म के समय कोई तकलीफ नहीं होती। डिलीवरी भी नॉर्लम होती है।
इन बीमारियों में लाभदायक है चूना
डॉ. गिल ने कहा कि चूना से कई बीमारियों पर काबू पाया जा सकता हैं। इनमें घुटने का दर्द, पीलिया, कमर का दर्द, कंधे का दर्द, रीढ की हड्डी, मुंह में ठंडा-गरम लगना, मुंह में अगर छाले, शरीर में खून बढ़ाने, घुटने में घिसाव व पत्थरी को ठीक करने में लाभदायक है

बुधवार, 13 सितंबर 2017

कब्ज और पेट की गैस के 15 अचूक घरेलु उपाय :

कब्ज और पेट की गैस के 15 अचूक घरेलु उपाय :

  1. धनिया : धनिया कब्ज तोड़ने में भी सहायता करता है। धनिये के चूर्ण से पुराना से पुराना कब्ज भी दूर हो जाता है। इसके लिए 50 ग्राम धनिया, 10 ग्राम सोंठ, 2 चुटकी कालानमक तथा 3 ग्राम हरड़ लेकर सभी चीजों को कूट पीसकर कपड़े से छानकर रख लेना चाहिए। इस चूर्ण को थोड़ी सी मात्रा में भोजन करने के बाद गुनगुने पानी से लें। इससे कब्ज नष्ट होता है और मल भी खुलकर आने लगता है। इससे पेट का दर्द भी कम हो जाता है और आंतों की खुश्की भी दूर हो जाती है। इससे भूख खुलकर आती है। मलावरोध समाप्त हो जाता है। यदि पुराना कब्ज हो तो इस चूर्ण को लगातार 40 दिनों तक लेना चाहिए।कब्ज न रहने पर भी यह चूर्ण लिया जा सकता है। इससे किसी भी प्रकार की हानि की संभावना नहीं होती है।
  2. त्रिफला (छोटी हरड़, बहेड़ा तथा आंवला) : त्रिफला का चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में लेकर हल्के गर्म पानी के साथ रात को सोते समय लेने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) समाप्त होती है।
  3. अजवायन : अजवायन 10 ग्राम, त्रिफला 10 ग्राम और सेंधानमक 10 ग्राम को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर चूर्ण बना लें। रोजाना 3 से 5 ग्राम इस चूर्ण को हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से काफी पुरानी कब्ज समाप्त हो जाती है।
  4. मुनक्का : रोजाना प्रति 10 मुनक्का को गर्म दूध में उबालकर सेवन करने से लाभ मिलता है।
  5. आंवला : सूखे आंवले का चूर्ण रोजाना 1 चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद  ने से लाभ होता हैं। या फिर 1 चम्मच आंवले का चूर्ण शहद के साथ रात में लें।
  6. गिलोय : गिलोय का मिश्रण या चूर्ण 1 चम्मच गुड़ के साथ खाने से कब्ज दूर होती है।
  7. लहसुन : पेट में गैस बनने पर सुबह 4 कली लहसुन की खाये इससे पाचन शक्ति बढ़ती है और गैस दूर होती है।
  8. देशी घी : देशी घी में कालीमिर्च मिलाकर गर्म दूध में घी के साथ पीने से आंतों में रुका मल नरम और ढीला हो करके बाहर निकल जाता है।
  9. दूध : 250 मिलीलीटर गाय का दूध, 250 ग्राम पानी और 5 कालीमिर्च साबुत लेकर आग पर चढ़ा दें और जब पानी जल जाये, तब उतारकर छान लें। इसमें मिश्री मिलाकर पीने से वायुगोला अर्थात गैस का दर्द मिट जाता है।
  10. मुलहठी : मुलहठी 5 ग्राम को गुनगुने गर्म दूध के साथ सोने से पहले पीने से सुबह शौच साफ आती है।
  11. नीम : नीम के सूखे फल को रात में गर्म पानी के साथ खाने से शौच खुलकर आती है।
  12. ईसबगोल : ईसबगोल 6 ग्राम को 250 मिलीलीटर गुनगुने दूध के साथ सोने से पहले पी लें। कभी-कभी ईसबगोल की भूसी लेने से पेट फूल जाता है। ऐसा बड़ी आंतों में ईसबगोल पर बैक्टीरिया के प्रभाव से पैदा होने वाली गैस से होता है। इसलिए ध्यान रखें कि ईसबगोल की मात्रा कम से कम ही लें, क्योंकि ईसबगोल आंतों में पानी को सोखती है, जिससे मल की मात्रा बढ़ती है और मल की मात्रा बढ़ने से आंतों की कार्यशीलता बढ़ जाती है, जिससे मल ठीक से बाहर निकल आता है। ईसबगोल लेने के बाद दो-तीन बार पानी पीना चाहिए। इससे ईसबगोल अच्छी तरह फूल जाता है। इसलिए ईसबगोल रात को ही लेना चाहिए और खाने के तुरंत बाद लें।
  13. सौंफ :  सौंफ 50 ग्राम, कालानमक 10 ग्राम, कालीमिर्च 5 ग्राम को कूटकर छान लें। सुबह-शाम इसे 5-5 ग्राम खाना खाने के बाद गर्म पानी के साथ लेने से लाभ होता है। या  सौंफ का चूर्ण रात को खाकर ऊपर से पानी पीने से कब्ज दूर होती है।
  14. अंजीर : अंजीर 5 से 6 पीस को 250 मिलीलीटर पानी में उबाल लें, पानी को छानकर पीने से कब्ज में राहत मिलती है।
  15. नींबू : नींबू का रस, 5 मिलीलीटर अदरक का रस और 10 ग्राम शहद मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से कब्ज नष्ट होती है।

क़ब्ज़ से बचने के लिए कैसा भोजन करे :
दालों में मूंग और मसूर की दालें, सब्जियों में कम से कम मिर्च-मसालें डालकर परवल, तोरई, टिण्डा, लौकी, आलू, शलजम, पालक और मेथी आदि को खा सकते हैं। आधे से ज्यादा चोकर मिलाकर गेहूं तथा जौ की रोटी खाएं। भूख से एक रोटी कम खाएं। अमरूद, आम, आंवला, अंगूर, अंजीर, आलूचा, किशमिश, खूबानी और आलूबुखारा, चकोतरा और संतरे, खरबूजा, खीरा, टमाटर, नींबू, बंदगोभी, गाजर, पपीता, जामुन, नाशपाती, नींबू, बेल, मुसम्मी, सेब आदि फलों का सेवन करें। दिन भर में 6-7 गिलास पानी अवश्य पीयें। मूंग की दाल की खिचड़ी खायें। फाइबर से बने खाने की चीजें का अधिक मात्रा में सेवन करें, जैसे- फजियां, ब्रैन (गेहूं, चावल और जई आदि का छिलका), पत्ते वाली सब्जियां, अगार, कुटी हुई जई, चाइनाग्रास और ईसबगोल आदि को कब्ज से परेशान रोगी को खाने में देना चाहिए।

क़ब्ज़ में परहेज़ :

तले पदार्थ, अधिक मिर्च मसाले, चावल, कठोर पदार्थ, खटाई, रबड़ी, मलाई, पेड़े आदि का सेवन न करें। कब्ज दूर करने के लिए हल्के व्यायाम और टहलने की क्रिया भी करें। पेस्ट्रियां, केक और मिठाइयां कम मात्रा में खानी चाहिए।

शनिवार, 5 अगस्त 2017

आँखों की देखभाल के कुछ उपाय

आँखों की देखभाल के कुछ उपाय
कम उम्र में चश्मा लग जाना आजकल एक सामान्य सी बात है। इस समस्या से जुझ रहे लोग इसे मजबूरी मानकर हमेशा के लिए अपना लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि अगर किसी कारण से एक बार चश्मा लग जाए तो वह उतर नहीं सकता। चश्मा लगने का सबसे प्रमुख कारण आंखों की ठीक से देखभाल न करना, पोषक तत्वों की कमी या अनुवांशिक हो सकते हैं। इनमें से अनुवांशिक कारण को छोड़कर अन्य कारणों से लगा चश्मा सही देखभाल व खानपान का ध्यान रखने के साथ ही देसी नुस्खे अपनाकर उतारा जा सकता है।आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही घरेलू नुस्खे जो आंखों की समस्या में रामबाण की तरह काम करते हैं....
- पैर के तलवों पर सरसों के तेल की मालिश करके सोएं। सुबह के समय नंगे पैर हरी घास पर चलें व नियमित रूप से अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें आंखों की कमजोरी दूर हो जाएगी।
- एक चने के दाने जितनी फिटकरी को सेंककर सौ ग्राम गुलाबजल में डालें और रोजाना रात को सोते समय इस गुलाबजल की चार-पांच बूंद आंखों में डाले साथ पैर के तलवों पर घी की मालिश करें इससे चश्में के नंबर कम हो जाते हैं।
- आंवले के पानी से आंखें धोने से या गुलाबजल डालने से आंखें स्वस्थ रहती है।
- बादाम की गिरी, बड़ी सौंफ व मिश्री तीनों को समान मात्रा में मिला लें। रोज इस मिश्रण को एक चम्मच मात्रा में एक गिलास दूध के साथ रात को सोते समय लें।
- बेलपत्र का 20 से 50 मि.ली. रस पीने और 3 से 5 बूंद आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी रोग में आराम होता है।

- आंखों के हर प्रकार के रोग जैसे पानी गिरना , आंखें आना, आंखों की दुर्बलता, आदि होने पर रात को आठ बादाम भिगोकर सुबह पीस कर पानी में मिलाकर पी जाएं।
- कनपटी पर गाय के घी की हल्के हाथ से रोजाना कुछ देर मसाज करने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है।
- रात्रि में सोते समय अरण्डी का तेल या शहद आंखों में डालने से आंखों की सफेदी बढ़ती है।
- नींबू एवं गुलाबजल का समान मात्रा का मिश्रण एक-एक घण्टे के अंतर से आंखों में डालने से आखों को ठंडक मिलती है। हैं।
- त्रिफला चूर्ण को रात्रि में पानी में भीगोकर, सुबह छानकर उस पानी से आंखें धोने से नेत्रज्योति बढ़ती है।
- लघुपाठा नामक लता के पत्तियों के रस को भी नेत्र रोगों में प्रयोग कराने का विधान है।
- रोजाना दिन में कम से कम दो बार अपनी आंखों पर ठंडे पानी के छींटे जरूर मारें। रात को त्रिफला (हरड़, बहेड़ा व आंवला) को भिगोकर सुबह उस पानी से आंखे धोने से आंखों की बीमारियां दूर होती है व ज्योति बढ़ती है।

- एक चम्मच पानी में एक बूंद नींबू का रस डालकर दो-दो बूंद करके आंखों में डालें। इससे आंखें स्वस्थ रहती है।
- आंखों पर चोट लगी हो, जल गई हो, मिर्च मसाला गिरा हो, कोई कीड़ा गिर गया हो, आंख लाल हो, तो दूध गर्म करके उसमें रूई का फुआ डालकर ठंडा करके आंखों पर रखने से लाभ होता है।
- 1से 2 ग्राम मिश्री तथा जीरे को 2 से 5 ग्राम गाय के घी के साथ खाने से एवं लेंडीपीपर को छाछ में घिसकर आंखों में लगाने से रतौंधी में फायदा होता है।
- ठंडी ककड़ी या कच्चे आलू की स्लाइस काटकर दस मिनट आंखों पर रखें। पानी अधिक पीएं। पानी कमी से आंखों पर सूजन दिखाई देती हैं। सोने से 3 घंटे पहले भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से आंखे स्वस्थ रहती हैं।
- गुलाब जल का फोहा आंखों पर पर एक घंटा बांधने से गर्मी से होने वाली परेशानी में तुरंत आराम मिल जाता है 
- श्याम तुलसी के पत्तों का दो-दो बूंद रस 14 दिन तक आंखों में डालने से रतौंधी रोग में लाभ होता है। इस प्रयोग से आंखों का पीलापन भी मिटता है।
- केला, गन्ना खाना आंखों के लिए हितकारी है। गन्ने का रस पीएं। एक नींबू एक गिलास पानी में पीते रहने से जीवन भर नेत्र ज्योति बनी रहती है।
- हल्दी की गांठ को तुअर की दाल में उबालकर, छाया में सुखाकर, पानी में घिसकर सूर्यास्त से पूर्व दिन में दो बार आंख में काजल की तरह लगाने से आंखों की लालिमा दूर होती है व आंखें स्वस्थ रहती हैं।
- सुबह के समय उठकर बिना कुल्ला किये मुंह की लार (Saliva) अपनी आँखों में काजल की भाँती लगायें. लगातार ६ महीने करते रहने पर चश्मे का नंबर कम हो जाता है.