रविवार, 28 फ़रवरी 2021

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बुधवार, 24 फ़रवरी 2021

गेंदा की खेती....

 कमाइए प्रति एकड़ 5 से 7 लाख रुपये

गेंदा 🌼🌼 की खेती......
🏵️🌺🌻🌼🌷🏵️🥀🌺🌻🌼🌷🌻🌻🌼🌼
प्रति एकड़ पौधे लगभग 15000
पौधे से पौधे की दूरी 2 फ़ीट
लाइन से लाइन की दूरी 2 से 2.5 फ़ीट
प्रति पौधा उत्पादन लगभग 3.5 किलोग्राम
भारत में पुष्प व्यवसाय में गेंदा का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि इसका धार्मिक तथा सामाजिक अवसरों पर वृहत् रूप में व्यवहार होता है। गेंदा फूल को पूजा अर्चना के अलावा शादी-ब्याह, जन्म दिन, सरकारी एवं निजी संस्थानों में आयोजित विभिन्न समारोहों के अवसर पर पंडाल, मंडप-द्वार तथा गाड़ी, सेज आदि सजाने एवं अतिथियों के स्वागतार्थ माला, बुके, फूलदान सजाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है। गेंदा के फूल का उपयोग मुर्गी के भोजन के रूप में भी आजकल बड़े पैमाने पर हो रहा है। इसके प्रयोग से मुर्गी के अंडे की जर्दी का रंग पीला हो जाता है, जिससे अण्डे की गुणवत्ता तो बढ़ती ही है, साथ ही आकर्षण भी बढ़ जाता है।
गेंदा के औषधीय गुण
अपनी औषधीय गुणों के कारण गेंदा का एक खास महत्व है। गेंदा के औषधीय गुण निम्नलिखित हैं-
कान दर्द में गेंदा के हरी पत्ती का रस कान में डालने पर दर्द दूर हो जाता है। खुजली, दिनाय तथा फोड़ा में हरी पत्ती का रस लगाने पर रोगाणु रोधी का काम करती है। अपरस की बीमारी में हरी पत्ती का रस लगाने से लाभ होता है। अन्दरूनी चोट या मोच में गेंदा के हरी पत्ती के रस से मालिश करने पर लाभ होता है।
साधारण कटने पर पत्तियों को मसलकर लगाने से खून का बहना बन्द हो जाता है।
फूलों का अर्क निकाल कर सेवन करने से खून शुद्ध होता है।
ताजे फूलों का रस खूनी बवासीर के लिए भी बहुत उपयोगी होता है।
गेंदा की खेती के लिए भूमि
गेंदा की खेती के लिए दोमट, मटियार दोमट एवं बलुआर दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है जिसमें उचित जल निकास की व्यवस्था हो ।
भूमि की तैयारी
भूमि को समतल करने के बाद एक बार मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 बार देशी हल या कल्टीवेटर से जुताई करके एवं पाटा चलाकर, मिट्टी को भुरभुरा बनाने एवं ककर पत्थर आदि को चुनकर बाहर निकाल दें तथा सुविधानुसार उचित आकार की क्यारियाँ बना दें।
व्यवसायिक किस्में
अधिक ऊपज लेने के लिए परम्परागत किस्मों की जगह केवल सुधरी किस्में ही बोनी चाहिए। गेंदा की कुछ प्रमुख उन्नत किस्में निम्न हैं -
1. अफ्रिकन गेंदा
इसके पौधे अनेक शाखाओं से युक्त लगभग 1 मीटर तक ऊँचे होते हैं, इनके फूल गोलाकार, बहुगुणी पंखुड़ियों वाले तथा पीले व नारंगी रंग का होता है। बड़े आकार के फूलों का व्यास 7-8 सेमी. होता है। इसमें कुछ बौनी किस्में भी होती हैं, जिनकी ऊँचाई सामान्यत: 20 सेमी. तक होती है। अफ्रिकन गेंदा के अन्तर्गत व्यवसायिक दृष्टिकोण से उगाये जाने वाले प्रभेद-पूसा नारंगी, पूसा वसन्तु अफ्रिकन येलो इत्यादि है।
2. फ्रांसीसी गेंदा
इस प्रजाति की ऊँचाई लगभग 25-30 सेमी. तक होती है इसमें अधिक शाखायें नहीं होती हैं किन्तु इसमें इतने अधिक पुष्प आते हैं कि पूरा का पूरा पौधा ही पुष्पों से ढँक जाता है। इस प्रजाति के कुछ उन्नत किस्मों में रेड ब्रोकेट, कपिड येलो, बोलेरो, बटन स्कोच इत्यादि है।
खाद एवं उर्वरक
गेंदा की अच्छी ऊपज है तो खेत की तैयारी से पहले 200 क्विंटल कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर की दर से मिट्टी में मिला दें । तत्पश्चात 120-160 किलो नेत्रजन, 60-80 किलो फास्फोरस एवं 60-80 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग प्रति है क्टेयर की दर से करें। नेत्रजन की आधी मात्रा एवं फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा खेत की अन्तिम जुताई के समय मिट्टी में मिला दें। नेत्रजन की शेष आधी मात्रा पौधा रोप के 30-40 दिन के अन्दर प्रयोग करें।
गेंदा का प्रसारण
गेंदा का प्रसारण बीज एवं कटिंग दोनों विधि से होता है इसके लिए 300-400 ग्राम बीज प्रति है क्टर की आवश्यकता होती है जो 500 वर्ग मीटर के बीज शैय्या में तैयार किया जाता है, बीज शैय्या में बीज की गहराई 1 सेमी. से अधिक नहीं होना चाहिए। जब कटिंग द्वारा गेंदा का प्रसारण किया जाता है उसमें ध्यान रखना चाहिए कि हमेशा कटिंग नये स्वस्थ पौधे से लें जिसमें मात्र 1-2 फूल खिला हो, कटिंग का आकार 4 इंच (10 सेमी) लम्बा होना चाहिए। इस कटिंग पर रूटेक्स लगाकर बालू से भरे ट्रे में लगाना चाहिए। 20-22 दिन बाद इसे खेत में रोपाई करना चाहिए। रोपाई : गेंदा फूल खरीफ, रबी, जायद तीनों सीजन में बाजार की मांग के अनुसार उगाया जाता है। लेकिन इसके लगाने का उपयुक्त समय सितम्बर-अक्टूबर है। विभिन्न मौसम में अलग-अलग दूरी पर गेंदा लगाया जाता है जो निम्न है
खरीफ (जून से जुलाई) – 60 x 45 सेमी.
रबी (सितम्बर–अक्टूबर) – 45 x 45 सेमी.
जायद (फरवरी-मार्च) – 45 x 30 सेमी.
सिंचाई
खेत की नमी को देखते हुए 5-10 दिनों के अन्तराल पर गेंदा में सिंचाई करनी चाहिए। यदि वर्षा हो जाय तो सिंचाई नहीं करना चाहिए।
पिंचिंग
रोपाई के 30-40 दिन के अन्दर पौधे की मुख्य शाकीय कली को तोड़ देना चाहिए। इस क्रिया से यद्यपि फूल थोड़ा देर से आयेंगे, परन्तु प्रति पौधा फूल की संख्या एवं ऊपज में वृद्धि होती है। निकाई-गुड़ाई लगभग 15-20 दिन पर आवश्यकतानुसार निकाई-गुड़ाई करनी चाहिए। इससे भूमि में हवा का संचार ठीक संग से होता है एवं वांछित खरपतवार नष्ट हो जाते हैं। रोपाई के 60 से 70 दिन पर गेंदा में फूल आता है जो 90 से 100 दिनों तक आता रहता है। अतः फूल की तोड़ाई साधारणतया सायंकाल में की जाती है। फूल को थोड़ा डंठल के साथ तोड़ना श्रेयस्कर होता है। फूल का कार्टून जिसमें चारों तरफ एवं नीचे में अखबार फैलाकर रखना चाहिए एवं ऊपर से फिर अखबार से ढँक कर कार्टून बन्द करना चाहिए।
कीड़े और बीमारी
लीफ हापर, रेड स्पाइडर, इसे काफी नुकसान पहुँचाते हैं। इसके रोकथाम के लिए मैलाथियान 0.1 प्रतिशत का छिड़काव करें।
गेंदा में मोजेक, चूर्णी फफूद एवं फूटराट मुख्य रूप से लगता है। मोजेक लगे पौधे को उखाड़कर मिट्टी तले दबा दें एवं गेंदा में कीटनाशक दवा का छिड़काव करें जिससे मोजेक के विषाणु स्थानान्तरित करने वाले कीट का नियंत्रण हो इसका विस्तार एवं दूसरे पौधे में न हो। चूर्णी फफूद के नियंत्रण है तो 0.2 प्रतिशत गंधक का छिड़काव करें एवं फुटराट के नियंत्रण है तो इण्डोफिल एम-45 0.25 प्रतिशत का 2-3 बार छिड़काव करें।
आपका मित्र अखिल ठाकुर , कानपुर, उत्तरप्रदेश
मोबाइल 9305908861, 7068777300

रविवार, 10 जनवरी 2021

आमला कैंडी

 आमला कैंडी सबको बहुत पसंद आती है. बिन मौसम के आवला का फायदा लेना हो तो आवला कैंडी से बेहतर कुछ नहीं हो सकता. मुरब्बे की तरह एक्स्ट्रा चीनी consume करने का डर भी नहीं है और लम्बे समय तक आसानी से preserve भी कर सकते है. अक्सर लोग बच्चों के लिए कैंडी लाते हैं लेकिन स्वादिष्ट होने के कारण ये बहुत जल्द ख़त्म हो जाती है . मार्केट में अक्सर पिछले सीजन की रखी हुई आमला कैंडी ही मिलती है. यदि इसे घर पर बनाया जाये तो ताज़ी उपलब्ध होगी और जेब पर भी भारी नहीं पड़ेगी.


#आवश्यक_सामग्री ----- आंवला - 1 किलोग्राम , चीनी - 700 ग्राम

#विधि ----- (1) आवले ठीक से साफ़ करके उबलते पानी में डाल दें पानी इतना ही रखें की आवले केवल डूब जाएँ. जब आंवले ठीक से पक कर उनकी फांके फटने लगे तो आंच बंद करके आवलों को बाहर पानी से बाहर निकाल कर ठंडा होने दें.

(2) अब आंवलों को हल्का दबाकर उनके बीज निकाल दें.

(3) किसी स्टील के बर्तन में बीज निकाले हुए आंवले की फांके डालकर ऊपर से चीनी डाल दें. लगभग 12 घंटे बाद आप देखेंगे की सब चीनी घुल गयी है और आवले तैर रहे हैं. इसे अभी ऐसे ही पड़ा रहने दें.

(4) दो दिन बाद आप देखेंगे की आंवलों का आकार पहले से कुछ सिकुड़ गया है और वो बर्तन की तली में बैठ गए हैं.

(5) जब सारे आवले बर्तन की तली में बैठ जाएँ तो इन्हें किसी छन्नी की सहायता से छान लें और जब सारा पानी निकल जाये तो धूप में सुखा लें.

(6) धूप में इतना ही सुखाएं की आवले की ऊपरी सतह की नमी ख़त्म हो जाये ज्यादा सुखा देने से ये कड़े हो जाते हैं. अब दो तीन चम्मच चीनी और दो छोटी इलायची आपस में पीसकर इस पाउडर को सूखे हुए आवलों पर छिड़क कर ठीक से मिक्स कर लें. और कांच के बर्तन में सुरक्षित रख लें.

यदि चटपटी बनानी हो तो आधा चम्मच काला नमक तीन चम्मच चीनी चौथाई चम्मच काली मिर्च चौथाई चम्मच दालचीनी मिलाकर पीसें और इससे कोटिंग करें.

ज्यादा मात्रा में बनाये तो चीनी और आवले का अनुपात यही रखें. चीनी कम लेने से ठीक नहीं बनता और जल्दी खराब हो जाता है चीनी ज्यादा रखने से आवले का पानी ज्यादा निकल जाता है और बहुत कड़े बनते हैं.

बुधवार, 27 मई 2020

नगर परिषद बालोतरा में 5 करोड़, 1 लाख (501 लाख) का खुलेआम घोटाला

बदमाशी तेरा आसरा।
नगर परिषद बालोतरा में 5 करोड़, 1 लाख (501 लाख) का खुलेआम घोटाला।
नगर परिषद बालोतरा द्वारा जारी ई निविदा क्रमांक न.पा.बा. / ई - निविदा / 2020 / 15101 दिनांक 24.02.2020 ई निविदा आमंत्रण सूचना 1-14 / 2020 आमंत्रित की गई। जिस पर मैने तुरंत प्रभाव से रोक लगा कर विधिवत कार्यवाही हेतु DLB और NPB सभापति को पत्र लिखे। क्योंकि इसमें विस्तृत घोटाला होना स्पष्ट प्रतीत हो रहा है। नगर परिषद बालोतरा द्वारा 14 कार्यों जिसमे साफ - सफाई, अनुबंधन पर कर्मचारी रखना, घर - घर कचरा संग्रहण एवं मैने विद मशीन कार्य कि एक निविदा क्रमांक न.पा.बा. / ई - निविदा / 2020 / 15101 दिनांक 24.02.2020 ई निविदा आमंत्रण सूचना 1-14 / 2020 जिसका कुल मूल्य 5 करोड़ , 1 लाख है, आमंत्रित की। जिसे दिनाक 27.03.2020 को खोली जानी थी लेकिन वैविश्वक महामारी कोविड -19 के चलते 17.05.2020 तक लॉकडाऊन के चलते आगे बढ़ा दी गई व दिनांक 18.05.2020 को दोपहर 01:00 तक निविदाएं मांगी गई है जिन्हे 20.05.2020 को सुबह 10 बजे खोली जानी थी। लेकिन हमारे द्वारा सभापति नगर परिषद बालोतरा श्रीमती सुमित्रा जैन को लिखे गए पत्र पर उन्होंने गौर कर दिनांक 19 मई 2020 को नगर परिषद आयुक्त को लेटर लिखकर जारी उपरोक्त निविदा निरस्त करने का आदेश जारी किया। क्योंकि उक्त निविदाओं के आमंत्रण मे शर्तों को पढ़ने पर साफ प्रतीत होता है कि आयुक्त, कार्यालय नगर परिषद बालोतरा अपने चहेते व्यक्ति देवाराम, रेडी संस्थान को यह ठेका देना चाहते है। इस निविदा में ऐसी-ऐसी आश्चर्यजनक शर्ते डाली गई है कि इस निविदा से कई ठेकेदार अपने आप ही बाहर हो गये तथा कुछ कॉन्ट्रैक्ट में हिंदुस्तान का कोई भी ठेकेदार पार्टिसिपेट नहीं कर सकता और अगर वह पार्टिसिपेट करता है तो वह असफल रहता है। जैसे कि इस निविदा में भाग लेने वाले ठेकेदार का 50 लाख का वार्षिक टर्न ओवर होना, ESI व PF का 3 वर्ष का चालाना होना, न्यूनतम 50/100 श्रमिकों को एक साथ लगाये हुऐ होने का अनुभवन होना, संबंधधित ठेकेदार का बालोतरा मे कार्यालय होना। इस प्रकार कुल 14 शर्ते रखी गयी है जिसकी कुल 100 नम्बर की एक अंक तालिका रची गई है। खास बात यह है कि 12 शर्तों के 100 मे से 2 व 3 नम्बर दिये तथा इसके अलावा 2 शर्तों के 30 व 40 नम्बर दिये जाने थे। यह निविदा आमंत्रित करने के पिछे आयुक्त, कार्यालय नगर परिषद बालोतरा का मकसद अपने उपरोक्त चहेते व्यक्ति को ठेका जारी कर भ्रष्टाचार करना रहा है। इस निविदा में खुले आम राजस्थान लोक उपापन मे पारदर्शिता अधिनियम 2012 का उल्घंन किया गया है। यह निविदा पारदर्शिता को खत्म करती है व करप्शन को बढ़ावा देती है, जनता का विश्वास खत्म करती है व बोली-दाताओं मे क्षेत्र के आधार पर भेद उत्पन कर व्यक्ति विशेष तथा पूर्व अर्हता को फायदा पहुंचाने वाली है। यह निविदा उक्त अधिकारी ने अपनी मन मर्जी से उक्त कानून को ताक पर रख कर जारी की है जो गैर कानूनी व अवैधानिक कृत्य है। उक्त निविदा दिनांक 20.05.2020 को खुलने वाली थी जिस पर तुरंत रोक लगा कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ विधिवत कार्यवाही करें व शर्तों को आसान, कॉमन व पारदर्शिता युक्त बनाने हेतु ताकी इसमे अन्य व्यक्ति/फर्मे भी भाग ले सकें। अन्यथा विधिक कार्यवाही की जायेगी, पत्र दिनांक 18 मई 2020 को डीएलबी एवं नगर परिषद बालोतरा की सभापति को लिखा।
इस रेडी संस्थान के राजस्थान मे लगभग 25 से 30 स्थानीय निकायों में ठेके चल रहे है तथा हर जगह करप्शन चल रहा है। रेडी के मालिक के साथ कई विधायक एवं मंत्री लोग भी शामिल हैं। मैं राजस्थान के सभी नागरिकों से अनुरोध करता हूं कि जिनकी जानकारी में जहां पर भी इस कॉन्टैक्टर के कॉन्ट्रैक्ट ध्यान में आए, उसके संबंध में आप मुझे अविलंब सूचित करें।
रेडी संस्थान को पिछले 2 वर्षों से यही टेंडर दिये जा रहा है तथा वर्ष 2019 में इस टेंडर को एक्सटेंड किया गया, जो पूर्णतया एक गैर कानूनी व अवैधानिक गतिविधि है, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा तथा वह इस कांड की सजा से बच नहीं सकते, किसी भी सूरत मे।
मजे की बात यह है कि इस निविदा के विज्ञापन तीन अखबारों में दिए गए थे 1.हिंदुस्तान टाइम्स, 2. तरुण राजस्थान एवं 3. दैनिक नवज्योति। जबकि बालोतरा के सबसे मोस्ट पॉपुलर अखबार दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका है। जिनमें इन्होंने इस निविदा की कोई विज्ञप्ति जारी नहीं की। यह कृत्य भी विधि का उल्लंघन है तथा इस पूरी प्रक्रिया मे कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई है।
अब आवाज उठी हैं तो दूर तलक जाएगी।
इस मामले मे मैं नगर परिषद बालोतरा की सभापति श्रीमती सुमित्रा जैन के साहस की मुक्त कंठ से प्रशंसा करता हूं कि उन्होंने बड़े व करप्ट लोगों से सीधी टक्कर ली है। मुझे लगता है कि इसमें वह विजयी होकर निकलेगी। उन्होने उचित समय पर उचित निर्णय ले कर अपनी काबिलियत का परिचय दिया है। इनका निर्णय करप्ट लोगों की कब्र खोदने के लिए पर्याप्त होगा। नगर परिषद बालोतरा की सभापति श्रीमती सुमित्रा जैन जिन्हें राजनीति का विस्तृत अनुभव नहीं होने के बावजूद ऐसे बोल्ड निर्णयों से उनमे जनता को एक अच्छे एवं काबिल लीडर के गुण नजर आ रहे है जो उन्हे बहुत ही आगे तक ले जाएंगे वह बालोतरा की जनता को न्याय एवं विकास मिलने की उम्मीद है। इन्होंने बहुत ही बोल्ड डिसीजन लिया है जो बालोतरा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

The contract value of the above service bid is Rs.


Respected sir

1.         With reference to service bid awarded against Id GEM/2020/B/558358 for hiring of 09 Nos Data Entry Operators at INS Dronacharya, Naval Base, Kochi

2.         The contract value of the above service bid is Rs. 25,68,133.62 for a period of one year.  The contract has been started from 14 May 20 for 09 Nos DEOs.  Request confirm what will be the vendor profit against the contract value.  On confirmation from buyer , they said it will be 0.01% of the contract value i.e Rs. 257/- only.

3.         As per your 0.01% calculation it comes only 257.00 for entire contract period of this bid value. In view of the above, it is requested that the company profit should be  realistic/ Justified. Where as while bidding the restriction has been imposed for endorsing the services charge which has been fixed as per GEM terms and conditions.

4.         Request your valuable guidance with respect to services charge/Admin profit against the contract value to be charged.

शनिवार, 2 मई 2020

khad factory

  सभी  किसान  भाइयों  एवं बागबानी  में  रूचि  रखने  बाले  सभी   साथियों नमस्कार को आज हम बात करेंगे
खाद  फैक्ट्री  की  जो मात्र 800  रूपये  में  तैयार  हो  जाती है  इसकी स्थापना  के  बाद  किसान  को  रासायनिक  खाद  की  जरूरत  ही  नहीं   पड़ेगी चौंक  गए  न आप  तो  पूरी  पोस्ट  अंत  तक  पढ़िए     हमें  सबसे  पहले     200  लीटर  छमता  का  एक ड्रम  लेना है  इसके  बाद  हमें  तीन  स्टॉपर लेने  है अब  ड्रम  में नीचे  से  एक फ़ीट  ऊपर  की  तरफ पहला  स्टॉपर  लगाना  है  दूसरा  स्टॉपर  ठीक  पहले  स्टॉपर  के  डेढ़  फ़ीट ऊपर   लगाना  है  और  तीसरा  स्टॉपर  पीछे  की  तरफ  ड्रम  की तली  से  सटा  कर  लगाना  है  जैसा  कि  चित्र  में  दिख  रहा  है  ये  सभी  सामान  किसी  हार्ड बेयर  की  दुकान  से  आसानी  से मिल जायेगा  |  लो   आपकी  खाद  फैक्ट्री  बन  कर  तैयार  हो गई |  अब  बात  करते  है  इस  खाद  फैक्ट्री  में  खाद  तैयार  कैसे  करेंगे   तो  उसकी  जान कारी  भी   जान  लीजये  सबसे  पहले  १ किलो ग्राम  देशी  गाय  का  गोबर   और  5  लीटर गऊ मूत्र  और  100  ग्राम  गुड़  को  एक   टब  में  मिक्स  करके  खाली  ड्रम  में  पलट  दें   आप  सोच  रहे  होंगे  कि  देशी  गाय  का  गोबर  ही  क्यों  ? इसका  कारण  है  देशी  नस्ल  के  गाय  के  गोबर  में उपयोगी  जीवाणु शीघ्रता  से  उत्पन्न  होते  है   |   उसके  बाद ड्रम  को पानी  से  ऊपर  तक  भर  दें   एक  लकड़ी  के  डंडे  से  इस  घोल  को  मिलाए |  ड्रम  को  किसी  मोटे  कपडे  या  बोरे  से  ढक  दे  जिससे  ड्रम  के अंदर कीट  पतंगे  आदि न   जा पाए  | तैयार  मिश्रण  को  24  घण्टे  तक ऐसे ही  छोड  दे | २४ घंटे  के बाद उपयोग  के लिए  बेहतरीन तरल  खाद  बन  कर  तैयार  हो गई |  अब  हम  अपनी  ज़रूरत   के  अनुसार इस  तरल खाद को
किसी भी  फ़सल  में  उपयोग  कर  सकते  है | यदि  हमें तरल  खाद  की  25  लीटर  या  उससे कम  मात्रा  की  आवश्कयता  है  तो ऊपर  बाले  स्टॉपर  को  खोल  कर तरल  खाद निकाल  सकते है | यदि  ज्यादा  मात्रा  की  आवश्कयता  है  तो  नीचे  के   स्टॉपर  का  प्रयोग  कर  सकते  है | अब  बात  करते  है तीसरे  स्टॉपर  की  जो  हमने   ड्रम  की तली  से  सटा  कर  लगाया  है |  इसका  काम  तली  में  जमा  जैविक  कचरे  को निकलने  के लिए  किय जाता  है | किसान  इस  तरल खाद  का  प्रयोग  प्रति सप्ताह   कर  सकते  है |  यदि ज्यादा   बार  भी  करते  तो  कोई  हानि नहीं  होगी | ये  तरल  खाद  पूरी  तरह  से प्राकृतिक है इसमें  नायट्रोजन , फास्फोरस, पोटॉश ,भरपूर  मात्रा  में  होने  के कारण   पौधे  के साथ साथ  जमीन  का भी  पोषण  करती  है | सबसे  बड़ी  बात  है  किसान  का बहुत  सारा  पैसा  बचेगा  और  समाज  को  जैविक उत्पाद  प्राप्त  होगें | पोस्ट  अच्छी लगे  तो  अधिक से अधिक   शेयर  करे जिससे  अधिक  से अधिक   किसानो  को   ये  जानकारी  प्राप्त  हो |  जय किसान  जय ग्राहक

बुधवार, 29 अप्रैल 2020

वाराणसी में दवाइयों की दुकानें

वाराणसी में
लोगों को दूध के अलावा किराना और दवाइयों की उपलब्धता होती रहे इसलिए प्रशासन ने दुकानों की लिस्ट और फोन नंबर भी जारी किया है। आप अपने इलाके की इन दुकानों में से किसी को फोन करके घर पर ही किराना-जनरल स्टोर का सामान या दवाइयां मंगा सकते हैं।
दवाइयों की दुकानें
1 रथयात्रा नीरज 6386870092
2 सिगरा चंदन 9140794310, 7905361811
3 अर्दली बाजार चंदन 8874051082, 7905361811
4 बड़ी बाजार शमीम 7007729851, 7652079656
5 सोनिया ज्ञान 7607790469, 9554312249
6 पहड़िया अरुण लाल 941526154
7 राजातालाब आशीष 9044076913
8 बाय पास रोड बड़ावर अमित 9956394398
9 मच्छोदरी बंटी 6387889466
10 कोरोटा लोहता जमुना पीडी पटेल 9984354714
11 महमूरगंज एस.के.गुप्ता 9616956657, 9336046422
12 चांदपुर चौराहा अनिल यादव 9415290686
13 औरंगाबाद रोहित 9140810915
14 भोजूबीर विजय अस्थाना 9458173941
15 अमरा चौराहा अरुण प्रजापति 8737987561
किराना-जनरल स्टोर की दुकानें
1 जितेंद्र पटेल 7668201367 सब्जियाँ और फल नवलपुर, बसही, लक्ष्मणपुर, खुशहालनगर-ए, खुशहाल नगर-बी, परमानंद, नटिनियादाई
2 विनोद सोनकर 7236897007 सब्जियां और फल नवलपुर, खुशलानगर, लक्ष्मणपुर, चंदमारी, नटनीयादयी, परमानंद
3 विजय प्रकाश 9170616411 रोटी, बिस्किट, नमकीन कोटवा, मंगलपुर, बखरिया, कुरोता
4 पंकज शुक्ला 7398300120 रोटी, बिस्किट, नमकीन कोनिया, पीलीकोठी
5 सुरेश 9794688000 रोटी, बिस्किट, नमकीन सेनपुरा
6 शैल कुमार 9005283392 रोटी, बिस्किट, नमकीन लंका, भेलूपुर, कमच्छा
7 अपश केशरी 6307378030 रोटी, बिस्किट, नमकीन आडे, आडे बायपास
8 नवल किशोर सिंह 8799281134 रोटी, बिस्किट, नमकीन खेजवा, दशमी
9 महेंद्र कुमार 6306378718 रोटी, बिस्किट, नमकीन बजरडीहा, खोजवा
10 विजय सिंह 9936913670 रोटी, बिस्किट, नमकीन चंदमारी, बेसाई
11 दूधनाथ पटेल 7860718609 रोटी, बिस्किट, नमकीन मुलेठा, अयार बाजार
12 पवन कुमार 8052290109 रोटी, बिस्किट, नमकीन कमचा, सोनारपुरा, मदनपुरा,
13 महेंद्र मनवानी 9935283244 रोटी, बिस्किट, नमकीन खेजवा, कुरो, कबीर नगर
14 विजय कुमार विश्वकर्मा 9140330761 रोटी, बिस्किट, नामकेन चौखम्भी, भेरोनाथ
15 मुकेश मनवानी 9369099466 रोटी, बिस्किट, नमकीन कुवेरा, कबीर नगर, खुरवा, लंका
16 राकेश 9335601990 रोटी, बिस्किट, नमकीन विशेश्वरगंज, पीली कोठी
17 अनिल कुमार 8840177078 रोटी, बिस्किट, नमकीन सुसुवाही, महामनापुरी
18 आनंद 9307777634 बेसन सत्तू, चाय पत्ती सुसुवाही, सुंदरपुर, D.L.W, मंडुवाडीह, लहरतारा, महमूरगंज, Khojwa
19 उमेश यादव 9125660514 रोटी, बिस्किट, नमकीन कोनिया
20 संदीप कुमार 8115528346 रोटी, बिस्किट, नमकीन कंडवा, डी.एल.डब्लू।
21 प्यारेलाल 8808067333 रोटी, बिस्किट, नमकीन अवलेशपुर, बाईपास
22 असलम 9369737164 रोटी, बिस्किट, नमकीन नक्‍खी घाट
23 आनंद गुप्ता 8303244170 ब्रेड, बिस्किट, नमकीन सोरिया
24 सौकत मेय 9793215579 रोटी, बिस्किट, नमकीन बाचव, चुनार रोड
25 विकाश कुमार 7897968641 रोटी, बिस्किट, नमकीन माधव, बाईपास
26 आमोद कुमार 8887903827 रोटी, बिस्किट, नमकीन नतनियादाई
27 ध्रुव श्रीवास्तव 9455970769 टिफिन सेवा मैदागिन, दारानगर, अवासगंज, नाटी इमली, चेतगंज, मालदहिया
28 मिंटू 9450462052 रोटी, बिस्किट, नमकीन पीलीकोठी, बाड़ी बाजार
29 मुस्तकीम अहमद 9235887461 मेडिकल स्टोर आज़ाद पार्क
30 सरोज अहमद 7860086065 किराना व्यापारी आजाद पार्क
31 तोसीम 8418807606 मेडिकल स्टोर आज़ाद पार्क
32 ज़फ़र 9307855794 किराना व्यापारी आज़ाद पार्क
33 मोहम्मद सलीम 7651919901 किराना व्यापारी आजाद पार्क
34 फैसल जमाल 7007064898 किराना व्यापारी आजाद पार्क
35 जावेद अहमद 7652076176 मेडिकल स्टोर आज़ाद पार्क
36 वसीम अहमद 8573822133 मेडिकल स्टोर आज़ाद पार्क
37 दया शंकर 7084018762 रोटी, बिस्किट, नमकीन चितरानपुर, अनारबाड़ा
38 प्रमोद पाल 9140742763 दूध की दुकान चंदमारी, गिरधर नगर, परमानंदपुर, खुशहाल नगर, शीतलनगर, लोधन
39 शिवराज पटेल 9415243612 सब्जियां और फल बशी, खुशहालनगर, चंदमारी, नवलपुर, कृष्णापुरम, परमानंदपुर
40 विनोद पाल 8953870416 मिल्क स्टोर शीतल नगर, परमानंदपुर, खुशहाल नगर, चंदमारी
41 रोहित गौर 8858855929 रोटी, बिस्किट, नमकीन सारनाथ
42 आलोक अग्रहरी 7267960679 किराना व्यापारी मीरापुर, बसही, नवलपुर, खुशहाल नागर, नटनियादाई
43 शिवम कुमार सेठ 7607923714 रोटी, बिस्किट, नमकीन रघुनाथपुर, कपिलधारा
44 पवन अग्रवाल 7651814299 रोटी, बिस्किट, नमकीन सेनपुरा, बखराबाद, नाटी इमली, कामायनी कॉलोनी, नवापुरा
45 अतुल अग्रहरी 8299883320 रोटी, बिस्किट, नमकीन पंचकोशी
46 पिंटू कुमार 9628977567 रोटी, बिस्किट, नमकीन केमचा, बजरडीहा, खोजवा
47 अजय केशरी 8957237043 रोटी, बिस्किट, नमकीन नै सरक, काली महल, जादुमंडी, दशाश्वमेघ, गोदौलिया
48 पन्ना लाल यादव 8423741119 रोटी, बिस्किट, नमकीन अकेलवा, कोरौता, भरथरा, मोंगलपुर, कोटवा रोड
49 सत्यम मिश्रा 9559224410 रोटी, बिस्किट, नमकीन लोहता
50 विशाल यादव 8960924551 रोटी, बिस्किट, नमकीन सिगरा, एंगलिसिया लाइन
51 विवेक गुप्ता 8881477457 रोटी, बिस्किट, नमकीन लल्लापुरा, सोनिया
52 बबलू मौर्य 9580205396 ट्रॉली मैन पंचकोशी (चंदा - सराय)
53 अनिल कुमार 7275952452 रोटी, बिस्किट, नमकीन कैंट, मालदहिया
54 मुरारी गुप्ता 8790061485 रोटी, बिस्किट, नमकीन औरंगाबाद, लल्लापुरा
55 राजेश बिंद 6394457513 सब्जियां और फल रानीपुर, महमूरगंज
56 राजेश बिंद 9935719073 किराना व्यापारी और सब्जियां माधोपुर, सिगरा
57 लाल बाबू बिंद 6390669914 किराना व्यापारी रानीपुर, महमूरगंज
58 लव कुमार सोनी 9305955442 किराना व्यापारी और सब्जियां महमूरगंज, तुलसीपुर, निराला नगर
59 सोनू केशरी 9140173707 रोटी, बिस्किट, नमकीन महमूरगंज, निराला नगर, माधोपुर
60 राजकुमार होटवानी 7376641053 रोटी, बिस्किट, नमकीन सोनिया, महमूरगंज, मोहर्रिला
61 आनंद 9140146383 रोटी, बिस्कुट, नमकीन, रस्क, बढ़िया लल्लापुरा
62 गुनगीत सिंह फग्गा 7858090909 ब्रेड, फॉन, रस्क
साभार

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

एग्ज़मा


आज हम ए  रोग में प्रयोग  होने  बाली  प्रमुख दो  होमिओ पैथिक  दबायों  के  बारे  में  जानेगे जिनके  प्रयोग  से  आपको  अवश्य  लाभ होगा पहली  दबा  है स्वाबे  कम्पनी  की GRAPHITES PANTARKEN 
इसकी  2  गोली  दिन में  तीन  बार   दूसरी  दबा  है -PETROLIUM-30  इसकी  दो बूँद  मात्रा दिन में  तीन बार   ये दोनों   दबाएं  कम से कम एक  माह तक  ले त्वचा  पर   लगाने  के लिए नारियल  के  तेल में  बारीक  कपूर  मिला कर  लगाएं  खट्टी  चीजों  से  परहेज  रखे 

गर्दन दर्द

गर्दन दर्द   में  कारगर होमियोपैथी दबाएं
यू  तो  गर्दन  दर्द  के  कई  कारण  हो सकते है  लेकिन  हम बात करेंगे  कम्प्यूटर  लैपटॉप  मोबाइल फोन  और टीबी  पर  देररात  तक  देखने  के कारण  होने  बाले दर्द  की  अक्सर  देखने  में  आता  है  की  देररात  तक टीबी मोबाइल फोन  पर अधिक  समय  बिताने  के कारण  सुबह  उठने  पर  गर्दन   अकड़  जाती  है   गर्दन  घुमाने  पर  बहुत  दर्द  होता  है  इससे  बचने  का  कारगर  तरीका है इन  उपकरणों  का काम से  कम  उपयोग  करें
गर्दन की  कसरत  करें |   ARNICA- 30 की दो  दो बूँद  में  तीन  बार ,SPONDIN  ड्राप 15 -20  बूँद १/4  कप  गन गुने  पाने में  दिन में तीन  बार ले  शीघ्र  लाभ  के लिए RUMATONE  दर्द  नाशक  तेल  से  मालिश  करें   

गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

एसिडिटी

आज कल  अधिकांश  समय  घर  पर  ही व्यतीत  हो रहा है  ऐसे में घर में  तली भुनी  मासलेदार  बस्तुये अधिक  मात्रा में  सेवन  हो जाने  के कारण  एसिडिटी  ,अफरा खट्टी  डकारें  आने  की  शिक़ायत  हो जाती  है
जिसके  कारण  काफी  परेशानी  का सामना  करना  पड़ता  है  आज हम  कुछ होमियो  पैथी  दबायो  के बारे  में चर्चा  करेंगे  जिनके  सेवन से  आपको  अवश्य  लाभ  होगा
पहली  दवा  सीरफ  के  रूप में  है   DIGESTO ( H SLAB)  कंपनी का है  जिसकी   10 M.L की  मात्रा दिन में दो बार  खाना  खाने  के  एक  घंटे  बाद लेनी  है   दूसरी  दबा  NUX VOM  30  है  इसकी  दो बूँद  डयरेक्ट  जीभ  पर डालनी  है  दिन में तीन बार  इसके  अतरिक्त  एक दवा  है ROBINAI- 6CH इसकी   दो बूँद  डयरेक्ट  जीभ  पर डालनी  है  दिन में तीन बार   चार पांच  दिन के सेवन से अवश्य लाभ मिल जाएगा   कॉपी  पेस्ट  के लिए  अनुमति की  आवश्कयता  नहीं है    

रविवार, 29 दिसंबर 2019

किसान पुत्र ध्यान दें,

किसान पुत्र ध्यान दें, अपने अपने खेतों में जो जो भी हरी सब्जियां अपने यहाँ की जलवायु के अनुसार लगा सकते हो अवश्य ही लगाएँ, आवारा पशुओं से निज़ात पाने के लिए, ज़्यादा नही तो अपनी सब्जियां लगाने के लायक जगह में तार की जाली लगभग छः फ़िट ऊँची से कवर करें,,
बाज़ारों में बिकने वाली सब्जियां अधिकांश ज़हरीली होती है जिन्हें विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए तरह तरह की पेस्टिसाइड का भयंकर रूप से प्रयोग किया जाता है,
अधिक उत्पादन के लिए रासायनिक खादों का भी भरपूर उपयोग किया जाता है, ऐसे में जब भी बाज़ार से सब्जियां ख़रीदकर घर लाते हैं तो,, अपने साथ अपने घर सब्जियों के साथ साथ अनेकानेक प्रकार की बीमारियाँ भी अपने घर ले जाते हैं,,
जहाँ तक संभव हो सके अपने खेत में उगाई गई शुद्ध ऑर्गेनिक सब्जियों का भरपूर उपयोग करें और अपने घर परिवार के सदस्यों को होने वाली अनचाही बीमारियों से मुक्ति पाएँ,,
खानें में अधिकाधिक हरी सब्जियों का प्रयोग करें,, लहसुन का प्रयोग अवश्य करें इससे रक्त का गाढ़ापन घटता है,, मूली कैल्शियम का मुख्य शाकाहारी श्रोत है,, टमाटर पालक मैथी गाज़र चौलाई चुकंदर आदि समस्त प्रकार की वैरायटी अपने अपने खेतों में लगाएँ और आपस में आदान प्रदान भी करें,,
साथ ही यदि कोई अपने नज़दीकी मित्र रिश्तेदारों के यहाँ सब्जियाँ नहीं है तो उन्हें कोई और गिफ़्ट दें या ना दें लेकिन शुद्ध ऑर्गेनिक हरी सब्जियां अवश्य गिफ़्ट करें,,
याद रखिए परिवार के किसी एक व्यक्ति के बीमार होने पर जितना रुपया अस्पताल में खर्च होता है,, उतने रुपयों के ब्याज़ में अपने खेतों में सब्जियां उगाकर उसकी मज़बूत फेंसिंग की जा सकती है,,
शेष कुशल,,
आपका एक आभासी मित्र,,
,

गुरुवार, 30 मई 2019

शराब पीने की तीव्र इच्छा और लत को छुड़ाने की होम्योपैथिक दवा

यहाँ शराब पीने की तीव्र इच्छा और लत को छुड़ाने की होम्योपैथिक दवा के बारे में बताया जा रहा है।
क्वैर्कस ग्लैंडियम स्पिरिटस (Quercus Glandium spiritus)----
क्वैर्कस ग्लैंडियम स्पिरिटस बहुत ही कारगर दवाई है उन लोगों के लिए जो शराब अधिक पीते हैं और छोड़ना चाहते हैं। शराब के सेवन से आज काफी लोग प्रभावित हो रहे हैं और इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए यह पोस्ट लिखा गया है। क्वैर्कस ग्लैंडियम स्पिरिटस एक प्लांट किंगडम (Plant kingdom) की दवाई है। इस दवाई में ओक नामक फल का प्रयोग किया जाता है। यह दवाई शराब पीने की आदत छुड़ाने में मदद करती है।
शरीर पर क्वैर्कस ग्लैंडियम स्पिरिटस का असर----
जो लोग बहुत ज्यादा शराब का सेवन करते है, एक समय के बाद उनका spleen (तिल्ली) और लिवर खराब होने लगता है। लिवर में बहुत समस्याएं शराब के सेवन से होने लगती है और फैटी लिवर की समस्या भी हो जाती है। ये औषधि लिवर की इन सभी समस्याओं पर काम करती है। ये दवाई शराब पीने की इच्छा को कम करती है। साथ ही शराब के कारण शरीर में जो भी समस्याएं होती है उन्हें भी ये खत्म करती है।
शराब के हानिकारक प्रभाव----
शरीर के कारण लड़खड़ाहट होना, चक्कर आना, जी मिचलाना
spleen (तिल्ली) और लिवर की खराबी के कारण पाचन तंत्र में खराबी
तनाव का बढ़ना
कमजोरी और चक्कर आने के कारण चलने में समस्या
शराब पीने के कारण गठिया की समस्या
यदि आपको ये सब समस्या है और साथ ही शराब बहुत ज्यादा पीने लग गए हैं और बहुत कोशिश पर भी नहीं छूट रही तो आपको क्वैर्कस ग्लैंडियम स्पिरिटस का सेवन करना चाहिए।
दवा लेने की विधि :- क्वैर्कस ग्लैंडियम स्पिरिटस का सेवन दिन में तीन बार करना है। आधा कप पानी में इसकी 10 बून्द लेनी है और पीना है। इसका सेवन आपको 3 से 4 महीने करना है बेहतर रिजल्ट के लिए।
तिल्ली की समस्या के साथ शराब का सेवन----
अगर आपकी तिल्ली में समस्या है, वह बढ़ी हुई हैं साथ में आप शराब भी पीते हैं जिससे तिल्ली में और अधिक समस्या उत्पन्न हो गई हैं तो भी आप ऊपर बताई गई दवा के साथ Quercus Glandium 30 पोटेंसी की दो बून्द रात में सोने के पहले जीभ पर टपका लिया करें, इससे अच्छे रिजल्ट देखने को मिलेंगे।
साथ में Sulphur 200 की दो बून्द हर रविवार लेने से शराब के शरीर पर होने वाले असर में कमी आती है। इसका सेवन क्वैर्कस ग्लैंडियम (Quercus Glandium) 30 CH और क्वैर्कस ग्लैंडियम स्पिरिटस (Quercus Glandium spiritus) के साथ करना है।
तीनो दवा के सेवन से आपके शराब पीने की लत खत्म हो जाएगी, और धीरे-धीरे आपके सेहत में भी सुधार आने लगेगा।

रविवार, 21 अप्रैल 2019

कीकर (बबूल)विभिन्न रोगों में उपयोग :

कीकर (बबूल) पेड़ बड़े व घने होते हैं। ये कांटेदार होते हैं। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत होती है। बबूल के पेड़ पानी के निकट तथा काली मिट्टी में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इनमें सफेद कांटे होते हैं जिनकी लम्बाई 1 सेमी से 3 सेमी तक होती है। इसके कांटे जोड़े के रूप में होते हैं। इसके पत्ते आंवले के पत्ते की अपेक्षा अधिक छोटे और घने होते हैं। बबूल के तने मोटे होते हैं और छाल खुरदरी होती है। इसके फूल गोल, पीले और कम सुगंध वाले होते हैं तथा फलियां सफेद रंग की 7-8 इंच लम्बी होती हैं। इसके बीज गोल धूसर वर्ण (धूल के रंग का) तथा इनकी आकृति चपटी होती है।
विभिन्न भाषाओं में नाम :
संस्कृतबबूल, बर्बर, दीर्घकंटकाहिन्दीबबूर, बबूल, कीकरबंगालीबबूल गाछमराठीमाबुल बबूलगुजरातीबाबूलतेलगूबबूर्रम, नक दुम्मा, नेला, तुम्मापंजाबीबाबलाअरबीउम्मूछिलानफारसीखेरेमुधिलानतमिलकारुबेलअंग्रेजीएकेशियाट्रीलैटिनमाइमोसा अराबिका
गुण : बबूल कफ (बलगम), कुष्ठ रोग (सफेद दाग), पेट के कीड़ों-मकोड़ों और शरीर में प्रविष्ट विष का नाश करता है।
गोंद : यह गर्मी के मौसम में एकत्रित किया जाता है। इसके तने में कहीं पर भी काट देने पर जो सफेद रंग का पदार्थ निकलता है। उसे गोंद कहा जाता है।
मात्रा : इसकी मात्रा काढ़े के रूप में 50 ग्राम से 100 ग्राम तक, गोंद के रूप में 5 से 10 ग्राम तक तथा चूर्ण के रूप में 3 से 6 ग्राम तक लेनी चाहिए।
विभिन्न रोगों में उपयोग :
1. मुंह के रोगः
बबूल की छाल, मौलश्री छाल, कचनार की छाल, पियाबांसा की जड़ तथा झरबेरी के पंचांग का काढ़ा बनाकर इसके हल्के गर्म पानी से कुल्ला करें। इससे दांत का हिलना, जीभ का फटना, गले में छाले, मुंह का सूखापन और तालु के रोग दूर हो जाते हैं।
बबूल, जामुन और फूली हुई फिटकरी का काढ़ा बनाकर उस काढ़े से कुल्ला करने पर मुंह के सभी रोग दूर हो जाते हैं।
बबूल की छाल को बारीक पीसकर पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
बबूल की छाल के काढ़े से 2-3 बार गरारे करने से लाभ मिलता है। गोंद के टुकड़े चूसते रहने से भी मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
बबूल की छाल को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लें। मुंह के छाले पर इस चूर्ण को लगाने से कुछ दिनों में ही छाले ठीक हो जाते हैं।
बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में 2 से 3 बार गरारे करें। इससे मुंह के छाले ठीक होते हैं।
2. दांत का दर्द :
बबूल की फली के छिलके और बादाम के छिलके की राख में नमक मिलाकर मंजन करने से दांत का दर्द दूर हो जाता है।
बबूल की कोमल टहनियों की दातून करने से भी दांतों के रोग दूर होते हैं और दांत मजबूत हो जाते हैं।
बबूल की छाल, पत्ते, फूल और फलियों को बराबर मात्रा में मिलाकर बनाये गये चूर्ण से मंजन करने से दांतों के रोग दूर हो जाते हैं।
बबूल की छाल के काढ़े से कुल्ला करने से दांतों का सड़ना मिट जाता है।
रोजाना सुबह नीम या बबूल की दातुन से मंजन करने से दांत साफ, मजबूत और मसूढे़ मजबूत हो जाते हैं।
मसूढ़ों से खून आने व दांतों में कीड़े लग जाने पर बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर रोजाना 2 से 3 बार कुल्ला करें। इससे कीड़े मर जाते हैं तथा मसूढ़ों से खून का आना बंद हो जाता है।
3. वीर्य के रोग:
बबूल की कच्ची फली सुखा लें और मिश्री मिलाकर खायें इससे वीर्य रोग में लाभ होता है।
10 ग्राम बबूल की मुलायम पत्तियों को 10 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर पानी के साथ लेने से वीर्य-रोगों में लाभ होता है। अगर बबूल की हरी पत्तियां न हो तो 30 ग्राम सूखी पत्ती भी ले सकते हैं।
कीकर (बबूल) की 100 ग्राम गोंद भून लें इसे पीसकर इसमें 50 ग्राम पिसी हुई असगंध मिला दें। इसे 5-5 ग्राम सुबह-शाम हल्के गर्म दूध से लेने से वीर्य के रोग में लाभ होता है।
50 ग्राम कीकर के पत्तों को छाया में सुखाकर और पीसकर तथा छानकर इसमें 100 ग्राम चीनी मिलाकर 10-10 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ लेने से वीर्य के रोग में लाभ मिलता है।
बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और इसमें बराबर की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीस लेते हैं। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से पानी के साथ सेवन से करने से वीर्य गाढ़ा होता है और सभी वीर्य के रोग दूर हो जाते हैं।
बबूल के गोंद को घी में तलकर उसका पाक बनाकर खाने से पुरुषों का वीर्य बढ़ता है और प्रसूत काल स्त्रियों को खिलाने से उनकी शक्ति भी बढ़ती है।
बबूल का पंचांग लेकर पीस लें और आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से कुछ ही समय में वीर्य रोग में लाभ मिलता है।
4. बलवीर्य की वृद्धि : बबूल के गोंद को घी में भूनकर उसका पकवान बनाकर सेवन करने से मनुष्य के सेक्स करने की ताकत बढ़ जाती है।
5. वीर्य की कमी :
बबूल के पत्तों को चबाकर उसके ऊपर से गाय का दूध पीने से कुछ ही दिनों में गर्मी के रोग में लाभ होता है।
बबूल की कच्ची फलियों का रस दूध और मिश्री में मिलाकर खाने से वीर्य की कमी दूर होती है।
6. धातु पुष्टि के लिए : बबूल की कच्ची फलियों के रस में एक मीटर लंबे और एक मीटर चौडे़ कपड़े को भिगोकर सुखा लेते हैं। एक बार सूख जाने पर उसे दुबारा भिगोकर सुखा लेते है। इसी प्रकार इस प्रक्रिया को 14 बार करते हैं। इसके बाद उस कपड़े को 14 भागों में बांट लेते हैं, और रोजाना एक टुकड़े को 250 ग्राम दूध में उबालकर पीने से धातु की पुष्टि होती है।
7. स्तन : बबूल की फलियों के चेंप (दूध) से किसी कपड़े को भिगोकर सुखा लें। इस कपड़े को स्तनों पर बांधने से ढीले स्तन कठोर हो जाते हैं।
8. मासिक-धर्म संबन्धी विकार :
4.5 ग्राम बबूल का भूना हुआ गोंद और 4.5 ग्राम गेरू को एकसाथ पीसकर रोजाना सुबह फंकी लेने से मासिक-धर्म में अधिक खून का आना बंद हो जाता है।
20 ग्राम बबूल की छाल को 400 मिलीलीटर पानी में उबालकर बचे हुए 100 मिलीलीटर काढ़े को दिन में तीन बार पिलाने से भी मासिक-धर्म में अधिक खून का आना बंद हो जाता है।
लगभग 250 ग्राम बबूल की छाल को पीसकर 8 गुने पानी में पकाकर काढ़ा बना लेते हैं। जब यह काढ़ा आधा किलो की मात्रा में रह जाए तो इस काढ़े की योनि में पिचकारी देने से मासिक-धर्म जारी हो जाता है और उसका दर्द भी शान्त हो जाता है।
100 ग्राम बबूल का गोंद कड़ाही में भूनकर चूर्ण बनाकर रख लेते हैं। इसमें से 10 ग्राम की मात्रा में गोंद, मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करने से मासिक धर्म की पीड़ा (दर्द) दूर हो जाती है और मासिक धर्म नियमित रूप से समय से आने लगता है।
9. बांझपन दूर करना : कीकर (बबूल) के पेड़ के तने में एक फोड़ा सा निकलता है। जिसे कीकर का बांदा कहा जाता है। इसे लेकर पीसकर छाया में सुखाकर चूर्ण बना लेते हैं। इस चूर्ण को तीन ग्राम की मात्रा में माहवारी के खत्म होने के अगले दिन से तीन दिनों तक सेवन करें। फिर पति के साथ संभोग करे इससे गर्भ अवश्य ही धारण होगा।
10. प्रदर रोग :
14 से 28 मिलीलीटर बबूल की छाल का काढ़ा दिन में दो बार पीने से प्रदर रोग में लाभ होता है।
40 मिलीलीटर बबूल की छाल और नीम की छाल का काढ़ा रोजाना 2-3 बार पीने से प्रदर रोग में लाभ मिलता है।
2-3 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण और 1 ग्राम वंशलोचन दोनों को मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से प्रदर रोग मिट जाता है।
11. रक्तप्रदर : 5-5 ग्राम बबूल, राल, गोंद और रसौत को लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसे 5 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ रोजाना सेवन करने से रक्तप्रदर मिट जाता है।
12. योनि का संकुचन :
10 ग्राम बबूल की छाल को 400 मिलीलीटर पानी में पकायें। जब यह 100 मिलीलीटर की मात्रा में बचे तो इसे 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम पीने से और इस काढे़ में थोड़ी-सी फिटकरी मिलाकर योनि में पिचकारी देने से योनिमार्ग शुद्ध होता है और श्वेतप्रदर ठीक हो जाता है, इसके साथ ही योनि टाईट हो जाती है।
बबूल की 1 भाग छाल को लेकर उसे 10 भाग पानी में रातभर भिगोकर उस पानी को उबाल लेते हैं। जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर बोतल में भर लेते हैं। लघुशंका (शौचक्रिया) के बाद इस पानी से योनि को धोने से प्रदर एवं योनि शौथिल्य (ढीलापन) में लाभ मिलता है।
बबूल की फलियों के चेंप (दूध) से मोटे कपड़े को भिगोकर सुखा लें। सूख जाने फिर भिगोकर सुखायें। इस क्रिया को 7 बार तक करके सुखा लेते हैं। स्त्री-प्रसंग (संभोग) से पहले इस कपड़े के टुकड़ों को दूध या पानी में भिगोकर, दूध और पानी को पी लें तो इससे स्तम्भन (वीर्य का देर से निकलना) होता है। यदि इस कपड़े के टुकड़े को स्त्री अपनी योनि में रख ले तो भी योनि तंग हो जाती है।
बबूल, बेर, कचनार, अनार, नीलश्री को बराबर मात्रा में लेकर पानी में उबाल लें उसी समय उसमें कपड़ा डालकर भिगो लेते हैं। फिर उसमें पानी के छींटे दें और कपड़े को योनि में रखें इससे योनि सिकुड़ जाती है।
13. सूतिका रोग : 10 ग्राम बबूल की आन्तरिक छाल और 3 कालीमिर्च को एक साथ पीसकर, सुबह-शाम खाने से और पथ्य में सिर्फ बाजरे की रोटी और गाय का दूध पीने से भयंकर सूतिका रोग से पीड़ित स्त्रियां भी बच जाती है।
14. संतान : बबूल के पत्तों का 2-4 ग्राम चूर्ण रोजाना सुबह खिलाने से सुन्दर बालक का जन्म होगा।
15. अतिसार (दस्त) :
बबूल के पत्तों के रस में मिश्री और शहद मिलाकर पीने से अतिसार में लाभ मिलता है।
बबूल के 3-6 ग्राम कोमल पत्तों का चूर्ण दिन में दो बार लेने से अतिसार का रोग ठीक हो जाता है।
बबूल के 8 से 10 पत्तों का रस रोगी को पिलाने से अतिसार का रोग मिट जाता है।
बबूल की फलियों और कायफल के बीज का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए। इस काढ़े को पीने के बाद आप जितनी बार भी पान खाएंगे उतने बार ही दस्त होंगे। बबूल की 8-10 मुलायम पत्तियों को थोडे़ से जीरे और अनार की कलियों के साथ 100 मिलीलीटर पानी में पीस लें, फिर उस पानी में एक गर्म ईंट के टुकड़े को बुझाकर उस पानी को 2 चम्मच दिन में 2-3 बार रोगी को पिलाने से भयंकर अतिसार का रोग भी मिट जाता है।
50 ग्राम गोंद बबूल का, 100 ग्राम हरड़, 50 ग्राम पोस्ते की डोडी को पीसकर देशी घी में भूनकर रख लें, फिर इसमें 250 ग्राम मिश्री को मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम पीने से आंव का आना बंद हो जाता है। ध्यान रहें कि छाछ, दूध और चावल का सेवन करें।
बबूल की पत्तियों के रस को छाछ में मिलाकर रोगी को पिलाने से हर प्रकार के अतिसार में लाभ मिलता है।
बबूल के पेड़ के कोमल पत्तों को 5 ग्राम मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीसकर 150 मिलीलीटर पानी में मिलाकर एक दिन में 2 से 3 बार सेवन करने से अतिसार (दस्त) में लाभ मिलता है।
बबूल की गोंद को 3 ग्राम से लेकर 6 की मात्रा में दिन में सुबह और शाम पीने से अतिसार में लाभ होता है।
बबूल के 2 ग्राम पत्तों को पीसकर चीनी के साथ पीने से आंव (एक प्रकार का सफेद चिकना पदार्थ जो मल के द्वारा बाहर निकलता है) का आना बंद हो जाता है। बबूल के पत्तों को पीसकर पीने से अतिसार यानी दस्त में लाभ होता है।
बड़े बबूल के पत्तों का रस का सेवन करने से सभी प्रकार के अतिसार खत्म हो जाते हैं।
बबूल की दो फलियां खाकर ऊपर से छाछ (मट्ठा) पीने से अतिसार में लाभ मिलता है।
16. आंखों का दर्द एवं सूजन :
बबूल के नर्म पत्तों को पीसकर, रस निकालकर 1-2 बून्द आंख में टपकाने से अथवा स्त्री के दूध के साथ आंख पर बांधने से आंखों की पीड़ा और सूजन मिट जाती है।
बबूल के पत्तों को बारीक पीसकर उसकी टिकिया बनाकर रात को सोते समय आंख पर बांधने से आंखों का दर्द और जलन के रोग में लाभ मिलता है।
बबूल की पत्तियों को पीसकर टिकिया बनाकर रात को सोते समय आंखों पर बांध लें और सुबह खोल उठने पर खोल दें। इससे आंखों का लाल होना और आंखों का दर्द आदि रोग दूर हो जाते हैं।
17. आंखों से पानी बहना : बबूल के पत्ते को बारीक पीस लेते हैं। इसके बाद उसमें थोड़ा सा शहद मिला लें, फिर इसे काजल के समान आंखों पर लगाने से आंखों से पानी निकलना खत्म हो जाता है।
18. कंठपेशियों का पक्षाघात : बबूल की छाल के काढ़े से रोजाना दो बार गरारा करने से गले की शिथिलता समाप्त हो जाती है।
19. गले के रोग :
बबूल के पत्ते और छाल एवं बड़ की छाल सभी को बराबर मात्रा में मिलाकर 1 गिलास पानी में भिगो देते हैं। इस प्रकार तैयार हिम से कुल्ले करने से गले के रोग मिट जाते हैं।
बबूल के रस में कली का चूना मिलाकर चने के बराबर गोली बनाकर चूसने से सर्दी के कारण बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है।
बबूल की छाल को पानी में डालकर उबालकर इस पानी से गरारे करने से गले की सूजन दूर हो जाती है।
20. पेट के सभी रोगों में : बबूल की आन्तरिक छाल का काढ़ा बनाकर, उस काढ़े को 1-2 ग्राम की मात्रा में मट्ठे के साथ पीने से और पथ्य में सिर्फ मट्ठे का आहार लेने से जलोदर सहित सभी प्रकार के पेट के रोग ठीक हो जाते हैं।
21. पेट में पानी की अधिकता (जलोदर) : बबूल की छाल को पानी में अच्छी तरह से पकायें, फिर उसे उतारकर छान लें, फिर इस पानी को छानकर दूसरे बर्तन में डालकर दोबारा पकाकर गाढ़ा लेप बनाकर उतार लें और ठण्डा हो जाने पर उसे छाछ में मिलाकर पीने से जलोदर (पेट में पानी अधिक होना) के रोग में लाभ होता है। ध्यान रहें कि इसके सेवन के दौरान केवल छाछ (मट्ठे) का ही सेवन करें।
22. आमाशय का घाव : बबूल की गोंद पानी में घोलकर पीने से आमाशय (पेट) और आंतों के घाव तथा पीड़ा मिट जाती है।
23. पेट दर्द : बबूल की छाल का रस दही के साथ मिलाकर पीने से पेट के दर्द और दस्त में आराम मिलता है।
24. नहारू : बबूल के बीजों को पीसकर गाय के पेशाब के साथ मिलाकर पेट पर लेप करने से नहारू रोग में लाभ प्राप्त होता है।
25. हड्डी टूटने पर :
6 ग्राम बबूल की जड़ के चूर्ण को शहद और बकरी के दूध में मिलाकर पीने से तीन दिन में ही टूटी हुई हड्डी जुड़ जाती है।
6 ग्राम बबूल के पंचाग का चूर्ण शहद और बकरी के दूध में मिलाकर पीने से तीन दिन में ही टूटी हुई हड्डी जुड़ जाती है।
बबूल के बीजों को पीसकर तीन दिन तक शहद के साथ लेने से अस्थि भंग दूर हो जाता है और हडि्डयां वज्र के समान मजबूत हो जाती हैं।
बबूल की फलियों का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से टूटी हड्डी जल्द ही जुड़ जाती है।
26. उपदंश (सिफलिस) :
बबूल के फूलों को रात को ठंडे पानी में भिगो दें। सुबह इसे मसलकर छान लें और पी लें। इससे उपदंश का रोग मिट जाता है।
बबूल की छाल के शर्बत या काढ़े से कुल्ला करने से उपदंश के कारण उत्पन्न मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
बबूल के बारीक चूर्ण को घाव पर छिड़कने से लाभ होता है।
बबूल के पत्तों को बारीक पीसकर उसका लेप घावों पर लगाने से लाभ मिलता है।
बबूल और बेर की जड़ का शर्बत, फांट या काढ़ा में से किसी भी एक चीज से कुल्ला करने से उपदंश द्वारा होने वाले मुंह के छाले दूर होते हैं।
27. दाद के लिए : सांप की केंचुली में बबूल का गोंद मिलाकर दाद के स्थान पर पट्टी बांधने से लाभ होता है।
28. अम्लपित्त (एसीडिटी) : बबूल के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसमें 1 ग्राम आम का गोंद मिला देते हैं। इस काढ़े को शाम को बनाते हैं और सुबह पीते हैं। इस प्रकार से इस काढ़े को सात दिन तक लगातार पीने से अम्लपित्त का रोग मिट जाता है।
29. रक्त बहने पर : बबूल की फलियां, आम के बौर, मोचरस के पेड़ की छाल और लसोढ़े के बीज को एकसाथ पीस लें और इस मिश्रण को दूध के साथ मिलाकर पीने से खून का बहना बंद हो जाता है।
30. प्रमेह : बबूल के अंकुर को सात दिन तक सुबह-शाम 10-10 ग्राम चीनी के साथ मिलाकर खाने से प्रमेह से पीड़ित रोगियों को लाभ प्राप्त होता है।
31. कान के बहने पर : बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर तेज और पतली धार से कान में डालें। इसके बाद एक सलाई लेकर उसमें बारीक कपड़ा या रूई लपेटकर धीरे-धीरे कान में इधर-उधर घुमाएं और फूली हुई फिटकरी का थोड़ा-सा पानी कान में डालें। इससे कान का बहना बंद हो जाता है।
32. शक्तिवर्द्धक : बबूल के गोंद को घी के साथ तलकर उसमें दुगुनी चीनी मिला देते हैं इसे रोजाना 20 ग्राम की मात्रा में लेने से शक्ति में वृद्धि होती है।
33. कफ अतिसार : बबूल के पत्ते, जीरे और स्याह जीरे को बराबर मात्रा में पीसकर इसकी 10 ग्राम की फंकी रात के समय रोगी को देने से कफ अतिसार मिट जाता है।
34. रक्तातिसार (खूनी दस्त) :
बबूल की हरी कोमल पत्तियों के एक चम्मच रस में शहद मिलाकर 2-3 बार रोगी को पिलाने से खूनी दस्त बंद हो जाते हैं।
10 ग्राम बबूल के गोंद को 50 मिलीलीटर पानी में भिगोकर मसलकर छानकर पिलाने से अतिसार और रक्तातिसार मिट जाता है।
35. प्रवाहिका (पेचिश) : बबूल की कोमल पत्तियों के रस में थोड़ी सी हरड़ का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए इसके ऊपर से छाछ पीना चाहिए।
36. प्यास : प्यास और जलन में इसकी छाल के काढ़े में मिश्री मिलाकर पिलाना चाहिए इससे लाभ होता है।
37. अरुचि : बबूल की कोमल फलियों के अचार में सेंधानमक मिलाकर खिलाने से भोजन में रुचि बढ़ती है तथा पाचनशक्ति बढ़ जाती है।
38. कान के रोग : बबूल के फूलों को सरसों के तेल में डालकर आग पर पकाने के लिए रख दें। पकने के बाद इसे आग पर से उतारकर छानकर रख लें। इस तेल की 2 बूंदे कान में डालने से कान में से मवाद का बहना ठीक हो जाता है।
39. कान का दर्द : रूई की एक लम्बी सी बत्ती बनाकर उसके आगे के सिरे में शहद लगा दें और उसमें लाल फिटकरी को पीसकर उसका चूर्ण लपेट दें। इस बत्ती को कान में डालकर एक दूसरे रूई के फाये से कान को बंद कर दें। ऐसा करने से कान का जख्म, कान का दर्द और कान से मवाद बहना जैसे रोग ठीक हो जाते हैं।
40. पीलिया :
बबूल के फूलों को मिश्री के साथ मिलाकर बारीक पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। फिर इस चूर्ण की 10 ग्राम की फंकी रोजाना दिन में देने से ही पीलिया रोग मिट जाता है।
बबूल के फूलों के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 10 ग्राम रोजाना खाने से पीलिया रोग मिट जाता है।
41. सुजाक :
बबूल की 10-20 मुलायम पत्तियों को 1 गिलास पानी में भिगोकर आसमान के नीचे रखें और सुबह उस पानी को छानकर पीयें। इससे सुजाक रोग और पेशाब की जलन में आराम मिलता है।
30 ग्राम बबूल की मुलायम पत्तियों को रातभर पानी में भिगोकर सुबह मसलकर और छानकर उसमें गर्म घी मिलाकर रोगी को पिलायें, दूसरे दिन भी ऐसा ही करें, तीसरे दिन घी मिलाना छोड़ दें, और 4-5 दिन इसका हिम रोगी को पिलाने से सुजाक रोग में लाभ मिलता है।
बबूल के 10 ग्राम गोंद को 1 गिलास पानी में डालकर उसकी पिचकारी देने से मूत्राशय की सूजन, सुजाक की जलन दूर हो जाती है।
बबूल के 5-10 पत्तों को एक चम्मच शक्कर और चम्मच कालीमिर्च के साथ अथवा 5-6 अनार के पत्तों के साथ पीसकर छानकर पिलाने से सुजाक रोग मिट जाता है।
42. कमर में दर्द :
बबूल की छाल, फली और गोंद बराबर मिलाकर पीस लें, एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करने से कमर दर्द में आराम मिलता है।
बबूल के फूल और सज्जी बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह सूरज उगते समय 1 ग्राम की मात्रा में खाने से कमर दर्द में आराम होता है।
43. पसीना अधिक आना : बबूल के पत्ते और बाल हरड़ को बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक पीस लेते हैं, इस चूर्ण की सारे शरीर पर मालिश करते हैं और कुछ समय बाद रुककर स्नान कर लेते हैं। नियमित रूप से यह प्रयोग करते रहने से कुछ समय बाद पसीने का आना बंद हो जाता है।
44. घाव : बबूल के पत्तों का लेप घावों को भरता है और गर्मी की सूजन को दूर करता है।
45. खांसी :
बबूल का गोंद मुंह में रखकर चूसने से खांसी ठीक हो जाती है।
बबूल की छाल को पानी के साथ काढ़ा बनाकर पीने से खांसी दूर हो जाती है।
46. पायरिया : बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर गरारे व कुल्ला करने से पायरिया रोग में लाभ होता है।
47. कनीनिका प्रदाह : बबूल के पत्तों के काढ़े को उबालकर गाढ़ा कर लें। इस गाढ़े काढ़े में शहद को मिलाकर आंखों में रोजाना 3 से 4 बार लगाने से कनीनिका प्रदाह, व्रण (घाव), या ढलका रोग (आंखों से पानी आना) पूरी तरह से दूर हो जाता है।
48. गुदा पाक : बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर गुदा को रोजाना 3 से 4 बार धोयें। रोजाना इससे गुदा को धोने से गुदा पाक जल्दी ठीक हो जाता है।
49. उर:क्षत (सीने में घाव) : 10 ग्राम बबूल की मुलायम पत्तियां, 10 ग्राम अनार की पत्ती, 10 ग्राम आंवला और 6 ग्राम धनिया लेकर रात को ठंडे पानी में भिगो देना चाहिए। इसे सुबह मसलकर और छानकर इसमें थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर रख लेते हैं। यह पानी दिन में 3-4 बार पीने से मुंह से खून का आना बंद हो जाता है।
50. जीभ और मुंह का सूखापन : मुंह व जीभ का सूखापन खत्म करने के लिए बबूल की गोंद मुंह में रखकर चूसें। इससे मुंह का सूखापन पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
51. जीभ की सूजन और जलन : बबूल की मुलायम पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाकर पीयें। इससे गर्मी अथवा सर्दी के कारण मुंह में छाले, जीभ सूखना तथा जीभ पर दाने हो जाने की बीमारी दूर हो जाती है।
52. मसूढ़ों का फोड़ा : 1 ग्राम भुनी सुपारी का चूर्ण, 1 ग्राम फिटकरी, 2 ग्राम सेलखड़ी एवं 1 ग्राम कत्था को मिलाकर बारीक पॉउडर (मंजन) बना लें। रोजाना 2 से 3 बार मंजन करने से मसूढ़ों का दर्द और फोड़े खत्म हो जाते हैं।
53. मसूढ़ों का रोग : मसूढ़ों की सूजन तथा गले के दर्द में बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करें। इसके रोजाना प्रयोग से मसूढ़ों का रोग ठीक हो जाता है।
54. हिचकी का रोग:
500 मिलीलीटर पानी में बबूल के कांटे को पकायें। जब 3 हिस्सा पानी जल जायें, तब इसे छानकर रोगी को पिलायें इससे हिचकी में लाभ होता है।
बबूल के सूखे या गीले कांटों को आधा किलो पानी में डालकर उबाल लें। 250 मिलीलीटर पानी शेष रह जाने पर उसमें शहद मिलाकर पीने से हिचकी दूर हो जाती है।
55. पेशाब का अधिक मात्रा में आना : बबूल की कच्ची फली को छाया में सुखाकर उसे घी में तलकर पाउडर बना लें। इस पाउडर की 3-3 ग्राम मात्रा रोजाना सेवन करने से पेशाब का ज्यादा आना बंद होता है।
56. बवासीर (अर्श) : बबूल के बांदा को कालीमिर्च के साथ पीस लें। इस मिश्रण को पानी के साथ रोजाना सुबह-शाम पीने से बवासीर में खून का निकलना बंद हो जाता है।
57. मधुमेह के रोग :
बबूल की कोमल पत्तियों को सिलपर पानी के साथ पीस लें, साथ ही उसमें 4-5 कालीमिर्च भी डाल दें और छानकर सुबह-शाम पियें। इससे मधुमेह के रोग में लाभ होता है।
3 ग्राम बबूल के गोंद का चूर्ण पानी के साथ या गाय के दूध के साथ दिन में 3 बार रोजाना सेवन करने से मधुमेह रोग में लाभ पहुंचता है।
58. मोटापा दूर करने के लिए : बबूल के पत्तों को पानी के साथ पीसकर शरीर पर लगाने से मोटापे के रोग में लाभ होता है।
59. बिस्तर पर पेशाब करना : बबूल की कच्ची फलियों को छाया में सुखाकर, घी में भूनकर उसमें मिश्री मिलाकर 4-4 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम गर्म दूध के साथ पीने से बिस्तर पर पेशाब करने का रोग ठीक हो जाता है।
60. हाथ-पैरों में पसीना आना : बबूल के पत्ते को पीसकर उसमें हरड़ का चूर्ण मिलाकर रोजाना मालिश करने से हाथ-पैरों में पसीना आना बंद हो जायेगा। बबूल के सूखे पत्ते को हाथ-पैरों पर मलने से भी लाभ होता है।
61. नहरूआ (स्यानु) : नहरूआ को बबूल के बीजों के साथ पीसकर घाव पर लेप करने से रोगी को लाभ मिलता है।
62. हाथ-पैरों के फटने पर : फटी एड़ी या हाथ की घाईयों में कीकर की पिसी हुई गोली देने से देने लाभ मिलता है।
63. कुष्ठ (कोढ़) : 30 ग्राम बबूल की छाल का हिम (शर्बत) बनाकर पीने से कोढ़ रोग समाप्त हो जाता है।
64. होंठों के लिए : बबूल की छाल का चूर्ण बनाकर होठों पर लगाने से होठों के छाले और उपदंश मिट जाता है।
65. जलने पर : बबूल की गोंद को पानी में घोलकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन दूर हो जाती है।
66. लिंगोद्रेक (चोरदी) : 3 ग्राम कीकर (बबूल) की गोंद को मिश्री के साथ रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से 3 दिनों में ही लिंगोद्रक (चोरदी) रोग दूर हो जाता है।
67. सिर का दर्द : पानी में बबूल का गोंद घिसकर सिर पर लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
68. विनसेण्ट एन्जाइना के रोग में : बबूल की छाल को पीसकर पानी में मिलाकर काढ़ा बनाकर उससे गरारे करने से विनसेण्ट एन्जाइना के रोग में आराम आता है। कृपया जनहित में शेयर करें!

रविवार, 24 मार्च 2019

वैद्य के नुस्खे

वैद्य  के नुस्खे
1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय।
दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।
2.मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल।
मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।।
3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम।
खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।
4.छिलका लेंय इलायची,दो या तीन गिराम।
सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।
5.अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय।
बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ जाय।।
6.गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार।
सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।।
7.खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय।
दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।।
8.रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल।
खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।
9.भून मुनक्का शुद्ध घी,सैंधा नमक मिलाय।
चक्कर आना बंद हों,जो भी इसको खाय।।
10.मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम।
तीन बार दिन में पियें, पथरी से आराम।।
11.दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय।
पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर जाय।।
12.आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय।
पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।।
13.सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम।
दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।
14.एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाइ।
चीनी सँग लें बीस दिन,पथरी दे न दिखाइ।।
15.खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम।
लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।
16.बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय।
गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।
17.लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय।
इसको नियमित खाय तो,पथरी बाहर आय।।
18.दामिड़(अनार) छिलका सुखाकर,पीसे चूर बनाय।
सुबह-शाम जल डाल कम, पी मुँह बदबू जाय।।
19. चूना घी और शहद को, ले सम भाग मिलाय।
बिच्छू को विष दूर हो, इसको यदि लगाय।।
20. गरम नीर को कीजिये, उसमें शहद मिलाय।
तीन बार दिन लीजिये, तो जुकाम मिट जाय।।
21. अदरक रस मधु(शहद) भाग सम, करें अगर उपयोग।
दूर आपसे होयगा, कफ औ खाँसी रोग।।
22. ताजे तुलसी-पत्र का, पीजे रस दस ग्राम।
पेट दर्द से पायँगे, कुछ पल का आराम।।
23.बहुत सहज उपचार है, यदि आग जल जाय।
मींगी पीस कपास की, फौरन जले लगाय।।
24.रुई जलाकर भस्म कर, वहाँ करें भुरकाव।
जल्दी ही आराम हो, होय जहाँ पर घाव।।
25.नीम-पत्र के चूर्ण मैं, अजवायन इक ग्राम।
गुण संग पीजै पेट के, कीड़ों से आराम।।
26.दो-दो चम्मच शहद औ, रस ले नीम का पात।
रोग पीलिया दूर हो, उठे पिये जो प्रात।।
27.मिश्री के संग पीजिये, रस ये पत्ते नीम।
पेंचिश के ये रोग में, काम न कोई हकीम।।
28.हरड बहेडा आँवला चौथी नीम गिलोय,
पंचम जीरा डालकर सुमिरन काया होय॥
१ दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय, होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..
२ बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल, यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..
३ अजवाइन को पीसिये , गाढ़ा लेप लगाय, चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..
४ अजवाइन को पीस लें , नीबू संग मिलाय, फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..
५ अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम, पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..
६ ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल, नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..
७ अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग, नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..
८ रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर, बेहतर लीवर आपका, टी० बी० भी हो दूर..
९ गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम, रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..
१० शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम, बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..
११ चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय, चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..
१२ लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह, जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..
१३ प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह, जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..
१४ सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय, दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..
१५ सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार, दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..
१६ तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल, सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..
१७ थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग, अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.
१८ अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय, मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..
१९ ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि, उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि..
२० दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ, दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ..
२१ मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल, बने सुगन्धित मुख, महक, दूर होय तत्काल..
२२ कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट, घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..
२३ बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग, सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..
२४ बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम, सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..
२५ नीबू बेसन जल शहद , मिश्रित लेप लगाय, चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..
२६. मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय, कंठ सुरीला साथ में , वाणी मधुरिम होय.
२७. पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज, नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..
२८ ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम, नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..
२९ कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय, अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..
३० अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच ग्राम | कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम ||